हार्ट अटैक और हृदय रोगों की रोकथाम के लिए शिक्षा शिविर आयोजित

शब्दवाणी समाचार सोमवार 30 सितम्बर 2019 नई दिल्ली। साइंस एंड आर्ट ऑफ लिविंग ( साओल  ) द्वारा हाल ही में हृदय स्वास्थ्य पर एक दिवसीय शिक्षा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य लोगों में दिल की बीमारियों को जड़ से मिटाने के लिए शिक्षा प्रदान करना था। इस ट्रेनिंग सेशन का आयोजन 'एन एजुकेशन वैक्सीन' के नाम के बैनर के तहत सबसे आम लेकिन घातक बीमारी यानी कि हार्ट अटैक की रोकथाम के लिए संभावित तरीकों के बारे में जागरुकता फैलाने और लोगों को शिक्षित करने के लिए किया गया था।



अपनी 25वीं सालग्रह के अवसर पर  साओल  के संस्थापक, डॉक्टर बिमल छाजेड़ ने हृदय रोगों में कमी लाने के लिए जीवनशैली से संबंधित बदलावों, डाइट, एक्सरसाइज और योगा पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में रोगियों को समग्र हृदय देखभाल के तरीकों के बारे में बताया गया। साथ ही जो लोग हृदय रोग की चपेट में आ सकते हैं उन्हें इसके बचाव के तरीकों के बारे में बताया गया। आहार विशेषज्ञों और योग विशेषज्ञों ने रोगियों को भोजन, एक्सरसाइज और योगा द्वारा हृदय रोगों के प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया।
नई दिल्ली स्थित साओल हार्ट सेंटर के निदेशक, डॉक्टर बिमल छाजेड़ ने बताया कि, “हृदय संबंधी बीमारियाँ, जीवनशैली से संबंधित बीमारियां हैं और इसलिए उपचार को भी उसी दिशा में केंद्रित किया जाना चाहिए। भारतीय समाज में ये बीमारियां एक बड़े बोझ का रूप ले चुकी हैं, जिससे लाखों लोग और देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। इन बीमारियों को जड़ से मिटाने का समय आ गया है। वर्तमान में हृदय रोग विशेषज्ञ बाईपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी, दवाओं, आपातकालीन उपचारों के अधिक उपयोग पर जोर देकर गलत रास्ता अपना रहे हैं। समस्या यह है कि वे हार्ट अटैक और हृदय रोगों के वास्तविक कारण को अनदेखा कर रहे हैं। हृदय रोगों के वास्तविक कारण को खत्म करने से हृदय रोगों के मामलों में कमी लाई जा सकती है।”
दिल की बीमारी दुनिया के अधिकांश देशों में मृत्यु का सबसे आम कारण बनी हुई है। विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत में हृदय रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा है और इसके मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। भारत में लगभग 8-10 करोड़ लोग हृदय से संबंधित किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं और इस रोग के कारण हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। इससे प्रति दिन लगभग 9000 मौतें होती हैं और प्रति वर्ष लगभग 30 लाख मौतें होती हैं। इन आंकड़ों के अनुसार देखा जाए तो, कार्डियोलॉजी विज्ञान विफल हो रहा है।
डॉक्टर बिमल ने आगे बताया कि, “मैंने पिछले 24 सालों में जीवनशैली में बदलाव, यूएस एफडीए अनुमोदित ईईसीपी और आयुर्वेद, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी व डीटॉक्सीफिकेशन जैसे नॉन-इनवेसिव उपचारों से लगभग 2 लाख हृदय रोगियों का इलाज किया है। एसएएओएल सेफटी सर्कल के विकास के साथ, जो हृदय स्वास्थ्य का सबसे अच्छा इंडीकेटर है, हृदय के संभावित रोगों के रोकथाम में मदद मिली है। इसके तीन सर्कल हैं और नियंत्रण के लिए 12 कारक, मेडिकल से संबंधित 6 पैरामीटर और 4 पैरामीटर हेल्दी डाइट और जीवनशैली में बदलावों से संबंधित हैं।



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