महिला पहलवान मे खेलो का जुनून इस कदर की प्रसूति के दौरान भी अवकाश नहीं लिया

शब्दवाणी समाचार सोमवार 23 सितम्बर 2019 अलवर। अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती कोच व रेफरी तथा वर्तमान में अलवर राजस्थान की जिला खेल अधिकारी श्रीमती अंजना शर्मा ने राजकीय सेवा में रहते हुये कुछ ऐसा कार्य किया जो सभी महिलाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है । इस महिला पहलवान को कुश्ती खेल का जुनून इस कदर हावी था की उसने गर्भावस्था के दौरान व्यायाम व कार्य करना नहीं छोड़ा वह बताती है की गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से शरीर पर फैट नहीं चढ़ता है। इस दौरान व्यायाम करना मां और बच्चे दोनों के लिए ही बहुत फायदेमंद होता है | इसके लिए सरकार की और से दिये जाने वाला प्रसूति अवकाश की सुविधाए कामकाज महिलाओ के लिए होती है पर अंजना मे खेलो का जुनून इस कदर हावी है की वह गर्भावस्था के पहले और बाद मे भी अपना कार्य करना जारी रखा व खेलो की गतिविधियो मे शामिल होना नहीं छोड़ा | अंजना चाहती तो प्रसूति अवकाश के लिए सरकारी महिलायों कर्मी को बच्चे के जन्म पर मिलने वाली 6 महीने की छुट्टी का लाभ उठा सकती थी | लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अंजना का कहना है कि मेरे अवकाश लेने की वजह से खेलों को नुकसान होता । क्योंकि उन दिनो 14 खेलो के लिए शिविर आयोजित होना था । उस शिविरो मे अंजना का अहम रोल था |



अंजना ने बताया की मैंने 4 जून 2019 को अपनी पूरी ड्यूटी की । फिर उसी दिन गर्भावस्था के दौरान 4 जून शाम को 7.30 बजे उन्होने एक बेटी का जन्म दिया उसके अकले दिन 5 जून को ईद व 6 जून को महाराणा प्रताप जयंती व 7 जून का अवकाश लिया एवं शनिवार 8 तथा रविवार 9 जून पर अवकाश रहकर 10 जून को नियमित काम पर लोट आई | मां और बेटी पूर्ण रूप से स्वस्थ है । महिला पहलवान अंजना कहती है मे बेटी को पहलवान बनाउगी जो देश के लिए मेडल जीतेगी इसी लिए अंजना घर मैं अपनी बेटी का पूरा ध्यान रख रही है, इसी दिन शाम को 7.30 बजे मेने अपनी बेटी को जन्म दिया । यह संयोग रहा कि बेटी को जन्म देने के बाद 5 जून को ईद व 6 जून को महाराणा प्रताप जयंती का अवकाश था । मैंने 7 जून का आकस्मिक अवकाश लिया । 8 जून को शनिवार व 9 जून को रविवार का अवकाश था । और इसके बाद 10 जून को मैंने काम संभाल लिया ।
पूर्व महिला पहलवान व कोच अंजना ने बताया कि ऑफिस में जाकर कामकाज संभालने से पूर्व मैंने महिला चिकित्सक से भी राय ली । उनसे पूछा कि क्या मैं थोड़ा - थोड़ा चल फिर सकती हूं । चिकित्सक ने मुआयना करने के पश्चात कहा हा तुम एक स्ट्रांग खिलाड़ी हो सब कुछ कर सकती हो पर ज्यादा नहीं सुरुवाती दौर मे थोड़ा थोड़ा कार्य शुरू कर सकती हो । इसके बाद मैं अपनी सास व बेटी को लेकर कार्यालय पहुंची और काम किया । इसके लिए अंजना को अपने परिवार वालो को भी मनाना पड़ा। सास व परिवार वालो ने उसे ऑफिस जाने से मना किया तो अंजना ने कहा कि बेड़ रेस्ट करने से मे बीमार हो जाऊगी खेलो की गतिविधियो मे शामिल होना व स्वस्थ खेल वातावरण से मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी, तब जाकर परिवार वाले किसी तरह से तैयार हुए।
खेल अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं अंजना शर्मा, रोजाना तड़के 4 बजे पहुंच जाती हैं मैदान पर | अलवर में पहली बार उन्होने हिंद केसरी कुश्ती दंगल भी करवाया | वर्ष 2012 में जिला क्रीड़ा परिषद में कुश्ती कोच के रूप में कार्य ग्रहण करने वाली अंजना ने इंदिरा गांधी स्टेडियम में कोचिंग शुरू की। इस दौरान जिला क्रीड़ा परिषद के पास कुश्ती के लिए अंतरराष्ट्रीय मानको वाले गद्दे नहीं थे। अंजना ने अपने पप्रयासो से भारतीय कुश्ती संघ के माध्यम से हिंद केसरी दंगल का आयोजन कराया। 31 मार्च को राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में दशहरा मैदान में हुए इस दंगल के लिए महासंघ की और से अंतरराष्ट्रीय मानको वाले गद्दे दिए गए। कई पुरुष व महिला पहलवान इसमें शामिल हुए थे। इसके अलावा 2013 में अंजना ने ईटाराणा छावनी में सैनिकों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया।



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