पड़ोसियों के सीपीआर एडमिनिस्ट्रेशन की मदद से कार्डियक अरेस्ट के मरीज को मिला नया जीवन

शब्दवाणी समाचार शनिवार 11 जनवरी 2020 वैशाली। 49 वर्षीय वैशाली निवासी पार्क में 10 साल के बेटे के साथ खेल रहा था, जब वह कार्डियक अरेस्ट के कारण अचानक ही बेहोश हो गया। सीपीआर की ट्रेंनिंग लेने के कारण पुलिस ड्यूटी कर रहे श्री विजय मलिक और बैडमिंटन कोच, श्री नरेंद्र सिंह ने मिलकर तुरंत मरीज की जान बचाई। सीपीआर एडमिनिस्ट्रेशन के बाद मरीज को मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में ले जाया गया। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसपर डीसी कार्डियोवर्ट (इलेक्ट्रिक शॉक) का इस्तेमाल किया गया और फिर एक्यूट हार्ट अटैक के आसार नजर आने के कारण उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।



हॉस्पिटल के प्रोटोकॉल्स के अनुसार, मरीज को आगे की जांचों के लिए कैथ लैब ले जाया गया, जहां उसपर हाई रिस्क एंजियोप्लास्टी की गई। इसके कुछ ही मिनटों में मरीज की ब्लॉक्ड आर्टरी नॉर्मल हो गई, जिसके बाद उसे सीसीयू में ट्रांसफर कर दिया गया। कार्डियक अरेस्ट के कारण मरीज के मस्तिष्क की हालत बिगड़ जाती है। जब अगली सुबह मरीज को होश आया तो उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। यह सीपीआर एडमिनिस्ट्रेशन ही था जसके कारण मरीज का मस्तिष्क नॉर्मल हो पाया।
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉक्टर गौरव मिनोचा ने बताया कि, “एक्यूट हार्ट अटैक की स्थिति में टीम पहले ब्लॉक्ड आर्टरी को खोलने की कोशिश करती है। लेकिन यदि मरीज पर पहले से सीपीआर नहीं किया गया होता तो, एंजियोप्लास्टी का कोई फायदा नहीं होता। आगे की जांच से मरीज में तनाव के कारण दिल की बीमारी का पता चला। मरीज इस तनाव को काफी समय से नजरअंदाज कर रहा था, परिणामस्वरूप मरीज को कार्डियक अरेस्ट हुआ। यदि वह पहले से स्थिति को गंभीरता से लेता तो, उसकी हालत में सुधार हो सकता था। मरीज की पत्नी ने बताया कि वह पड़ोसियों की शुक्रगुजार है कि उन्हें सीपीआर की जानकारी थी, जिसके कारण आज उसके पति की जान बच सकी है। भारत में कार्डियक अरेस्ट के बहुत ही कम मरीजों की जान बच पाती है क्योंकि उनमें या आसपास के लोगों में सीपीआर की जानकारी नहीं होती है।
गतिहीन जीवनशैली और खराब डाइट, कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारण हैं। लोगों को समय-समय पर अपनी जांच कराते रहना चाहिए। लोगों को जांच के लिए बीमारी का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार छोटी सी लापरवाही व्यक्ति की जान ले सकती है।
वौशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के वीपी-ऑपरेशन्स, डॉक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि, “इस बात को हम अच्छे से समझते हैं कि मरीज को इमरजेंसी लाने तक काफी समय लगता है, जिसके कारण उसके बचने की संभावनाएं बहुत कम रह जाती हैं। इसलिए हम समाज के लोगों को सीपीआर के बारे में जागरुक करना चाहते हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों की जान बच सके।



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