लव अग्रवाल ने अंग्रेजी में गिट-पिट करके दहशत फैलाया : मुकेश जैन 

शब्दवाणी समाचार वीरवार 9 अप्रैल 2020 नई दिल्ली। अखिल भारत हिन्दू महासभा-दारासेना सहित दर्जन भर हिन्दू व सामाजिक संगठनों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन को बधाई दी कि उनके आह्वान पर देश की जनता ने कोरोना के विषाणुओं के खिलाफ लड़ाई में ताली-थाली शंख घोष के साथ-साथ दीयों और पटाखें छुड़ाकर शास्त्र सम्मत तरीकों से यह कारगर लड़ाई लड़ी। 



इसी के साथ हिन्दू महासभा और अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रप्रकाश कौशिक जी के नेतृत्व में स्वास्थ्यमंत्री श्री हर्षवर्धन जी को एक ज्ञापन देकर कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी श्री लव अग्रवाल और अन्य अधिकारीगण मीडिया के सामने जिस अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और नये-नये उन अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल कर रहे है जिनका अर्थ अधिकांश भारतवासियों को तो दूर की बात अंग्रेजी जानने वालों को भी नहीं है। फिर बिना देशवासियों को शामिल किये कारोना से खिलाफ कौन सी लड़ाई लड़ी जा रही है। यह हमारी समझ से बाहर है। 
ज्ञापन पर प्रकाश डालने हुए अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय महामंत्री और दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि मंच और उससे जुड़े हिन्दू व सामाजिक संगठनों का मानना है यह लड़ाई जीतने के लिये हमें इस देश की हिन्दू और मुस्लिम जनता को उसी की भाषा में समझाना जरूरी है। जो सरकार चाह रही है वह इस देश की आम गरीब और अमीर जनता सदियों से करती आ रही है। जिन्हें सूतक और पातक और छुआछूत के नियम कहते है। जो महामारी जैसी विपदा में भी अपनाये जाते हैं। किन्तु स्वास्थ्य मंत्रालय के डाक्टरों और अधिकारियों ने इन्हे लाकडाउन ए क्वारेन्टाइन ए आइसोलेशन ए सेनेटाइजर ए सेनिटेशन ए सोशल डिस्टेंस  आदि नये-नये नाम देकर पूरे देश को दहशत में डाल दिया है। जो नियम हम घर-परिवार में रहते हुए और मन्दिरों में जाते हुए भी हम लगातार अपनाते रहे हैं, उन सरल नियमों को सरकार के अंग्रेजी परस्त अधिकारियों ने दहशत का पर्याय बना दिया है। आज देश में कोरोना महामारी जो विकराल रूप धारण कर रही है उसके लिये स्वास्थ्य मंत्रालय के लव अग्रवाल जैसे अंग्रेजी परस्त अधिकारी ही जिम्मेदार है, जिन्हे इस देश की राजभाषा हिन्दी में बोलते हुए शर्म आती है। जो दिखा तो रहे है कि हम हिन्दी में बोलकर इस देश की जनता से संवाद कर रहे हैं किन्तु इनके हर वाक्य में 80 प्रतिशत शब्द अंग्रेजी के होते है। जबकि हमार गृहमंत्रीे और राजभाषा विभाग के अध्यक्ष माननीय अमित शाह जी ने हाल ही में मंत्रियों, सांसदों सहित सभी अधिकारियों को राजभाषा नियमों का पालन करते हुए जनता आ।र मीडिया से संवाद हिन्दी में ही करने के निर्देश दिये है। 
श्री मुकेश जैन ने बताया कि हमारे घरों की रजस्वला महिलायें अपने आपको स्वयं ही घर की रसोई से अलग कर लेती हैं और अपने खाये बर्तनों को राख से मांजकर आग में तपाकर ही रसोई के अन्य बर्तनों के साथ रखती है। आज जो महामारी से संक्रमित व्यक्ति को 14 दिन पृथकवास में रख रहे है। वही हम बारह दिन तक करके तेहरवे दिन तेहरवीं मनाते हुए 13 दिन तक घर में ही रहकर घर से बाहर निकले बिना ही करते आये है। अन्त्येष्ठी कर्म के बाद हम जिस प्रकार की स्वच्छता शूचिता अपनाते हुए आज भी अपने मोबाईल तक पर पानी के छींटे मारते हैं। स्नान के बाद धुले हुए कपड़े पहनते हैं। जिसे डाक्टरों ने कभी नहीं समझा और मुर्दे के बराबर में बैठकर ही चाय पीते रहे हैं। यही कारण है कि आज अपने इन्हीं दूषित संस्कार के रहते डाक्टर और नर्से भी कोरोना के संक्रमण से संक्रमनित हो रहे हैं। 
अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच द्वारा दिये ज्ञापन के जरिये हिन्दू व सामाजिक संगठनों ने लव अग्रवाल जैसे अंग्रेजी परस्त अधिकारियों को जिनकी अंग्रेजी शब्दावली से पूरा देश दहशत में आ गया, कोरोना के खिलाफ मुहिम से अलग करने की मांग की। इसी के साथ इन मरीजों की सेवा और भोजन व्यवस्था में आयुष विभाग के वैद्यों और मन्दिरों के पंडितों को लगाने की मांग की, जो बतायेंगे कि महामारी के इस काल में अस्पर्शयता यानि छुआछूत ही वरदान है। जिसे कहने में स्वास्थ्य मंत्रालय के डाक्टर और आपके अधिकारी गण समझ रहे है कि यह तो थूक कर चाटना है। क्योंकि इस महामारी के लिये दवाओं के नहीं बचाव की ज्यादा जरूरत है। जिसे डाक्टर नहीं हमारे वैद्य और पण्डित ज्यादा समझते है।



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