भारत में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) टेक्नोलॉजी

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 17 अप्रैल  2021, नई दिल्ली। वाहन सुरक्षा विभिन्न क्षेत्रों में से एक है, जिसमें मोटर वाहन कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। इन वर्षों में, मोटर वाहन कंपनियों ने कई टेक्नोलॉजी विकसित की हैं, जो सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकती हैं। सुरक्षित और बेहतर ड्राइविंग के लिए ड्राइवरों की सहायता के लिए वाहन प्रणालियों को स्वचालित, सुविधाजनक और बेहतर बनाने वाली इन तकनीकों को एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) कहा जाता है। ट्राइटन मार्केटिंग रिसर्च के एक हालिया अध्ययन के अनुसार भर में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का बाजार 2027 तक 19.46% की सीएजीआर से बढ़कर 80.97 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। भारत में वर्तमान में एमजी मोटर, वोल्वो, बीएमडब्लू और मर्सिडीज जैसी प्रीमियम कार निर्माता कंपनियां वास्तविक एडवांस असिस्टेंस सिस्टम प्रदान कर रही हैं जैसे एडॉप्टिव कंट्रोल, लेन कीपिंग असिस्टेंस और ऑटोमेटिक ब्रेकिंग।       

वर्तमान में, भारतीय एडीएएस बाजार अपने प्रारंभिक चरण में है और कुछ ही प्रतिशत वाहनों को इन सॉल्युशन से लैस किया गया है, जो ड्राइविंग ऑटोनोमी क्लासिफिकेशन के निचले स्तर (1-2) के भीतर आते हैं। ऑटोमेकर्स का मानना है कि भारत में एडीएएस बाजार सुरक्षित ड्राइविंग परिस्थितियों की बढ़ती आवश्यकता की वजह से बढ़ रहा है। निम्न दिए गए हुए कई महत्वपूर्ण एडीएएस टेक्नोलॉजी हैं:

एडॉप्टिव क्रूज कंट्रोल: एडॉप्टिव क्रूज़ कंट्रोल (एसीसी) एक इंटेलिजेंट सिस्टम है, जो ड्राइवरों को वाहन चलाते समय वाहनों के बीच एक निर्धारित दूरी का ध्यान रखने की अनुमति देता है और वाहनों को अन्य वाहनों की ओर जाते समय अपनी गति को ऑटोमेटिक रूप से एडजस्ट करने की अनुमति देता है। एसीसी को लेज़र सेंसर पर प्री-सेट किया जाता है, जो किसी भी वाहन का पता लगने पर उसमें बाधा उत्पन्न करने का निर्देश देता है। एडॉप्टिव कंट्रोल सिस्टम में एक रडार हेडवे सेंसर, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर और लॉन्जिट्यूडिनल कंट्रोलर शामिल है। सिस्टम इंजन और ब्रेक्स के साथ इंटीग्रेट किया हुआ है ताकि जब सिस्टम सड़क मार्ग में किसी भी वाहन का पता लगाए तो यह ऑटोमेटिक रूप से वाहन को धीमा कर देता है और निशान स्पष्ट होने पर वाहन को निर्धारित गति तक पहुंचाने की अनुमति देता है। भारत में एसीसी प्रणाली के साथ सबसे आगे की कार मॉडल एमजी ग्लॉस्टर, बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज और वोल्वो एस 60 हैं।

लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम: लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम ड्राइवरों को अपने वाहनों को अपनी लेन में रहने और सड़क पर टक्कर को कम करने में मदद करती है। यदि वाहन अपने लेन से भटकना शुरू करें तो ये सिस्टम ऑडियो-विज़ुअल अलर्ट पैदा करते हैं। लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम धारीदार और ठोस लेन चिह्नों को स्वीकार करने के लिए रियर-व्यू मिरर के पास एक छोटे से कैमरे का उपयोग करती है। जब वाहन उपयुक्त ब्लिंकर के बिना लेन से भटकना शुरू कर देता है, तो यह सिस्टम प्रतिक्रिया करने के लिए अलार्म चलाता है। भारत में केवल एमजी के ग्लॉस्टर में यह सुविधा है।

फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग सिस्टम: फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग सिस्टम इन-व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम हैं जो ड्राइवरों को सड़क के भीतर विपरीत दिशा से आ रहे वाहन या वस्तु के साथ टक्कर के मामले में सूचित करते हैं। नवीनतम कोलिजन वार्निंग सिस्टम रडार, लेजर और कैमरा सिस्टम पर काम करता है और टक्करों की किसी भी संभावना के मामले में सिर्फ ऑडियो, विजुअल और टेक्टिकल अलर्ट उत्पन्न करती है। ये सिस्टम दोनों वाहनों के बीच की जगह, कोणीय दिशा और रिलेटिव स्पीड को मापते हैं। टक्कर की चेतावनी देने वाली कई प्रणालियों को वाहन की गति में बाधा उत्पन्न करने के लिए एडॉप्टिव कंट्रोल सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किया जाता है जब किसी भी वाहन का पता लगाया जाता है।

टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (टीएमपीएस): सड़क पर वाहन सस्पेंशन और सुरक्षा सुनिश्चित करने में टायर प्रेशर एक महत्वपूर्ण पैरामीटर हो सकता है। असमान टायर प्रेशर, माइलेज के मुद्दे, अधिक उत्सर्जन, टायर के चलने वाले जीवन को कम कर सकता है और टायर फेल्युर का कारण बन सकता है, जो गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में तब्दील हो सकता है। टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम क्रिटिकल एडीएएस सिस्टम हैं क्योंकि यदि किसी टायर में हवा कम होती है तो यह ड्राइविंग फोर्स को चेतावनी देता है। टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम दो तरह के होते हैं, इनडायरेक्ट और डायरेक्ट सिस्टम। इनडायरेक्ट टीपीएमएस सिस्टम टायरों के आरपीएम (घुमाव प्रति मिनट) को मापते हैं और यदि कोई अप्रत्याशित आरपीएम मापा जाता है, तो ड्राइव सिस्टम द्वारा इशारा करता है। दूसरी ओर, डायरेक्ट टीएमपीएस सिस्टम हर टायर से जुड़े प्रेशर सेंसर होते हैं, जो प्रत्येक टायर के अंदर वास्तविक दबाव की रीडिंग देते हैं।

पार्किंग असिस्टेंस सिस्टम: आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले एडीएएस सिस्टम में पार्किंग असिस्टेंस सिस्टम एक है। एमजी ग्लॉस्टर और साइट्रोन सी5 में पार्किंग असिस्टेंस सिस्टम हैं जो आम तौर पर अल्ट्रासोनिक सेंसर का उपयोग करती हैं, जो कि पार्किंग में आने वाले अवरोधों का पता लगाने और अलार्म को ट्रिगर करने के लिए अगले और पिछले बम्पर पर लगे होते हैं। पार्किंग के दौरान विजुअल असिस्टेंस प्रदान करने के लिए रियर कैमरा अतिरिक्त रूप से सिस्टम के साथ इंटीग्रेट है। सिस्टम वाहन और अवरोध के बीच की जगह का अंदाजा लगाता है और ड्राइवर को अलर्ट करता है।

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