नियम कानूनों की खुले आम धज्जियां उड़ा रही है संचार कम्पनियां



शब्दवाणी समाचार, वीरवार 27 मई  2021(कारी मुनफेत) ग़ाज़ियाबाद। सरकारी तंत्र की मार झेल रही 10 में से मात्र 3 संचार कम्पनियां अपने भाग्य  की लड़ाई अब नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाकर लड़ रही है। इनकी बानगी आप हर कॉलोनी के मुख्य चौराहों पर छतरी लगाकर सिम बेच रहे हैं लोगों को देखकर की जा सकती है। जबकि ट्राई के सख्त नियमों के मुताविक सिम खरीदने वाले का नाम,पता एवं फोटो के साथ-साथ सिम बेचने वालों का भी नाम,पता एवं फोटो होना चाहिए। लेकिन चौराहों पर पर सिन बेच रहा व्यक्ति अपना पता क्या लिखता होगा जाहिर है फर्जी ही होगा। और इस बात की क्या गारंटी हिअ कि उसका फोटो भी सही होगा। दर-असर इस फर्जी बाड़े का फायदा यह संचार कम्पनियां सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से उठाने के जुगत में लगी है सिम में उसने आधार के कम्पल्शन को खत्म कर दिया था। किसी भी पहचान पत्र सरकारी और गैर सरकारी सेवाओं में लागू कर दिया था। 

छतरी लगाकर सिम बेच रहे लोगों को आप गरीब और अशिक्षित लोगों की कॉलोनी में खुले आम देखा जा सकता है।  इन्हें ना तो किसी पुलिस और प्रशासन का डर है और ना ही ट्राई के सख्त नियमों का खौफ। यह संचार कम्पनियां बेरोजगार और भोलेभाले ल्प्गों को अपने जाल में फंसाकर इस गोरखधंधे में शामिल है। यह कम्पनियां ग्राहकों को भी ऐसे लालच देती है की ना चाहते हुए भी ग्राहक इनके चाल में फंस जाता है। सरकारों की अन्य एजेंसियां की गुलामी की तर्ज पर ट्राई ने भी अपनी आँख, नाक, कान, मुहं सब बंद कर लिया है। इन कम्पनियां के संबंधित अधिकारियों से बात करने पर यह लोग कन्नी काट जाते हैं।  ज्यादा कुरेदने पर कहते हैं कि ऐसा है तो हटवा देंगे।

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