ख्‍वाबों के परिंदे जून में केवल वूट पर होगा प्रसारण

◆ टेलीविजन से वेब तक, आशा नेगी का सफर एक स्‍वागत योग्‍य बदलाव है, क्‍योंकि वे वूट के बि‍लकुल नये ओरिजिनल ‘ख्‍वाबों के परिंदे’ के साथ वापसी कर रही हैं

◆ वूट का नया ओरिजिनल ‘ख्‍वाबों के परिंदे’ तीन दोस्‍तों का एक अकल्‍पनीय सफर है, जिसमें वे एक-दूसरे के सच्‍चे साथी बनकर जिन्‍दगी की नई तलाश कर रहे हैं 

शब्दवाणी समाचार, शुक्रवार 11 जून  2021, नई दिल्ली। जिंदगी एक सफर है! एक अकल्‍पनीय यात्रा, जिसमें अनदेखे मोड़ आते हैं, जो आपके जीवन को हमेशा के लिये बदल सकते हैं। लेकिन आप अपने दोस्‍तों की मदद से इससे उबर सकते हैं, । वूट की बिलकुल नई पेशकश ‘ख्‍वाबों के परिंदे’ आपको उम्‍मीद, जिन्‍दगी की नई तलाश और एक-दूसरे का सच्‍चा साथी बनने के सफर पर ले जाएगी। तीन दोस्‍त बिंदिया, दीक्षित और मेघा अपने जख्‍मों को भुलाने, प्‍यार की तलाश और अपने सबसे बड़े डर से लड़ने के लिये मेलबर्न से पर्थ की एक रोड़ ट्रिप पर जाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न से पोस्‍ट-ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, मस्‍तीखोर बिंदिया अपने दो सबसे भरोसेमंद दोस्‍तों को मेलबर्न से पर्थ तक के एक जोशीले और मौज-मस्‍ती भरे ट्रिप पर साथ आने के लिये मनाती है। यह ट्रिप बिंदिया के लिये सब-कुछ है, क्‍योंकि भारत आकर जिम्‍मेदारियां को बोझ लेने से पहले खुली हवा में जिन्‍दगी का मजा लेने का उसका यह आखिरी मौका हो सकता है।

पहले निभाये गये किरदारों से क्‍या अलग क्‍या है और सच्‍ची दोस्‍ती के दिनों को याद करते हुए, आशा नेगी कहती हैं, ‘’ख्‍वाबों के परिंदे’ जिन्‍दगी और उम्‍मीद का सफर है, लेकिन कभी-कभी आपको अपनी नई तलाश करने के लिये करीबी दोस्‍तों की जरूरत होती है। इस शो में मेरा किरदार बेहद मस्‍तीखोर बिंदिया का है, जो हर दिन जिन्‍दगी को गले लगाने में यकीन रखती है। जब आप इस तरह के किसी शो के लिये शूटिंग करते हैं, आपको अपने बेस्‍ट फ्रेंड्स के साथ बिताये गये पल याद आ जाते हैं और ऐसा मेरे साथ भी हुआ। हालांकि, बीतते समय के साथ मृणाल, मानसी, तुषार और मेरी अच्‍छी दोस्‍ती हो गयी। हम सिर्फ को-स्‍टार्स नहीं रह गये, बल्कि अच्‍छे दोस्‍त बन गये, जिसकी वजह से यह सफर और रोमांचक हो गया। इस शो की शूटिंग ने मुझे सच्‍ची दोस्‍ती की अहमियत समझायी और मैंने जाना कि दोस्‍तों के साथ रहना क्‍यों जरूरी है। उनके सामने आपको सच ही बोलना पड़ता है और वे आपको राज और डर का सामना करने और फिर उनसे बाहर निकलने में भी मदद करते हैं।

उन्‍होंने आगे कहा, ‘’इस बेहतरीन और यंग क्रू के साथ पूरे ऑस्‍ट्रेलिया में शूटिंग के 60 दिन कभी न भूलने वाला अनुभव है।  मैं पलक झपकते ही उन पलों में वापस जा सकती हूं। मुझे बिंदिया का किरदार निभाने में बहुत मजा आया, हालांकि वह चुनौती से भरा था, लेकिन टेलीविजन से वेब में मेरी भूमिकाओं का अंतर ताजगी देने वाला रहा। मेरे रॉकस्‍टार डायरेक्‍टर तपस्‍वी मेहता और वूट को बहुत-बहुत धन्‍यवाद, जिन्‍होंने मुझे यह मौका दिया, जिसने न केवल बतौर कलाकार, बल्कि एक व्‍यक्तिगत तौर पर भी मुझे चुनौती मिली। वूट के बिलकुल नये ओरिजिनल- ‘ख्‍वाबों के परिंदे’ में बिंदिया के साथ ऑस्‍ट्रेलिया के सुंदर नजरों से गुजरते हुए दोस्‍ती, उम्‍मीद और जिन्‍दगी के अद्भुत सफर पर जाने के लिये तैयार हो जाइये।

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