एल्सटॉम ने दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड मेट्रो के लिए ट्रांज़िट ट्रेंस का निर्माण शुरू किया

 

◆ 210 रीज़नल कम्युटर एवं ट्रांज़िट ट्रेन कारों का डिज़ाईनए निर्माण एल्सटॉम की सवली  (गुजरात) सुविधा में  होगा

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 17 जुलाई 2021, नई दिल्ली। एल्सटॉम ने आरआरटीएस फेज़ 1 के दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए रीज़नल कम्युटर एवं ट्रांज़िट ट्रेनों का निर्माण शुरू कर दिया। मई, 2020 में कंपनी को 210 रीज़नल कम्युटर एवं ट्रांज़िट ट्रेन कारों के डिज़ाईन, निर्माण व आपूर्ति तथा 15 सालों के लिए विस्तृत मेंटेनेंस सर्विस के लिए अनुबंध प्रदान किया गया था। रीज़नल कम्युटर एवं ट्रांज़िट ट्रेनों का निर्माण शुरू कर दिया। मई, 2020 में कंपनी को 210 रीज़नल कम्युटर एवं ट्रांज़िट ट्रेन कारों के डिज़ाईन, निर्माण व आपूर्ति तथा 15 सालों के लिए विस्तृत मेंटेनेंस सर्विस के लिए अनुबंध प्रदान किया गया था।

अनुबंध के मुताबिक, एल्सटॉम 30 रीज़नल कम्युटर ट्रेनसेट्स की आपूर्ति करेगा, जिनमें से प्रत्येक छः कारों की होगी और 10 मास ट्रांज़िट कारों में से प्रत्येक तीन कारों की होगी। देश के “आत्मनिर्भर भारत” के उद्देश्य एवं मेक-इन-इंडिया के दिशानिर्देशों के अनुरूप यह आरआरटीएस ट्रेनें 100 फीसदी देश में सवली (गुजरात) में एल्सटॉम की सुविधा में बनाई जाएंगी, जिनमें 80 फीसदी से ज्यादा लोकलाईज़ेशन है। यह सुविधा बोगी, कार बॉडी बनाएगी और ट्रेन की टेस्टिंग करेगी। प्रोपल्ज़न सिस्टम एवं इलेक्ट्रिकल्स मानेजा (गुजरात) में कंपनी की फैक्ट्री में बनाए जा रहे हैं।

एलेन स्पोह्रए मैनेजिंग डायरेक्टर, एल्सटॉम इंडिया ने कहा, “यह प्रोजेक्ट भारत के रीज़नल रेल सेगमेंट के लिए गेम-चेंजर है, जो लाखों लोगों को लाभान्वित कर सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देगा। हमें देश की पहली सेमी हाई-स्पीड कम्युटर सेवा के लिए इन प्रौद्योगिकी की दृष्टि से उन्नत ट्रेनों का स्थानीय स्तर पर निर्माण शुरू करने की खुशी है। एल्सटॉम में हम सतत उत्पाद व समाधानों के विकास पर केंद्रित रहते हैं, जो आने वाले समय में दशकों तक शानदार काम करते रहें। भारत के पहले रीज़नल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (आरआरटीएस) के लिए ट्रेन का डिज़ाइन सितंबर, 2020 में प्रस्तुत किया गया। दिल्ली के प्रतिष्ठित स्मारक, लोटस टैंपल से प्रेरित, नई ट्रेनों का नया, आधुनिक एवं उन्नत लुक भारत की संपन्न विरासत एवं सततता के अद्वितीय संगम से मिलता-जुलता है।

इन एनर्जी एफिशियंट सेमी हाई-स्पीड एयरोडाइनामिक ट्रेनों में लेटेस्ट तकनीकी फीचर्स होंगे, जो दिव्यांगों सहित सभी यात्रियों, कम्युटर्स को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे। इन ट्रेनों का निर्माण भारत में यात्रियों के लिए रीज़नल कम्युट के भविष्य में परिवर्तन लाने के लिए किया गया है। आरआरटीएस कॉरिडोर भारत में सबसे तेज गति की ट्रेनों का संचालन करेगा जो 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिज़ाइन की जाएंगी। सही इर्गोनोमिक्स, सुरक्षा, कम लाईफ साइकल लागत एवं उच्च रिसाइक्लेबिलिटी द्वारा ये ट्रेनें सततता का आकर्षक विकल्प होंगी, जो जन परिवहन को बढ़ावा देकर ट्रैफिक के जाम से राहत दिलाएंगी और हवा के प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। एल्सटॉम के काम की सीमा में इस 82.15 किलोमीटर के कॉरिडोर के लिए सिग्नलिंग एवं ट्रेन कंट्रोल, सुपरविज़न, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर एवं टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम का डिज़ाईन, आपूर्ति, टेस्टिंग एवं कमीशनिंग करना शामिल है। यह लाईन भारत की पहली लाईन है, जिसने यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) हाईब्रिड लेवल 2 सिग्नलिंग सिस्टम अपनाया है, जो यूरोपियन रेल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ईआरटीएमएस) का मुख्य सिग्नलिंग एवं ट्रेन कंट्रोल कंपोनेंट है।

Comments

Popular posts from this blog

सचखंड नानक धाम ने किसान समर्थन के लिए सिंघू बॉर्डर पर अनशन पर बैठे

अक्षय तृतीया पर रिलायंस ज्वेल्स अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि की कामना करता

उप प्रधानाचार्य प्रशासनिक अनियमितताएं और भ्र्ष्टाचार में लिप्त, मुख्य अधिकारी नहीं ले रहे संज्ञान