एप्सिलॉन कार्बन ने कर्नाटक में भारत का पहला एकीकृत कार्बन ब्लैक कॉम्प्लेक्स कमीशन किया

       ◆ यूरोप में मार्केटिंग करने के लिए एप्सिलॉन कार्बन के उत्पाद रीच के साथ पंजीकृत हैं

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 8 जुलाई 2021, नई दिल्ली। भारत की प्रमुख कोलतार डेरिवेटिव्स कंपनी एप्सिलॉन कार्बन प्राइवेट लिमिटेड (ईसीपीएल) ने कर्नाटक के बेल्लारी में भारत का पहला एकीकृत कार्बन ब्लैक कॉम्प्लेक्स स्थापित किया है। प्रति वर्ष 115,000 टन (टीपीए) की उत्पादन क्षमता वाली इस कार्बन ब्लैक इकाई ने अपना संचालन सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है और लगभग अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही है। इस एकीकृत इकाई में टायर, नॉन-टायर रबर और प्लास्टिक मास्टर बैच के विश्व स्तरीय भागीदारों के लिए एएसटीएम कार्बन ब्लैक के ट्रेड और कार्कस ग्रेड का उत्पादन किया जाता है।

कच्चा माल प्राप्त करने के लिए पूर्णतः बैकवर्ड इंटीग्रेशन से काम लेने के चलते इस नव-नियुक्त परिसर को स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी बढ़त मिली हुई है। कोलतार डिस्टिलेशन की प्रक्रिया से उत्पन्न एन्थ्रासीन तेल का इस्तेमाल कार्बन ब्लैक इकाई में एक स्वच्छ फीडस्टॉक के रूप में किया जाएगा। कच्चे माल का भरोसा एवं फीडस्टॉक की बरकरार श्रेष्ठता ईसीपीएल को स्थिर गुणवत्ता वाले कार्बन ब्लैक का उत्पादन करने में मदद करती है, जो टायर और मैकेनिकल रबर गुड्स के अनुप्रयोगों हेतु तैयार किया जाता है।

यह एकीकृत कार्बन ब्लैक कॉम्प्लेक्स भारत में अपनी तरह की ऐसी पहली निर्माण इकाई है, जो स्टील प्लांट से निकली अपशिष्ट कोक ओवन गैस का इस्तेमाल ईंधन के रूप में करती है और कार्बन ब्लैक इकाई से निकली टेल-गैस को प्री-हीटिंग वाले संचालन के लिए स्टील प्लांट में वापस इस्तेमाल किया जाता है। उच्च सल्फर फीडस्टॉक (3% सल्फर) का इस्तेमाल करने वाले अन्य प्लांट की तुलना में यह इकाई नियंत्रित निम्न-सल्फर फीडस्टॉक (0.3-0.5% सल्फर) का ही इस्तेमाल करती है। इन सभी मापदंडों ने इस कार्बन ब्लैक प्लांट को कम SOx/NOx और CO2 उत्सर्जन के मामले में एक नया बेंचमार्क स्थापित करने में सक्षम बनाया है, जिससे यह प्लांट पर्यावरण के बेहद अनुकूल और अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ बन गया है। फेज 2 वाले प्लान के तहत एप्सिलॉन 350 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश करके अपनी क्षमता में 65,000 टीपीए का उत्पादन और जोड़ेगी। इसके बाद कुल निवेश भी लगभग 900 करोड़ रुपए का हो जाएगा। एप्सिलॉन कार्बन ब्लैक उत्पादन करने की अपनी क्षमता को कुल 300,000 टीपीए तक बढ़ाने की योजना बना रही है। पूरी क्षमता के साथ उत्पादन करने पर यह भारत का सबसे बड़ा सिंगल लोकेशन कार्बन ब्लैक प्लांट बन जाएगा, जो कंपनी के ग्राहकों को किफायती लागत में स्थिर गुणवत्ता वाले उत्पाद पेश करेगा।

कार्बन ब्लैक व्यवसाय की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए एप्सिलॉन कार्बन के प्रबंध निदेशक श्री विक्रम हांडा ने कहा, “वैश्विक स्तर पर इसके मार्केट लगातार बढ़ रहे हैं और हमको अगले कुछ वर्षों में टायर, मैकेनिकल रबर गुड्स तथा औद्योगिक प्लास्टिक निर्माण के क्षेत्र में ढेर सारे अवसर नजर आ रहे हैं। आज की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में ग्राहक लोकलाइजेशन की तलाश कर रहे हैं और एप्सिलॉन कार्बन अपने आला दर्जे के गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के दम पर इस बढ़ती मांग को पूरा करने में समर्थ है। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि एप्सिलॉन कार्बन अब रीच के अंतर्गत एक पंजीकृत संस्था है, जो हमारे उत्पादों को सबसे सुरक्षित उत्पादों के रूप में प्रमाणित करता है। इस प्रमाणन के चलते हमारे यूरोपीय भागीदार हमारे गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को हासिल कर पा रहे हैं। हमारे ग्राहकों को उत्पाद की स्थिर गुणवत्ता, विभिन्न अनुप्रयोगों में शानदार प्रदर्शन और अन्य लाभ दिलाना सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने विभिन्न गुणवत्ता प्रमाणन हेतु मान्यता ले रखी है। कंपनी वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है और उसने तीस से ज्यादा भागीदार नियुक्त किए हैं, जो कंपनी के ग्राहकों को समय पर डिलीवरी देने के लिए स्थानीय स्तर की सेवा, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने के मामले में अपना भरपूर सहयोग व समर्थन देंगे।


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