एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पीटल्स ने सफलतापूर्वक एसेंडिंग एओर्टिक एन्युरिज्म के मरीज का किया इलाज

शब्दवाणी समाचार, शुक्रवार 20 अगस्त 2021, नई दिल्ली। बहुसुविज्ञता वाली इकाई, एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पीटल्स, द्वारका ने हाल में 42 साल की एक महिला मरीज की सफल सर्जरी की है। मरीज को सांस लेने में पिछले पांच महीने से असुविधा थी पर इधर 5-7 दिनों से उसकी समस्या अचानक बढ़ गई थी। उसने सीने में बाईं ओर गंभीर दर्द की भी शिकायत की थी। यह दर्द पीछे तक जाता था और इससे उसका चलना फिरना या लेटना भी मुश्किल हो गया था।

उसे एन्युरिज्म ऑफ एओर्टा होने का पता चला। इसमें हृदय से खून ले जाने वाली बड़ी धमनी का एक हिस्सा गुब्बारे जैसा हो जाता है। यह कट या फट सकता है और खतरनाक साबित हो सकता है। इस स्थिति में धमनी चौड़ी हो जाती है। सीटी एओर्टोग्राफी से पता चला कि एक बड़ा, 11 x 10 सेमी, घटता हुआ एन्युरिज्म था जो फेफड़ा, हृदय और आस-पास के उत्तकों (टिश्यू) को दबा रहा था। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है क्योंकि यह पूरे शरीर में खून पहुंचाने वाली धमनी को बड़ा कर देती है। इस मामले में गुब्बारे जैसा हिस्सा फट गया था और रिसाव से निकला खून आस-पास  फैल गया था। उपचार कर रहे कार्डियैक सर्जन इस मामले की जटिलता को नहीं संभाल पाए और मरीज को दिल्ली के बड़े केंद्र में भेजा गया। यहां डॉ. युगल किशोर मिश्र, क्लीनिकल सेवाओं के प्रमुख, कार्डियैक साइंसेज के हेड और चीफ कार्डियोवस्कुलर सर्जन, एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पीटल्स द्वारका और उनकी टीम ने सावधानी पूर्वक तैयार की गई योजना के अनुसार यह मुश्किल सर्जरी पूरी की।         

डॉ. मिश्र और उनकी टीम ने एक जटिल प्रक्रिया पूरी की। इसे बेनटल्स कहा जाता है जिसमें पूरे एओर्टा और उसके वाल्व को पूरी तरह बदला जाता है। इस प्रक्रिया में 4-5% मृत्युदर का जोखिम है। इस मामले में, खराबी कई जगहों पर थी और यह हृदय से चिपका हुआ था और इसके आस-पास के अंगों पर भी खून के सख्त हो    चुके थक्के और परतें थीं। ऐसा सांस की नली और फेफड़े में था और ये सब दबे हुए थे। इस कारण मरीज को आस-पास की दूसरी नसों के जरिए हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया। इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डॉ. युगल किशोर मिश्र, क्लीनिकल सेवाओं के प्रमुख, कार्डियैक साइंसेज के हेड और चीफ कार्डियोवस्कुलर सर्जन ने कहा, “इस जटिल सर्जरी को पूर्ण करने में हमें करीब 10 घंटे लगे। सर्जरी के बाद की रिकवरी संतोषजनक थी और मरीज को 72 घंटे बाद आईसीयू में स्थानांतरित किया गया।  सर्जरी के छठे दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह खुशी-खुशी घर गई। उस दिन वह खुद चल सकती थी।

डॉ. युगल किशोर मिश्र एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पीटल्स, द्वारका में चिकित्सीय सेवाओं के प्रमुख हैं और कार्डियोवस्कुलर सर्जरी में सुविज्ञ हैं। आपने कई सफल हार्ट सर्जरी की है और मिनिमली इनवैसिव हार्ट सर्जरी, रोबोटिक कार्डियैक सर्जरी, वाल्व रिपेयर या रिप्लेसमेंट तथा एसेंडिंग एओर्टिक एन्युमरिज्म तथा अन्य गड़बड़ियों की सर्जर में सुविज्ञता रखते हैं।  

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