भारत में सोशल मीडिया द्वारा परिवर्तन लाने के लिए व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ शक्तिशाली अस्त्र : निक क्लेग

 

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 3 दिसम्बर 2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली। भारत में अपनी यात्रा के दौरान मेटा के प्रेसिडेंट, वैश्विक मामले, निक क्लेग ने भारत में व्हाट्सऐप कम्युनिटी बिल्डर्स के लीडर्स के साथ एक्सक्लुसिव सामुदायिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में इस विषय में वार्ता की गई कि हाल ही में लॉन्च किया गया फीचर, ‘कम्युनिटीज़ ऑन व्हाट्सऐप’ किस प्रकार संगठनों को देश में व्यापक सामाजिक परिवर्तन लाने के साझा लक्ष्य में बेहतर संपर्क स्थापित करने और नियोजित रखने में मदद कर रहा है। इससे पूर्व इस माह मार्क जुकरबर्ग ने व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ को पूरे विश्व में शुरू करने की घोषणा की थी। यह व्हाट्सऐप पर लोगों और आपस में जुड़े हुए समूहों द्वारा कनेक्ट होने के तरीके में एक बड़ा अपडेट था, और इससे समूह के बीच होने वाली बातचीत को एक ही स्थान पर नियोजित करना, प्रभावशाली तरह से सहयोग करना, जानकारी साझा करना, और चीजों को ज्यादा प्रभावशाली तरीके से करना आसान हो गया। कम्युनिटीज़ के साथ व्हाट्सऐप का उद्देश्य ऐसी गोपनीयता और सुरक्षा के साथ संगठनों को संचार करने में मदद करना है, जो और कहीं न पाई जाती हों। इस राउंड टेबल वार्ता में पाँच भारतीय कम्युनिटीज़ के प्रतिनिधि शामिल थे, जो हैल्थकेयर, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता, शिक्षा, और महिला सशक्तीकरण का प्रतिनिधित्व करते हों। उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप पर कम्युनिटीज़ किस प्रकार उनके समूहों के बीच बातचीत को आसान, कुशल और प्रभावशाली बनाने के लिए एक बेहतरीन समाधान है। इसमें जमीनी स्तर पर जाकर स्वास्थ्य व सामाजिक प्रभाव उत्पन्न कर परिवर्तन लाने की शक्ति है।

निक क्लेग, प्रेसिडेंट, ग्लोबल अफेयर्स, मेटा ने कहा व्हाट्सऐप भारत में जीवन जीने का एक तरीका है, इसके लाखों-करोड़ों यूज़र्स हैं। लाखों लोगों के लिए यह पहला डिजिटल गेटवे है। पिछले सालों में हमने ऐसे संगठन व स्थानीय सामुदायिक समूह देखे हैं, जो खुद को नियोजित करने और उपयोगी तरीके से कनेक्ट होने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप्स का इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ के साथ हमारा उद्देश्य इन संवादों को आसान, ज्यादा कुशल व प्रभावशाली बनाना और लोगों को नियोजित व कनेक्टेड रखने में मदद करना है। व्हाट्सऐप के सरल, भरोसेमंद और सुरक्षित प्लेटफॉर्म के साथ समुदाय अपने ग्रुप में होने वाली बातचीत को एक ही जगह पर स्टोर कर सकते हैं, जिससे उन्हें गोपनीयता और सुरक्षा से समझौता किए बिना एक ही उद्देश्य की ओर काम करते हुए चीजें पूरी करना आसान हो जाएगा। इसलिए यह व्यापक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए एक शक्तिशाली अस्त्र है। भारत में व्हाट्सऐप दस संगठनों के साथ व्हाट्सऐप कम्युनिटी बिल्डर्स प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है, जो विश्व में केवल 50 कम्युनिटीज़ को प्रदान किया गया है। इन कम्युनिटीज़ को इस फीचर की अरली एक्सेस दी गई है, और ये व्हाट्सऐप को कम्युनिटीज़ बनाने, उनकी जरूरतें पूरी करने, रियल टाईम फीडबैक प्रदान करने आदि में मदद कर रहे हैं। आने वाले महीनों में इसके और भी फीचर शामिल किए जाते रहेंगे। कम्युनिटी लीडर्स ने अपने-अपने संगठनों के लिए व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ के प्रभाव व उपयोगिता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

अज़ीज़ गुप्ता, फाउंडर, रॉकेट लर्निंग ने कहा ग्रामीण भारत में व्हाट्सऐप एकमात्र ऐप है, जो युवा लर्नर्स के हमारे समुदाय में 90 प्रतिशत से ज्यादा पैरेंट्स के फोन पर मौजूद है, और इसलिए उनके लर्निंग के सफर में मदद करने के लिए यह हमारे लिए एक स्वाभाविक विकल्प था। कम्युनिटीज़ हमारे संगठन के लिए गेम चेंजर है, हम भौगोलिक और विषय के आधार पर लर्नर और टीचर्स को नियोजित कर सकते हैं, उनके लर्निंग के स्तरों को पहचान सकते हैं, और उनकी लर्निंग की जरूरतों के अनुरूप कंटेंट को कस्टमाईज़ कर सकते हैं। हम कम्युनिटीज़ अनाउंसमेंट फीचर द्वारा अपने सदस्यों, पैरेंट्स और टीचर्स तक पहुँच सकते हैं, और बंटे हुए समूह में समुदाय, एकता, एवं एक उद्देश्य की भावना के निर्माण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। कम्युनिटीज़ द्वारा माता-पिता और अभिभावक अपने बच्चों की अध्ययन सामग्री को विभिन्न विषयों और ग्रेड्स के आधार पर ज्यादा व्यवस्थित रख सकते हैं, और रॉकेट लर्निंग को विभिन्न क्लास एक ही जगह पर रखने में समर्थ बना सकते हैं, जिससे एक औपचारिक स्कूल का वातावरण स्थापित करने में मदद मिलती है, जहाँ सभी ग्रेड एक बड़े सामुदायिक बैनर के तहत होते हैं। हम ऐसे भविष्य का सपना देखते हैं जिसमें भारत के सरकारी स्कूलों में 1 मिलियन टीचर और 30 मिलियन अभिभावक व बच्चे नियमित एवं सक्रिय लर्नर हों। अभी तक व्हाट्सऐप में कम्युनिटीज़ ने हमें अपने दैनिक कार्यों को व्यवस्थित करने में मदद की है, और हम आशान्वित हैं कि यह हमें सहयोग देता रहेगा, ताकि हम अपने उद्देश्य को पूरा करने की ओर बढ़ सकें।

राघवेंद्र प्रसाद, फाउंडर, प्रोजेक्ट स्टेपवन ने कहा संगठन के रूप में हम संचार व सामंजस्य के लिए मुख्यतः व्हाट्सऐप पर आश्रित हैं और 30,000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ हमारे पास सैकड़ों व्हाट्सऐप ग्रुप हैं। ‘कम्युनिटीज़ ऑन व्हाट्सऐप’ हमारे लिए एक वरदान है। इसने हमें सैकड़ों समूहों का स्वामित्व लेने और उन्हें ज्यादा प्रभावशाली तरीके से नियोजित करने में समर्थ बनाया है। हमारे सामने एक बड़ी आंतरिक चुनौती थी कि जब भी कोई नई प्रगति होती, तो विभिन्न समूहों में ढेर सारे मैसेजेस इकट्ठे हो जाते थे। अब कम्युनिटीज़ के साथ एक अपने सभी कार्यकर्ताओं के लिए अनाउंसमेंट समूह में एक संदेश प्रकाशित कर सकते हैं, और सही प्रगति के लिए सही लोगों को उत्तर देने के लिए लगा सकते हैं। इससे काफी समय बचता है और हमारा काम बहुत तेज हो जाता है। हम ऐसे समाजों का निर्माण करना चाहते हैं, जो स्वास्थ्य के आपातकाल की स्थिति में ज्यादा मजबूत हों। हमारा मानना है कि स्टेपवन ने उस टेक्नॉलॉजी का प्रदर्शन किया है, और लोगों को साथ लेकर यह हमारे समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकता है।

अरुण गुप्ता, फाउंडर पिंकीशी फाउंडेशन ने कहा हमारे कार्यकर्ता शुरू से ही एक दूसरे से संपर्क करने और तालमेल बनाने के लिए विभिन्न ग्रुप चैट्स के साथ व्हाट्सऐप का उपयोग कर रहे हैं। ‘कम्युनिटीज़ ऑन व्हाट्सऐप’ से हमें अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने और नियोजित करने तथा अपने पिंकीशी समुदाय को बेहतर बनाने का साधन मिल गया है। अपने सभी व्हाट्सऐप ग्रुप्स को एक समुदाय में लाने से उद्देश्य, साझा मूल्यों और संचालन को आसान बनाने की ओर गहरी लगन विकसित हुई है। माहवारी और इस दौरान स्वास्थ्य के बारे में बातचीत को अभी भी कलंकित माना जाता है, और ज्यादातर महिलाएं इस बारे में तब तक खुलकर बात नहीं करतीं, जब तक उन्हें पूरी गोपनीयता की गारंटी न मिल जाए। हमारे लिए इन वार्ताओं को गोपनीय और सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर रखना बहुत महत्वपूर्ण है। व्हाट्सऐप उस गोपनीय और सुरक्षित स्पेस की गारंटी देता है। हम 100,000 माहवारी एजुकेटर्स का समुदाय बनाना चाहते हैं, जो लाखों युवा महिलाओं को हर साल माहवारी के दौरान स्वास्थ्य व सेहत के बारे में प्रशिक्षित करेंगे। व्हाट्सऐप पर कम्युनिटीज़ हमारी पहुँच का विस्तार करने के लिए एक टूल है। हम इन टूल्स एवं फीचर्स द्वारा वार्ताएं शुरू करेंगे, एडवोकेसी स्थापित करेंगे, शिक्षा का प्रसार करेंगे और पीरियड पॉवर्टी को अगले दशक में पूरी तरह से खत्म कर देंगे।

शुभा राम, डायरेक्टर, गुड़गांवमॉम्स ने कहा व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ ने हमें अपने सदस्यों तक पहुँचने में मदद की, जो विभिन्न कारणों से सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। हमने खुद को विभिन्न टास्क समूहों में संगठित किया और तालमेल एवं संचार को बेहतर बनाया। संचार ज्यादा नियोजित और प्रभावशाली बना। भारत जैसा देश, जहाँ व्हाट्सऐप की पहुँच गहरी है, यहाँ पर कम्युनिटी उन लोगों तक पहुँचने के लिए काफी मददगार होगा, जो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय नहीं हैं। व्हाट्सऐप कम्युनिटीज़ के बारे में ज्यादा जानकारी पाने के लिए आप हमारी वेबसाईट पर कम्युनिटी लर्निंग सेंटर में जा सकते हैं। यहाँ पर व्हाट्सऐप पर कम्युनिटी शुरू करने के तरीके, एडमिंस को एक्सेस एवं संसाधन दिए जाने, सुरक्षित अनुभव स्थापित करने, एडवांस्ड कम्युनिटी मैनेजमेंट की उपयोगी जानकारी और ट्यूटोरियल दिए गए हैं।

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