गर्भाशय की टीबी तो नहीं बांझपन की वजह

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 21 दिसम्बर  2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली। आमतौर पर लोगों को लगता है कि टीबी सिर्फ फेफड़ों की बीमारी होती है, लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि टीबी एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़ों से लेकर दिमाग और गर्भाशय आदि में आसानी से हो सकती है। महिलाओं में होने वाली गर्भाशय टीबी महिला बांझपन का कारण बनती है। एक रिसर्च के मुताबिक, 2018 में 18% निसंतान महिलाएं गर्भाशय टीबी से जुझ रही थी। जिसके कारण उन महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी आ रही थी। ऐसे में जरूरी है कि महिलाओं को गर्भाशय की टीबी के बारे में पूरी जानकारी हो।

गर्भाशय में टीबी क्या है?

टीबी का सबसे मुख्य कारण संक्रमण है। और यह संक्रमण माइको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया है। गर्भाशय टीबी की बीमारी गर्भाशय के किसी भी हिस्से में यानी अंडशय, गर्भाशय की नली, गर्भाशय का मुंह, वजाइना या वजाइना के आसपास के लिम्प नोड्स को प्रभावित करता है। पुरुषों में यह प्रोस्टेट ग्रंथी और टेस्टीज को प्रभावित कर सकता है। 

बीमारी को नजरअंदाज करना है जानलेवा

एक स्टडी में पाया की सिर्फ मुंबई में ही 10 हजार में से 30 महिलाएं गर्भाशय टीबी से जुझ रही है। और ऐसी महिलाएं  टीबी के कारण गर्भधारण करने मे असफल रहती है। आशा आयुर्वेदा स्थिति डॉकटर चंचल शर्मा बताती है जब एक महिला टीबी की समस्या से जुझती है तो टीबी का बैक्टीरिया गर्भाशय की दीवार या गर्भाशय नलियों को खराब कर देता है। इसका इलाज न करवाने पर यह शरीर के लिए संक्रमण जानलेवा होता है।

आयुर्वेद से संभव हुआ मां बनना

डॉकटर चंचल शर्मा बताती है कि टीबी के इलाज के बाद स्कारिंग (निशान विकसित) होने लगते है, अगर आपके गर्भाशय नलियों में टीबी था तो ये ट्यूब ब्लॉक हो जाती है। ऐसी समस्या होने के बाद लोगों के दिमाग में सबसे पहले आईवीएफ आता है। लेकिन आईवीएफ के ज्यादातर मामलों में लाखों खर्च होने के बाद भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है। वहीं आयुर्वेदिक इलाज की बात करें तो बिना सर्जरी के गर्भाशय नली खुल जाती है। आयुर्वेद इलाज आईवीएफ के महंगें इलाज से कई गुना ज्यादा सस्ता होता है। और इस इलाज की सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सफलता दर भी आईवीएफ के मुकाबले ज्यादा है।

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