सीईएसएल (CESL) ने 4,675 ई-बसों के लिए किया दूसरी निविदा जारी

• टेंडर एक लीज़ अनुबंध पर आधारित है, जो STU को स्वयं के बस चालकों को तैनात करने की अनुमति देता है.

• इस टेंडर में तीन राज्यों - दिल्ली, केरल और तेलंगाना को शामिल किया गया है, जिन्होंने क्रमशः 2400, 775 और 1500 ई-बसों की मांग की हैं.

• ये देश का तीसरा ई-बस टेंडर है, CESL ने 15 महीने से भी कम के अंतराल में 16,590 ई-बसों की संचयी निविदा परिणियोजित की है जो CESL को दिए गए लक्ष्य के 33% के बराबर है.

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 7 जनवरी 2023, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली। नई दिल्ली, 5 जनवरी, 2023:  एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) ने आज नेशनल इलेक्ट्रिक बस प्रोग्राम के तहत इलेक्ट्रिक बसों के दूसरे टेंडर की घोषणा की। इसको लेकर सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद की जा रही है। इससे पहले 5,450 ई-बस के लिए किए गए ग्रैंड चैलेंज टेंडर और 6465 इलेक्ट्रिक बसों के लिए हाल ही में संपन्न टेंडर के बाद इलेक्ट्रिक बसों के लिए यह तीसरा टेंडर है। दिल्ली, केरल और तेलंगाना के राज्य पथ परिवहन निगम “ड्राई लीज“ के आधार पर 4675 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करेंगे। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का मकसद ईंधन आयात, कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण में कटौती लाना है। ड्राई लीज में ऑपरेटर बिना ड्राइवर या कंडक्टर के राज्य परिवहन निगमों (एसटीसी) को बसें उपलब्ध कराता है, जिन्हें एसटीसी द्वारा तैनात किया जाता है। ऐसी जरूरत वाले एसटीसी में रोजगार बनाए रखने के लिए यह ड्राई लीज मॉडल तैयार किया गया है। 

टेंडर में तीन प्रकार की ई-बसें शामिल हैं: 9-मीटर स्टैंडर्ड फ्लोर एसी, और 12-मीटर लो फ्लोर और स्टैंडर्ड फ्लोर नॉन-एसी और एसी इलेक्ट्रिक बसें। इन बसों का स्वामित्व और रख-रखाव 10 एवम 12 साल की अवधि के लिए सेवा प्रदाताओं द्वारा किया जाएगा, जबकि इनका संचालन एसटीसी द्वारा किया जा रहा है। सेवा प्रदाताओं को प्रति बस मासिक शुल्क का भुगतान किया जाएगा। 2022 ग्रैंड चैलेंज प्रक्रिया में निर्मित और मानकीकृत के रूप में डिपो पर चार्जिंग का बुनियादी ढांचा दोनों पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से सीमांकित भूमिकाओं और जिम्मेदारियों से प्रदान किया जाना है। इस टेंडर  का अनुमानित मूल्य 5,000 करोड़ रुपये है और इसमें मुख्य रूप से बस की लागत शामिल है। बोलीदाताओं और एसटीसी को समान रूप से महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने और उनके काम करने हेतु एक अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करवाने की अनिवार्यता भी शामिल की गई है। इस निविदा में रखी गई 4675 बसों की तैनाती से कुल जीएचजी उत्सर्जन में 34 लाख/वर्ष की कमी अनुमानित की गई है,  जबकि ईंधन की बचत 15 लाख किलोलीटर/वर्ष और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी भी समाविष्ट की गई है।

टेंडर के जारी होने पर सीईएसएल की सीईओ एवम प्रबंध निदेशक श्रीमती  महुआ आचार्य ने कहा, “मैं नेशनल इलेक्ट्रिक बस प्रोग्राम के तहत एक और टेंडर लॉन्च करने के लिए रोमांचित हूं। यह राज्यों के सक्षम नेतृत्व द्वारा परिवहन को पूर्णतः इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में परिवर्तित करने की पहल है। इस टेंडर को दिल्ली, तेलंगाना और केरला राज्यों के आला कमान अफसरों के परामर्श से भी विशिष्ट रूप से डिजाइन किया गया था, जिनके सहयोग के लिए मैं उनकी आभारी हूं। मैं WRI- India का भी सहर्ष धन्यवाद करती हूं जिनके सहयोग से NEBP इस मुकाम तक पहुंचा है। भारत का राष्ट्रीय ई-बस कार्यक्रम एक अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी के रूप में उजागर हुआ है। घरेलू स्तर पर हमारे लिए यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन को कम करने, ईंधन के खर्च में कटौती करने और वायु प्रदूषण को घटाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। 50,000 ई- बसों की इस योजना का आर्थिक मूल्य बहुत विस्तारित है, और मैं इस मूल्य का एहसास वाहन उद्योग में देखने के लिए उत्सुक हूं। CESL का उद्देश्य भारत में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत, आधुनिक और हरित बनाने की दृष्टि से बढ़ावा देना है और राष्ट्रीय ई-बस कार्यक्रम (NEBP) इस दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम है। आज तक, सीईएसएल ने सात राज्यों - दिल्ली, तेलंगाना, हरियाणा, गुजरात (सूरत), अरुणाचल प्रदेश, केरल और कर्नाटक (उत्तर-पश्चिम) में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती के लिए एनईबीपी के चरण 1 के तहत दो निविदाएं जारी की हैं।

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