चिटफंड संशोधन विधेयक पास होने पर चिटफंड उद्योग की ब्रांड निर्माण के साथ छवि सुधरेगी : कमल भम्भानी

शब्दवाणी समाचार मंगलवार 06 अगस्त 2019 नई दिल्ली। स्थायी समिति द्वारा सुझाए गए परिवर्तनों को शामिल करने के लिए चिट फंड अधिनियम 1982 में संशोधन के लिए संसद में एक विधेयक पेश किया किया है। जिस पर आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ चिट फंड्स ने अपनी खुशी मीडिया को वताई और कहा की है वर्तमान समय के अनुरूप बनाने के लिए सरकार अब कारोबार को आसान करने की दिशा में काम कर रही है। ये संशोधन एक ओर व्यापार और उद्योग क्षेत्र को लाभान्वित करेंगे वहीं चिट फंड कंपनियों को उनकी छवि बनाने और ब्रांड निर्माण करने में मदद करेगी। आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ चिट फंड्स के प्रधान टी एस शिवरामकृष्णन ने  भारत सरकार और विशेष रूप से माननीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा सरकार के इस कदम से स्वरोजगार और छोटे कारोबारियों सहित निम्न और मध्यम आय वर्ग की वित्तीय जरूरतों की सेवा में चिट फंड की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।



भारत सरकार द्वारा गठित प्रमुख सलाहकार समूह की सिफारिशों को प्रभावी करने के लिए परिवर्तन की मांग की गई है और एक्ट में कुछ पुरानी कमियों को भी दूर करने की जरूरत है। चिट फंड कंपनियों को थका देने वाली कागजी कार्रवाई और साथ ही ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए किए गए कुछ बदलावों के उद्देश्य इसमें निहित हैं। हम मीडिया की रिपोर्टों से समझते हैं कि बिल में स्थायी समिति की अधिकतम सिफारिशों  को शामिल किया गया है।
एक महत्वपूर्ण संशोधन चिट फंड कंपनी को "ROSCA Institution" (Rotating Savings and Credit Association) के नाम से उल्लेखित करने के बारे में है। यह हमारे कानूनी और सुरक्षित व्यवसाय को गैरकानूनी और अनियंत्रित व्यवसायों जैसे पोंजी योजनाओं से अलग करने में मदद करेगा। व्यक्तियों और भागीदारी फर्मों द्वारा आयोजित किए जाने वाले कुल चिट व्यवसाय के लिए कुल सीमा की वृद्धि और 5% से 7% तक कमीशन की वृद्धि अन्य स्वागत योग्य कदम हैं।
आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ चिट फंड्स के सचिव कमल भम्भानी ने उम्मीद की है कि चिट फंड कारोबार में कुछ शब्दावली को बदलने के लिए स्थायी समिति की अन्य सिफारिशों को भी विधेयक में शामिल किया गया होगा, जिसमे प्रमुख सुझाव हैं: (i) फोरमैन को 'चिट प्रमोटर' द्वारा बदल दिया जाएगा जिससे प्रमोटर पर ओनस लगाने में मदद मिलेगी, (ii) प्रत्येक ड्रॉइंग के डिस्काउंट में सब्स्क्राइबर के हिस्से को दर्शाने के लिए 'डिविडेंड' शब्द इस्तेमाल किया जाता है। 'डिविडेंड' एक कंपनी के शेयरों द्वारा घोषित मुनाफे को दर्शाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। उलझन दूर करने के लिए 'डिस्काउंट का हिस्सा' शब्द इस्तेमाल करना उपयुक्त है (iii) 'चिट राशि' को 'सकल चिट राशि', 'पुरस्कार राशि' को 'कुल चिट राशि' से बदला जाएगा। ऐसा करने से 'पंजीकृत' चिट फंड कंपनियों को प्रतिबंधित इनामी चिट योजनाओं से अलग दिखने में मदद होगी। चिट प्रमोटर्स के हाथों में ग्राहकों की मेहनत की कमाई के लिए बीमा कवरेज लाने के लिए आवश्यक प्रावधानों को शामिल करने के लिए सेलेक्ट कमेटी की सिफारिश एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो हमें उम्मीद है कि सरकार Key Advisory Group की ओर से सिफारिश को लाने की अनुमति देगी। चिट कंपनियां एक महत्वपूर्ण शुल्क आधारित गतिविधि है, जो स्थायी समिति द्वारा चूक गया था, इसे भी देखने की आवश्यकता है।
आल इंडिया एसोसिएशन ऑफ़ चिट फंड्स के अध्य्क्ष ऐ चित्ररसु ने कहा चिट फंड सेवाओं पर 12% जीएसटी को रद्द करने के लिए भी मांग की गई है। चूंकि इसमें चिट फंड अधिनियम में कोई बदलाव शामिल नहीं है, इसलिए स्थायी समिति ने इस पर टिप्पणी नहीं की है। हम सरकार से इस विषय पर बात कर रहे हैं। जीएसटी लागू होने से चिट फंड में उधारकर्ता को भारी दरों पे धन मिलता है, और बचत करने वाले को कम रिटर्न की प्राप्ति होती है। यदि सरकार जीएसटी से चिट फंड सेवाओं को कुल छूट देने के हमारे अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सकती, तो कम से कम चिट पर लगने वाला दर घटाकर 5% कर दिया जाए, जो जीएसटी अधिनियम के तहत न्यूनतम दर है। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग को मदद मिलेगी, जो चिट फंड सेवाओं के लाभार्थी हैं। इन सुधारों से हम अपनी सेवाओं को अधिकतर लोगों तक विस्तारित करने में सक्षम होंगे जिससे देश की वित्तीय समावेशन में मदद होगी।



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