सीएसआईआर – आईएमटीईसीएच ने सहयोगपूर्ण अनुसंधान के लिए आईआईटी बॉम्बे के साथ समझौता किया 

शब्दवाणी समाचार वीरवार 14 नवंबर 2019 नई दिल्ली। सीएसआईआर- इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रो बायल टेक्नोलॉजी (आईएमटीईसीएच) चंडीगढ़ ने सहयोगपूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के साथ नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन से दोनों संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं और प्राध्यापकों के बीच विचारों का आदान-प्रदान, नई जानकारी के विकास और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान में मदद मिलेगी। इस सहयोग का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र, खासतौर से परियोजनाओं और मिशन में आधुनिक अनुसंधान करना है जहां दोनों संस्थान एक-दूसरे को सहयोग कर सकें।



इस साझेदारी से दोनों संस्थानों को लाभ होगा क्योंकि इससे अनुसंधान, अध्यापन, विकास और सहयोगपूर्ण अनुसंधान परियोजनाओँ के कार्यान्वयन, व्यवसायिक विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण प्रयासों के उद्देश्य से प्राध्यापकों और छात्रों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
आईआईटी बॉम्बे के डीन, अनुसंधान और विकास के प्रोफेसर मिलिंद अत्रे और सीएसआईआर – आईएमटीईसीएच के ऑफिशिएटिंग निदेशक डॉक्टर मनोज राजे ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. सी मांडे की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी का स्वागत करते हुए डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे देश के शीर्ष रैंक वाले संस्थानों में से है और आईएमटीईसीएच और भारत की उन चिकित्सा जरूरतों पर विशेष ध्यान दे रहा है जो अभी पूरी नहीं की जा सकी हैं, यह समझौता ज्ञापन विशेषकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सहयोगपूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
यह समझौता ज्ञापन वर्ष 2018 में एमएचआरडी द्वारा जारी परिपत्र की तर्ज पर है जिससे सभी आईआईटी के लिए सीएसआईआर से सम्बद्ध राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का मार्ग प्रशस्त होगा ताकि नया सहयोग शुरू किया जा सके और जहां पहले से ही ऐसे सहयोग मौजूद है वहां उन्हें और बढ़ाया जा सके। साथ ही दोनों संस्थानों के प्राध्यापक इस समझौता ज्ञापन के नीचे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कायम करने के बारे में बातचीत कर सकेंगे।
समझौता ज्ञापन के बाद डॉक्टर मनोज राजे ने कहा कि इंजीनियरिंग और विज्ञान के दो श्रेष्ठ संस्थान औपचारिक तौर पर एक साथ एकजुट हुए हैं और मेरा मानना है कि दोनों संस्थानों के प्राध्यापक और छात्र सहयोगपूर्ण अनुसंधान परियोजनाओं, व्यवसायिक विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण प्रयासों के विकास और कार्यान्वयन की दिशा में कार्य करेंगे। 



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