अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान गाजियाबाद ने त्रिदिवसीय ध्यान योग शिविर का किया आयोजन


 

शब्दवाणी समाचार, रविवार 16 अक्टूबर 2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, गाजियाबाद। अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान गाजियाबाद ने त्रिदिवसीय ध्यान योग शिविर का आयोजन परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में स्वामी चिदानंद सरस्वती जी के सानिध्य में फिजिकली एवं ऑनलाइन किया। सत्र का शुभारंभ संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अशोक शास्त्री ने ओ३म् की ध्वनि एवं गायत्री मंत्र से किया उन्होंने साधकों को सूक्ष्म व्यायाम पैरों,हाथों,गर्दन एवं आंखों के अभ्यास कराये और उसके लाभों की चर्चा करते हुए बताया कि प्रत्येक क्रिया के बाद गहरा स्वांस लें एवं छोड़ें। संस्थान के महामंत्री श्री दयानंद शर्मा ने शिविर के आवश्यक नियम और दिशा निर्देश दिए और योग नगरी में गाजियाबाद से पधारे शिविरार्थियों और ऑनलाइन जुड़े साधकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।शिविर संयोजक राजेश शर्मा ने शिविरार्थियों को सूर्य नमस्कार, जानुशिरासान,कोणासन के बाद बालासन में विश्राम,मंडूकासन, मकरासन,उष्ट्रासन,शवासन,सिंह गर्जना का अभ्यास कराया एवं इसके लाभों की चर्चा की और कहा कि स्वयं के साथ जुड़ जाना ही योग है,अपने आपे में आने से आनन्द की अनुभूति होती है।योग करने से बुद्धि विकसित होती है, हास्यासन से खुश रहते हैं,जहां ऑक्सीजन ज्यादा हो वहां प्राणायाम का अभ्यास करने से प्राण शक्ति बढ़ती है,लंग्स, डायाफ्राम मजबूत होते हैं।

योगी प्रवीण आर्य ने सुन्दर गीत कण कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया,उसकी उपासना ही कर्तव्य है बताया" सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्थान के उपाध्यक्ष श्री मनमोहन वोहरा ने साधकों को पद्मासन में बैठाया और मूलाधार चक्र की जानकारी देते हुए बताया कि मेरु दंड सीधा,गर्दन सीधी करने पर मूलबंध लग जाता है,ध्यान मुद्रा मे बैठाकर मन को नियंत्रित करने वाला मंत्र ओ३म् का श्वांस प्रश्वांस गुंजार कराया और गहरा लंबा स्वांस भरवाया और धीरे धीरे छोड़ने को कहा मूलाधार चक्र पर वायब्रेशन का अनुभव करने को कहा,स्वअनुभूति ही अपना अनुभव है उन्होंने आठों चक्रों पर शनेः शनेः ध्यान कराया और कहा प्राण ऊर्जा 72 हजार नस नाड़ियों में प्रवाहित रहती है।जिससे सभी को परम शांति का अनुभव हुआ।उन्होंने कहा कि ध्यान करने वाले साधक को ध्यान से आश्चर्यजनक लाभ होते हैं।हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिये नियमित ध्यान बेहद मददगार साबित होता है।मानसिक चंचलता और अस्थिरता पर नियंत्रण होता है।मानसिक तनाव,चिंता,भय और हीनभावना से छुटकारा मिलता है।कमजोर दिमाग और याद्दाश्त की समस्या से मुक्ति मिलती है। संस्थान के अध्यक्ष श्री केके अरोड़ा ने बताया कि ध्यान योग द्वारा विनाशी शरीर से अविनाशी को अनुभूत किया जा सकता है इसलिए सदा समय का सदुपयोग कर अविनाशी प्रभु की और बढें। उन्होंने हास्यासन भी कराया और कहा साधक की पहचान चेहरे पर मुस्कान। वरिष्ठ योग शिक्षिका वीना वोहरा ने शान्ति पाठ ओर वैदिक प्रार्थना से प्रथम सत्र को सम्पन्न किया

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