दिल्ली एबिलिमपिक्स ने दिव्यांगों के लिए आशा की उम्मीद जगाई

शब्दवाणी समाचार शुक्रवार 05 जुलाई 2019 नई दिल्ली। सुहाना मौसम और लेडी इरविन में खासी चहल पहल। लेकिन यह अमूमन चहल पहल से अलग, वशिष्ट लोगों के लिए नया और अलग करने की उम्मीद जताता अवसर थी। मौका था सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट एवम् नेशनल एबिलिंपिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएएआई) द्वारा आयोजित नॉर्थ जोन रीजनल एबिलिंपिक्स के 19वें संस्करण का। एबिलिंपिक्स दिव्यांगों की प्रतिभा व क्षमता का ओलंपिक है। दिल्ली में इस दो दिवसीय आयोजन में दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के 400 से ज्यादा दिव्यांग प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।



लेडी इरविन के प्रांगण में जारी एबिलिंमपिक्स कोई साधारण अवसर नहीं था, न ही कोई साधारण प्रशिक्षण केंद्र और न ही कोई सांसारिक घटना। यह अलग-अलग रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनूठा अवसर था। 27 वर्षीय, श्रवण बाधित संजीव कुमार आज नई दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज में आयोजित नॉर्थ ज़ोन रीजनल एबिलीपिक्स एंड जॉब फेयर के माध्यम से आतिथ्य क्षेत्र में नौकरी हासिल करने की उम्मीद के साथ आए थ। इसी तरह, देहरादून की लक्ष्मी कुमारी, जो 100 फीसदी दृष्टिहीन हैं, ने पुष्प व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में 2 स्वर्ण पदक जीते थे। वह इस प्रतिभा को अपने शहर में ले जाने और युवा लड़कियों को प्रशिक्षित करने की इच्छुक है। आज शुरू हुई दिल्ली एबिलीपिक्स एक कौशल-आधारित प्रतियोगिता है जो अलग-अलग तरह से दिव्यांगों के लिए एक मंच प्रदान करती है। हर साल आयोजित, इसके कार्यक्रम प्रतियोगियों की मानसिक, शारीरिक और रचनात्मक क्षमताओं का परीक्षण करते हैं। प्रतिभागियों को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग से लेकर बेकरी की पुष्प व्यवस्था तक हर चीज में कौशल दिखाने का मौका मिलता है।
कार्यक्रम के औपचारिक उद्घाटन समारोह का आयोजन चाणक्यपुरी में किया गया था, जहां शकुंतला गैंबलिन, (सचिव, डीपीडब्ल्यूडी), श्री दिलीप चेनॉय (महासचिव, फिक्की), श्री मनीष कुमार (सीईओ, एनएसडीसी), के. नारायण राव (ग्रुप डिप्टी मैनेजिंग डायरेटक्र, जीएमआर), पद्म भूषण डॉ. एमबी अथरेया (सार्थक मेंटर), गुरु कृष्ण कालरा (अध्यक्ष, एनएएआई) और डॉ जितेन्द्र अग्रवाल (संस्थापक और सीईओ, सार्थक एंड सेकरेटरी जनरल - एनएएआई) की उपस्थिति में विभिन्न सत्र भी आयोजित किये गये।
मौके पर जीतेन्द्र अग्रवाल ने कहा, “एबिलिमपिक्स ओलंपिक में पीडब्ल्यूडी की क्षमताओं और जबरदस्त प्रतिस्पर्धी उत्साह का प्रदर्शन करता रहा है।“ श्री अग्रवाल ने बताया इन प्रतिभाशाली लोगों की क्षमता को समझते हुए, हरियाणा सरकार ने हमें गुड़गांव में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए देश का पहला, ग्लोबल रिसोर्स सेंटर विकसित करने के लिए जमीन दी है। इस सेंटर में पांच पंखों वाले स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा, कौशल विकास, विकलांगता संवेदीकरण, ऊष्मायन केंद्र और प्रौद्योगिकी उन्नयन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मीडिया एवम् कम्यूनिकेशन एडवोकेसी कार्यक्रम होंगे। केंद्र पीडब्लूडी के वैश्वीकरण के मुद्दों के समाधान में मदद करने के साथ-साथ कॉरपोरेट्स और जनता से एक साथ आने के लिए अपील करेगा“। उन्होंने बताया कि 65 फीसदी दिव्यांगजनों को गांवों में रहते हुए सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट का इरादा ग्रामीण रोजगार पहुंचाना है।
समारोह की मुख्यातिथि सुश्री शकुंतला गैंबलिन ने कहा, “मैं प्रारंभिक हस्तक्षेप देखभाल अर्थात 0 से 6 वर्ष उम्र में विश्वास करती हूं जिससे दिव्यांगों की देखभाल हो सके। इसके लिए स्वास्थ्य सुविधाओं और पुनर्वास चिकित्सा जैसी देखभाल के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। माता-पिता के लिए परामर्श और भाषण चिकित्सा, समय की आवश्यकता है।'' उन्होंने आगे कहा, “यहां अवसर बहुत हैं, लेकिन कौशल और प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। कोई भी व्यक्ति खेल, संस्कृति या किसी भी व्यापार में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है। ऐसे में हमें जरूरत है कि खुद को सशक्त बनाएं ताकि समाज इस कलंक से मुक्त हो सके।”
श्री कृष्ण कालरा, अध्यक्ष, एनएएआई ने कहा, “सार्थक और एनएएआई इस मुद्दे को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं कि देश में लगभग 30 मिलियन पीडब्ल्यूडी दान और सहानुभूति की नहीं बल्कि नौकरियों और सशक्तीकरण की तलाश में हैं, कई नौकरियां हैं जहां वे सक्षम व्यक्ति से बेहतर कर सकते हैं, ऐसे में यह कार्यक्रम और प्रयास बहुत सार्थक है।“ एनएसडीसी के श्री मनीष कुमार ने पीडब्ल्यूडी के लिए प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों के बारे में बात की। उन्होंने स्किलिंग के लिए 5 जिलों के लिए कार्य योजना तैयार करने और कौशल विश्वविद्यालय की अवधारणा के विकास के लिए बड़े भागीदारों को आकर्षित करने पर जोर देते हुए, भारत को दुनिया की कौशल कैपिटल बनाने की बात कही।
2001 में शुरुआत के बाद से एबिलिंपिक्स को सरकार, कॉरपोरेट घरानों, कंपनियों, क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म, निवेशक व स्टार्ट अप्स समेत कई लोगों का भरपूर समर्थन मिला है। दिल्ली एबिलिंपिक्स 4 जोन और 10 वोकेशनल सेगमेंट में बंटा है, जिनमें आईसीटी (कैरेक्टर डिजाइनिंग, डेस्कटॉप पब्ब्लिशिंग और ई-स्पोर्ट्स), क्राफ्ट्स (फ्लोरल अरेंजमेंट), फूड (कुकिंग एवं बेकरी), सर्विसेज (ज्वेलरी, टेलरिंग/ड्रेस मेकिंग एवं ब्यूटी थेरेपी) और कैड (सीएडी) के जरिये आर्किटेक्चर डिजाइनिंग शामिल हैं। प्रत्येक सेगमेंट में विजेता नेशनल एबिलीपिक्स में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे और चीन में होने वाले इंटरनेशनल एबिलीपिक्स 2020 स्लेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका देंगे।
दिल्ली एबिलिंपिक्स प्रमुख आकर्षणों में से एक यहां आयोंजित होने वाला रोजगार मेला भी होगा, जिसमें डील मनी, बिग बास्केट, मेट्रो कैश एंड कैरी, केपजेमिनी, एजिस, कंसेंट्रिक्स, पुलमैन, ऑलिव ग्रुप, लेमन ट्री होटल्स, बिगटेल सॉल्यूशंस, रिलायंस फ्रेश, रिलायंस स्मार्ट, वेन्योर, मिंडा स्पार्क समेत 25 से ज्यादा कंपनियां दिव्यांगों की नियुक्ति का अभियान चलाएंगी। पिछले वर्षों में इन रोजगार मेला के जरिये हजारों दिव्यांगों को रोजगार मिला है। नॉर्थ ज़ोन रीजनल अबिलिम्पिक्स के बाद, साउथ और ईस्ट ज़ोन रीजनल एबिलिम्पिक्स क्रमशः चेन्नई और कोलकाता में आयोजित किए जाएंगे।



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