हमीरपुए में लाकडाउन के चलते गहराता रहा है आर्थिक संकट

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 22 अप्रैल (मुकेश कुमार), हमीरपुर। लाकडाउन के चलते जहां कोरोना को हराने मे देश सफलता पुर्वक कामयाबी की ओर बढ रहा है वहीं कामधाम ठप्प होने के चलते देहाडी मजदूर व किराने आदि की दुकानो मे माहवारी वेतन पर लगे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट आन खडा हुआ है। लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच रहे है। हालाकि शासन प्रशासन ऐसे बेबस गरीबो की मदद का हर सम्भव प्रयास कर रहा है किन्तु नौकरशाही तो नौकरशाही ही है जो जमीनी रिपोर्ट को नजअन्दाज कर कागजी आकडेबाजी के खेल मे पीछे नही हो सकती। प्रशासन की निगाह मे न ही कोई भूखा सो रहा है और न ही कोई ऐसा जरूरतमन्द है जिस तक उनकी मदद न पहुंच रही है। 



जबकि इसके विपरीत बात पूर्ति विभाग की करे तो इनका एक अलग दायरा है । सत्ता बदले तो व्यवस्था भी बदली पर नही बदला तो अतिरिक्त आय का सोर्स । सुविधा शुल्क के दम पर अपात्रो को पात्र व पात्रो को अपात्र बनाकर महीनो भटकाना यहां के कर्मचारियां व अधिकारियों के लिये रोजमर्रा का काम है किन्तु मामला तब और चिन्तनीय हो जाता है जब इसी विभाग मे लगे प्राईवेट कर्मचारी का परिवार भुखमरी की कगार पर हो और विभाग राशन कार्ड जारी करने मे हीला हवाली करे। 
मामला कस्बा मौदहा के वार्ड नम्बर 14 का है। यहां के जितेन्द्र कुमार  पुत्र बरदानी लाल द्वारा बताया गया कि उसके पिता पूर्ति विभाग मे कर्मचारी है किन्तु उसके पिता और माता का विवाद बीते एक दशक से चल रहा है।मामला कोर्ट मे विचाराधीन है। वह किसी तरह मेहनत मजदूरी कर अपनी पढाई के साथ परिवार भी पाल रहा है। दो छोटे भाई एक बहन व मां की जिम्मेदारी उसी के कन्धे पर है। किन्तु लाकडाउन के बाद उसके पास आय का कोई दूसरा जरिया नही है परिवार भुखमरी की कगार पर है। उसने पूर्ति विभाग मे बीते लगभग डेढ वर्ष मे कई बार राशन कार्ड बनवाने का आवेदन किया किन्तु विभागीय लापरवाही के चलते राशन कार्ड अब तक नही बन सका। वही उक्त मामले मे पूर्ति विभाग के कर्मचारी व फरियादी जितेन्द्र के पिता बरदानी लाल द्वारा बताया गया कि आधार कार्ड मिलते ही डाटा भीड कर दिया गया है। पूर्ति अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर होने के बाद ही राशन कार्ड जारी हो पायेगा। जबकि पूर्ति अधिकारी अमित त्रिवेदी द्वारा बताया गया कि शासन द्वारा र्निधारित लक्ष्य पूरा हो चुका है। इस वक्त न ही नये राशन कार्ड बन रहे है और न ही संसोधन कर नाम घटाये अथवा बढाये जा रहे है। लखनऊ से नये दिशा र्निदेश मिलने के बाद ही राशन कार्ड जारी किया जायेगा। अब इस बीच गरीब परिवार जीने के लिये कुछ खाये अथवा भूखों मर जाये इनकी बला से।
जीवों की सेवा ही मेरा परम कर्तव्य है : रशीद अहमद
शब्दवाणी समाचार, बुधवार 22 अप्रैल (दुर्गेश कश्यप), हमीरपुर। कोरोना लाकडाउन के बीच जहां प्रशासन बेसहारा लोगो की मदद के लिये हर तरीके के प्रयास मे जुटा है। वहीं बेसहारा बेजुबान कुत्तों को भूख से बचाने के लिये कस्बा निवासी अब्दुल रशीद उर्फ बिलियन बादशाह कस्बे मे किसी तरह से ब्रेड बिस्कुट व अन्य खादय सामग्री लेकर कई स्थानो पर कुत्तो का पेट भरने के लिये इन्हें खिलाता नजर आता है। इतना ही नहीं वह कई क्षेत्र मे बन्दरों को भी खिलाता है। उसे देख यह बेजुबान उसकी आवाज सुनते ही उसकी तरफ दौड पडते है। 



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