देख कर मज़बूरी जिनकी हम दया कर जाते है


शब्दवाणी समाचार, शनिवार 25 जुलाई 2020, कवि सुखवीर चौधरी, मथुरा (उत्तर प्रदेश)।



देख कर मज़बूरी जिनकी हम दया कर जाते है , 
वो हमें बेबस बना क्यों ग़ैर के घर जाते है ।


उन के बच्चे इस जहाँ में कुछ नहीं कर पाएंगे ,
बाप दादा ख़ूब जिन के दौलतें धर जाते है ।


पाप की काली कमाई वो सभी खाते रहे ,
बाप के कर्मों के फ़ल बच्चों के सर पर जाते है ।


सामने दुनिया के अब हम सच नहीं कह पाएंगे ,
क्योंकि सच का देख कर अंजाम हम डर जाते है ।


हैं सभी मुर्दा यहाँ जिंदा कोई दिखता नही ,
आत्मा होते हुए भी जीते जी मर जाते है ।




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