मनीषा को मौन श्रद्धाजंली


शब्दवाणी समाचार, रविवार 4 अक्टूबर 2020, नई दिल्ली।
(लेखक विनोद तकिया वाला, स्वतंत्र पत्रकार)



सुनो बहन ' बेटी तुम शस्त्र उठा लो, अब गोविंद ना आएंगे...l
छोड़ो मेहंदी खड़ग संभालो
खुद ही अपना चीर ( लाज )बचा लो
गली - मुहल्ले मे द्यूत बिछाए बैठे शकुनी
...मस्तक सब बिक जाएंगे
सुनो बहन - बेटी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आएंगे...|
कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए पुलिश ' प्रसासन से,
कैसी रक्षा मांग रही हो धतृराष्ट्र
के राज दरबारों से
स्वयं जो दृष्टिहीन ,शब्दविहीन, गुंगी बहरी पड़े हैं ' सता के सिन्धासन पर ।
वे क्या तुम्हारी लाज बचाएंगे
सुनो बहन - बेटी अब शस्त्रउठालो अब गोविंद ना आएंग...l
कल तक केवल अंधा राजा, अब गूंगा-बहरा भी है
होंठ सिल दिए हैं जनता के, कानों पर पहरा भी है
तुम ही कहो ये अश्रु की अविरल धारा तुम्हारे,
किसको क्या समझाएंगे?
सुनो बहन - बेटी अब शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आएंगे...l





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