गिरावट के बावजूद सोने से उम्मीदें हैं, तेल की कीमतें 1% लुढ़की



शब्दवाणी समाचार, शुक्रवार 6 नवंबर 2020, नई दिल्ली। कोरोनोवायरस के मामलों में लगातार वृद्धि और डॉलर के मजबूत होने के साथ, कच्चे तेल की कीमतों में एक महत्वपूर्ण दिन के दौरान गिरावट आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के वोटों की गिनती की जा रही है। इसके परिणामों पर अनिश्चितता घिरी हुई है क्योंकि कुछ राज्यों की ही गणना बाकी रह गई है। परिणाम फिलहाल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी जो बाइडेन के पक्ष में हैं, जबकि विभाजित सीनेट और प्रतिनिधि सभा बाज़ार को सीनेट के संभावित रिपब्लिकन पार्टी नियंत्रण पर प्रभावित कर रहा है, जो प्रमुख बिलों को रोक सकते हैं। 
सोना
अमेरिकी चुनाव के परिणाम वाले दिन, स्पॉट गोल्ड की कीमतों में मात्र 0.3% की कमी हुई, जो $1903.2 प्रति औंस पर बंद हुआ। चुनाव परिणाम का इस कीमती धातु की कीमत पर असर पड़ा है, जिसमें को कम नुकसान हुआ है। वर्तमान रुझान बताते हैं कि जो बाइडेन एक ऐतिहासिक जीत के नज़दीक पहुंच रहे हैं। हालांकि, अवलंबी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का अभियान कई राज्यों में कड़ी टक्कर दे रहा है। बाज़ार का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन में बदलाव का सकारात्मक असर हो सकता है, जो आमतौर पर बाजार की गतिशीलता को बदल देता है। जब राजकोषीय प्रोत्साहन अर्थव्यवस्था में जांन फूंकता है, तब सोने की कीमतें बढ़ती हैं, क्योंकि यह मुद्रास्फ़ीति के रुझान और मुद्रा के उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद कर सकता है।
चूंकि सीनेट पर रिपब्लिकन का नियंत्रण रहने की उम्मीद है, वे अंतिम परिणामों के बाद किसी भी प्रमुख कोविड-19 राहत पैकेज को अस्वीकार कर सकते हैं।
कोरोनावायरस मामलों में कोई राहत नहीं दिख रही है, जो यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में लॉकडाउन के उपायों की एक श्रृंखला से स्पष्ट होता है। बाज़ारों की जोखिम लेने की भूख ने जोर पकड़ लिया, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षित निवेश, सोने को समर्थन मिला। कमोडिटी बाजारों की स्थिति का पता लगाने के लिए, बाज़ार चुनाव के बाद फ़ेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की सभा का इंतज़ार करेगा।



एमसीएक्स पर, आज के सत्र के दौरान सोने की कीमतों के साइडवे पर ट्रेड करने की उम्मीद है।
कच्चा तेल
चुनाव परिणाम के दिन की समाप्ति तक डॉलर की कीमत बढ़ने के साथ, यू.एस. की डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें गुरुवार सुबह तक 1% गिर गईं, जो बुधवार को 2.3% तक बढ़ गई थी, जिसे पिछले 3 महीनों में एक महत्वपूर्ण वृद्धि माना गया था। यह 40 सेंट की गिरावट के साथ $38.75 प्रति बैरल पर आ गया। दूसरी तरफ ब्रेंट क्रूड 1% या 41 सेंट की गिरावट के साथ $40.82 प्रति बैरल पर आ गया।
जब तक अमेरिकी चुनाव की सभी प्रक्रियाएं समाप्त नहीं हो जाती हैं, और 2021 के लिए राष्ट्रपति-चुनाव घोषित नहीं हो जाता है, तब तक तेल की कीमतों पर कुछ दिनों तक अस्थिरता जारी रहने की संभावना है। चूंकि डॉलर और तेल की कीमतों में विपरीत संबंध रहता है, बुधवार को कमज़ोर रहे डॉलर ने गुरुवार को मजबूत होकर घाटा कवर कर लिया।
बुधवार को, तेल की कीमतों में शुरुआत में वृद्धि देखने को मिली, जो अवलंबी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चुनाव जीतने के अवैध दावों के कारण था। इसके अलावा, OPEC और सहयोगी (OPEC+) से प्रति दिन 2 मिलियन बैरल की आपूर्ति करने के पुराने फैसले के खिलाफ जाने की उम्मीदों से, 4 नवंबर तक कीमत में वृद्धि हुई है। उन्हें दुनिया भर में लॉकडाउन और कोविड-19 के असर की वजह से, जनवरी में उनकी आपूर्ति करनी थी। हालांकि, कोविड-19 के मामलों में अनिश्चितता बढ़ने और देशों से मिली रही प्रतिक्रियाओं की वजह से पॉज़िटिव ट्रेंड कुछ ही पल रहने वाले साबित हो रहे हैं।
आज के सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतें कम होने की उम्मीद है।
बेस मेटल
एलएमई पर बेस मेटल का प्रदर्शन इस बुधवार को मिश्रित था, क्योंकि अमेरिकी चुनाव के परिणामों की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। चुनाव के परिणाम में अनिश्चितता के कारण, बेस मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव अन्य वस्तुओं की तरह ही है। हालांकि, दिन खत्म होने तक, डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन की बेहतर संभावनाओं से राजकोषीय प्रोत्साहन की घोषणा की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जिससे एलएमई एल्युमीनियम और एलएमई कॉपर की कीमतों में सकारात्मक असर पड़ रहा है।
हालांकि, निवेशक सावधानी बरत रहे हैं क्योंकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कोरोनोवायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ ने मजबूत औद्योगिक गतिविधि के आंकड़े पेश किए, वह भी तब जक महामारी दीर्घकालिक संभावनाओं को खत्म कर रही है।
आज के सत्र में MCX एल्युमीनियम और निकेल के साइडवे ट्रेड करने की उम्मीद है, जबकि ज़िंक और लेड से फायदे का व्यापार करने की उम्मीद है।



तांबा
एलएमई कॉपर बुधवार को 0.32% बढ़कर, और $6816 प्रति टन पर बंद हुआ। लाल धातु की कीमत में वृद्धि के लिए चिली जैसे प्रमुख तांबा उत्पादक देशों में सप्लाई चेन के अवरोधों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। एक बार फिर से, चिली में सितंबर, 2020 में कोरोनोवायरस केस में वृद्धि की वजह से श्रमिक/कामगारों के बीच मोलभाव करने, और महामारी के प्रतिबंध लगने के कारण तांबे के उत्पादन पर असर पड़ा है। कोविड-19 के व्यवधान, चुनाव के बाद यूएस डॉलर के मजबूत होने की वजह से आने वाले दिनों में तांबे की कीमतों पर असर जारी रहने की संभावना है। कॉपर की कीमतों में आज एमसीएक्स पर साइडवे ट्रेड करने की उम्मीद है।



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