एल्सटॉम और भारतीय रेलवे ने एफडीआई के पाँच साल पूरा किया

• 2015 में, एल्सटॉम को माल ढुलाई में सुधार के लिए 12,000 हॉर्सपॉवर के 800 डबल-सेक्शन इलेक्ट्रिक ऑटोमोटिव्स की आपूर्ति का ऑर्डर मिला

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 23 दिसंबर  2020, नई दिल्ली। इस साल, एल्सटॉम को भारतीय रेलवे से 3.5 बिलियन यूरो का कॉन्ट्रैक्ट मिले पाँच साल पूरे हो गए, जिसके तहत यह 12000 हॉर्सपॉवर के 800 फुली इलेक्ट्रिक सुपर पॉवर्ड डबल सेक्शन लोकोमोटिव सप्लाई करेंगे। यह इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव 6000 टन की हॉलिंग क्षमता के साथ 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की टॉप स्पीड से चल सकते हैं। डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर (डीएफसी) सहित माल ढुलाई के प्रमुख मार्गों पर लगाए जाने वाले ये ई-लोको भारत में भारी मालढुलाई के परिदृश्य में परिवर्तन ला रहे हैं। इन पाँच सालों में भारतीय रेलवे सेक्टर में सबसे बड़े फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) प्रोजेक्ट में भारी प्रगति हो चुकी है।

रेलवे मंत्रालय एवं कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी/आरडीएसओ द्वारा इस साल प्रमाणित, पहला डब्लूएजी 12बी ई-लोको मई, 2020 में कमर्शियल सेवा में लगाया गया। एल्सटॉम अभी तक ऐसे 50 ई-लोको का निर्माण कर भारतीय रेलवे को उनकी आपूर्ति कर चुका है। ये ई-लोको आज तक रेलवे नेटवर्क पर लगभग 2 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। 

एल्सटॉम इंडिया एवं साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, एलेन स्पोर ने कहा, “एल्सटॉम को भारत के विकास के सफर में साझेदारी करने पर गर्व है। आज हम जब अपने पिछले पाँच सालों की सफल यात्रा देखते हैं, तो मुझे यह बताने में बहुत गर्व महसूस होता है कि हमने अनेक क्षेत्रों - टेक्नॉलॉजिकल, इन्फ्रास्ट्रक्चरल एवं सामाजिक आर्थिक में एक समान प्रगति की है।

इस कॉन्ट्रैक्ट में 13 सालों की अवधि के लिए ई-लोको का मेंटेनेंस भी शामिल है। इसके आधार पर भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड मैनुफैक्चरिंग सुविधाओं में से एक की माधेपुरा, बिहार में स्थापना के लिए भारतीय रेलवे, रेलवे मंत्रालय (26 प्रतिशत लाभांश) और एल्सटॉम (74 प्रतिशत लाभांश) के बीच एक संयुक्त उपक्रम का गठन किया गया। 250 एकड़ में फैली, 120 लोकोमोटिव प्रतिवर्ष की उत्पादन क्षमता के साथ यह औद्योगिक साईट सुरक्षा व क्वालिटी में अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार बनी है। वित्तवर्ष 20/21 में एल्सटॉम 75 यूनिट और अगले वित्तवर्ष से हर साल 100 यूनिट की आपूर्ति करेगा। 

माधेपुरा की सुविधा से 10 अप्रैल, 2018 को पहले ई-लोको को रवाना करते हुए माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, ‘‘मैं 12,000 एचपी का पहला इंजन रवाना करते हुए बहुत खुश हूँ। दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं, जो माल ढुलाई के लिए इस स्केल और शक्ति के लोकोमोटिव का उपयोग करते हैं। ये इंजन भारत में माल ढुलाई परिवहन की गति को दोगुना तेज कर देंगे।

इस साल भारत के ग्रीन रेलवे के सपने पर रोशनी डालते हुए रेल, वाणिज्य व उद्योग, उपभोक्ता मामले एवं खाद्य व जन वितरण मंत्री, भारत सरकार, श्री पीयूष गोयल ने कहा था, “हमारे प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे के 100 प्रतिशत बिजलीकरण के लिए कार्यक्रम का अनुमोदन किया है। हम दुनिया की सबसे बड़ी रेलवे होंगे, जो भारत में 120,000 किलोमीटर के ट्रैक के साथ 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफाईड होगी। 2030 तक हम शून्य  उत्सर्जन के साथ दुनिया की पहली 100 प्रतिशत ग्रीन रेलवे होंगे।

इन शक्तिशाली ई-लोको के देश के अंदर निर्मित होने के साथ, भारत दुनिया का छठवां देश बन गया जो अपने देश में उच्च हॉर्सपॉवर के लोकोमोटिव्स बना रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश और नागपुर, महाराष्ट्र में दो अत्याधुनिक मेंटेनेंस डिपो की स्थापना शामिल है। इन डिपो में अत्याधुनिक टेक्नॉलॉजी एवं विशेषताएं हैं, जो ब्रेकडाउन का अनुमान लगा चुस्त उपाय कर लेंगी और काफी कम कीमत में भारत के सबसे आधुनिक माल ढुलाई लोकोमोटिव्स के रखरखाव में मुख्य भूमिका निभाएंगी। इस समय सहारनपुर का डिपो काम कर रहा है और यहां पर रेलवे कर्मचारियों तथा लोको पायलट्स के कौशल विकास के लिए स्मार्ट क्लासरूम्स एवं एक लोको साईमुलेटर के साथ ‘ट्रेनिंग सेंटर’ है। आज तक भारतीय रेलवे के 500 से ज्यादा लोको पायलट यहां प्रशिक्षित किए जा चुके हैं और भविष्य में प्रति वर्ष अतिरिक्त 500 को यहां प्रशिक्षण दिया जाएगा। नागपुर डिपो जल्द काम करना शुरू कर देगा।

भारत में फ्रांस के एम्बेसडर, इमैन्युअल लेनेन ने कहा, “भारत और फ्रांस के बीच का संबंध कई दशक पुराना है और अनेक क्षेत्रों में साझा विज़न के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय रेलवे के लिए सबसे बड़ा एफडीआई प्रोजेक्ट, यह संयुक्त उपक्रम एक सुरक्षित, तीव्र एवं कम कार्बन उत्सर्जन करने वाली सेवा के लिए विश्वस्तरीय टेक्नॉलॉजी का उपयोग करने की हमारी भावना को मजबूत करता है। हम इंडो-फ्रेंच पार्टनरशिप को मजबूत कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि हमारा सहयोग लोगों की जिंदगी में रियल-टाईम प्रभाव लेकर आएगा।“

दुनिया में एल्सटॉम लगभग हर प्रमुख रेलवे संगठन से जुड़ा है और भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े रेलवे संगठनों में से एक है। इस संयुक्त उपक्रम में अभिनवता के साथ जिम्मेदारी क समावेश किया गया है और हम मिलकर सुरक्षित, भरोसेमंद एवं प्रभावशाली समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत लॉजिस्टिक्स में क्रांति के कगार पर है और हम इस सफर का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हैं“, एलेन स्पोर ने कहा।

तकनीकी उत्तमता एवं स्थानीकरण

माधेपुरा में निर्मित लोकोमोटिव ट्विन बो-बो डिज़ाईन के साथ 12,000 हॉर्सपॉवर के हैं। ये नियमित लोकोमोटिव्स के मुकाबले दोगुनी गति से दौड़ने के लिए तैयार किए गए हैं। ये एक बार में 6000 टन सामान लेकर चल सकते हैं। इन्सुलेटेड गेट बाईपोलर ट्रांज़िस्टर्स (आईजीबीटी) आधारित प्रपल्ज़न टेक्नॉलॉजी के साथ डब्लूएजी 12 बी में रिजनरेटिव ब्रेकिंग का उपयोग होता है, जो ऊर्जा के उपयोग में कटौती करता है। इसके अलावा, इस ई-लोको के साथ, एल्सटॉम ऐसी लोको प्रस्तुत कर रहा है जो कम ऊष्मा एवं ट्रैक्शन न्वाईज़ उत्पन्न करती हैं। 1676 मिमी. ब्रॉड गेज़ के साथ ये ई-लोको तीक्ष्ण से तीक्ष्ण मोड़ पर भी सुगमता से मुड़ने के लिए डिज़ाईन किए गए हैं। 

इन ई-लोको में आठ-एक्सल डिज़ाईन है, जिससे लोकोमोटिव का प्रदर्शन बढ़ जाता है। प्राईमा टी8 टेक्नॉलॉजी द्वारा माईनस 50 डिग्री (- 50 डिग्री) से 50 डिग्री के चरम तापमान के बीच भी ऑपरेशन सुगम व लचीला बनता है। डब्लूएजी 12बी के साथ, एल्सटॉम ने भारतीय माल ढुलाई की ट्रेनों में बेहतरीन विशेषताएं, जैसे क्लाईमेट कंट्रोल सिस्टम, एयर कंडीशनर, फूड प्रिपरेशन एवं स्टोरेज सुविधाएं और टॉयलेट्स प्रस्तुत की हैं। इन ई-लोको में विशाल केबिन है, ताकि पायलट आराम से काम कर सकें। इसमें 85 प्रतिशत स्थानीकरण द्वारा स्थानीकरण का सपना पूरा किया गया है। 

सामाजिक आर्थिक प्रभाव

भारतीय रेलवे के साथ एल्सटॉम के संयुक्त उपक्रम द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों में 10,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियां उत्पन्न हुई हैं। स्थानीय समुदायों को सहयोग करने के लिए एल्सटॉम माधेपुरा के पास सात गांवों में समुदायों के उत्थान के लिए निवेश कर रहा है। यह निवेश शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण एवं कौशल के लिए किया जा रहा है। क्षेत्र में विभिन्न अभियानों का लाभ 20,000 से ज्यादा लोगों को मिला है।



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