फिल्म चीर हरण आगामी 29 जनवरी 2021 को बड़े परदे पर रिलीज़ होगी

समीक्षा : फिल्म चीर हरण

शब्दवाणी समाचार, रविवार 24 जनवरी  2021, (रेहाना परवीन खान जोशी) नई दिल्ली। फिल्म चीर हरण आगामी 29 जनवरी 2021 को सम्पूर्ण भारत में एक साथ बड़े परदे पर रिलीज़ हो रही है। फिल्म चीर हरण वैसे तो फीचर फिल्म नहीं वृत्त चित्र (Documentary) लगभग 2 घंटे की फिल्म है जिसे सेंसर बोर्ड ने U/A प्रमाण पत्र दिया है। भारत में वृत्त चित्र बहुत ही कम बड़े परदे पर रिलीज़ होती है। फिल्म के लेखक एवं निर्देशक कुलदीप रुहिल ने फरवरी 2016 में हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन पर लिखा है। जिसमें 31 लोग मारे गए थे यह दंगे केवल झूठी अफवाहों जिसमें मीडिया से लेकर अन्य सभी माध्यमों से फैलाया गया था। लेखक एवं निर्देशक कुलदीप रुहिल ने पूरी फिल्म को बांध रखा है दर्शकों को किसी भी आंदोलन जो की हिंसक हो जाती है और वो एक सांपरदायिक दंगे का रूप ले लेती है तो उस पर यह फिल्म सोचने को मजबूर करती है। लेखक एवं निर्देशक 

कुलदीप रुहिल ने फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश किया देश में कोई भी रंग भेद, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, इत्यादि के नाम पर होने वाले दंगे से किसी भी आम आदमी का किसी भी प्रकार से लाभ नहीं होता अगर कुछ होता है तो केवल जान माल का नुक्सान और जिस व्यक्तिक या परिवार का यह नुक्सान होता है वो व्यक्तिक या परिवार पूरी जिंदगी न उभर पाता है और ना ही भूल पाता है और यहां तक कि अन्य लोग भी चाहे वो किसी भी रंग भेद, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, इत्यादि का हो वो भी कुछ समय के लिए ही सही डर या सकते में आ जाता है। तो फिर इन दंगों से किसका लाभ ? हाँ अगर किसी का लाभ होता है तो केवल उसका जिसका रंग भेद, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, इत्यादि से कोई लेना देना नहीं वो तो केवल अपने राज लाभ के लिए अपने गुंडों जिनका मकसद रंग भेद, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, इत्यादि का लाभ नहीं कराना वो तो केवल अपने आर्थिक लाभ ताकि किसी को मारपीट कर उसको लुटा जा सके और साथ में उसका राज लाभ लेने वाले का उस पर आशीर्वाद बना रहे दंगाइयों का तो केवल यही मकसद होता है। हम आज जब आधुनिक युग में हैं जहां पर हर सुचना आसानी से उपलब्ध है वहां पर हम आपस में क्यों लड़े। इसलिए रंग भेद, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, इत्यादि के नाम पर अब ना लड़ा जाए।



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