मुरादाबाद की महिला की भोजन नली में कैंसर सफलता पूर्वक किया गया इलाज

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 16 फरवरी  2021मुरादाबाद। इंटेस्टाइनल कैंसर के बढ़ते मामलों और उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा पद्यतियों का जिक्र करते हुए मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, पटपड़गंज नई दिल्ली ने आज एक परिचर्चा सत्र का आयोजन किया। देश में कैंसर के बढ़ते मामले जागरूकता के अभाव का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है, लिहाजा बिगड़ते लाइफस्टाइल के साथ इन लक्षणों की शुरुआती पहचान करना महत्वपूर्ण हो गया है। इस सत्र में उपस्थित डॉ. रजत साहा ने बबिता सिंह के एक हालिया मामले का जिक्र किया जिनकी भोजन नली में कैंसर का सफल इलाज किया गया और अब एक स्वस्थ जिंदगी जी रही हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद सही समय पर लक्षणों की पहचान और कैंसर मामलों के बेहतर परिणामों के महत्व पर जोर देना था।

मुरादाबाद की मरीज बबिता सिंह को भोजन निगलने में कठिनाई होती थी और कुछ भी खाने—पीने के बाद उल्टी कर देती थी। छह महीने के अंदर उनका वजन लगभग 10 किलो घट गया था। इसके बाद मुरादाबाद में ही उनकी एंडोस्कोपी कराई गई। रिपोर्ट से पता चला कि उनकी भोजन नली में अवांछित सूजन हो रही थी जिस कारण नली अवरुद्ध होती जा रही थी। लिहाजा उनकी बायोप्सी कराई गई जिससे पता चला कि उनकी भोजन नली के निचले हिस्से में कैंसर विकसित हो गया है। मरीज और उनके परिजन पूरी तरह से टूट चुके थे जिसके बाद उन्होंने मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज में डॉक्टरों से परामर्श लेने का निर्णय लिया।

मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, पटपड़गंज एवं वैशाली में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ओन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रजत साहा ने कहा, 'विस्तृत जांच और स्कैन रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया था कि भोजन नली में कैंसर विकसित हो रहा था। लिहाजा ट्यूमर का आकार कम करने के लिए उन्हें कीमोथेरापी कराने की सलाह दी गई। उन्होंने हिम्मत के साथ कीमोथेरापी के सभी चरणों को पूरा किया और कैंसर से अपनी लड़ाई जारी रखी। कीमोथेरापी का चार सत्र पूरा करने के बाद मरीज की जटिल सर्जरी की गई जिसके तहत भोजन नली और पेट तक पहुंचने वाली नली का एक हिस्सा काटकर हटा दिया गया और बाकी हिस्सों को जोड़ दिया गया। सर्जरी के बाद भी उनकी चार बार कीमोथेरापी कराई गई। अब वह स्वस्थ हैं। बहुत जल्दी स्वस्थ होने के साथ ही मरीज की जीवनचर्या में भी सुधार आया और अब वह सामान्य रूप से अपने घर के कामकाज संभाल रही हैं।

इस तरह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान हो जाने और कैंसर के उपचार के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण अनुकूल परिणाम मिलने लगे हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि जागरूकता की बड़ी भूमिका होती है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर ऐसे कैंसरों का एक समूह होता है जो जीआई हिस्से और भोजन नली, लीवर, पेट, गॉलब्लाडर, पेनक्रियाज, छोटी आंत, कोलोन, मलाशय और मलद्वार समेत समूचे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। आम तौर पर ऐसे कैंसर पेट के अंदर अल्सर बन जाने से विकसित होते हैं जिनसे अन्य हिस्सों में भी बदलाव आने लगता है। 

Comments

Popular posts from this blog

सचखंड नानक धाम ने किसान समर्थन के लिए सिंघू बॉर्डर पर अनशन पर बैठे

बिल्कुल देसी वीडियो कंटेंट प्लेटफार्म ट्रेलर ने 20 मिलियन नए यूज़र दर्ज किए

अक्षय तृतीया पर रिलायंस ज्वेल्स अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि की कामना करता