कुम्भ महापर्व-2021 पुस्तक का लोकार्पण

 

◆ आस्था, विश्वास व सनातन-संस्कृति का परिचायक कुम्भ महापर्व

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 13 अप्रैल  2021, नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण राज्यमंत्राी श्री परषोत्तम रूपाला ने आज सोमवती अमावस्या के पवित्रा स्नान के दिन दिग्विजय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘कुम्भ महापर्व-2021’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक का विमोचन तथा भारतीय सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कुम्भ महापर्व जैसे अनेक पर्व हैं जो हमारे गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा, आस्था, विश्वास, भक्ति की विशालता और व्यापकता के द्योतक हैं। इन उत्सवों पर प्रकाशित होने वाला साहित्य कालजयी होने के साथ-साथ जन सामान्य में नव चेतना व उफर्जा का संचार करता है। कुम्भ महापर्व सदियों से विश्व का सबसे बड़ा ईश्वरीय आमंत्राण पर होने वाला समागम रहा है जिसमें आज भी देश-विदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेने आते हैं। विगत 2019 में प्रयागराज में आयोजित कुम्भ मेले की प्रशंसा करते हुए श्री रूपाला ने कहा कि प्रयागराज में हुए कुम्भ में जो व्यवस्थाएं योगी सरकार ने की थी वह अभूतपूर्व थी। ऐसी व्यवस्था हरिद्वार कुम्भ में कोरोना जैसी महामारी के कारण नहीं हो पाई।

इस अवसर पर पूर्वी दिल्ली के जाने माने चिकित्सक डाॅ. दिनेश सहाय ने कहा कि एक विद्वान एव गुणी व्यक्ति श्री रूपाला जी के करकमलों द्वारा कुम्भ जैसे महापर्व पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन हुआ है, यही अपने आप में एक मील का पत्थर है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन की प्रशंसा की तथा आशा व्यक्त की कि इसे अध्कि से अध्कि लोग पढ़ेंगे और लाभान्वित होंगे। पुस्तक की सम्पादक सुश्री मधु के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि सहित उनसभी को ध्न्यवाद दिया जिन्होंने इस धर्मिक पुस्तक के प्रकाशन में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों में डाॅ. आशे सहाय, श्रीमती पूनम श्रीवास्तव, मिस नेहा, ई. आदिति, बैंेकर दिव्या श्रीवास्तव, श्री कृष्ण कुमार, अनिरू(, सुनील गौतम आदि प्रमुख गणमाण्य लोग थे।

हरिद्वार में हो रहे इस पवित्रा महाकुंभ के अवसर पर दिग्विजय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई पुस्तक ‘कुंभ महापर्व-2021’ में कुंभ के उद्भव, इतिहास, विकास और विस्तार से संबंध्ति शोध्परक लेखों को सम्मिलित किया गया है। इस प्रकाशन में लेखों को विभिन्न खंडों में विभाजित किया गया है। इनमें पुण्य सलिला गंगा की द्यूलोक से भूलोक की यात्रा, कुंभ का आरंभ व महत्व, गंगा तट के तीर्थ, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना नमामि गंगे, निर्मल गंगा व अविरल गंगा से संबंध्ति लेख व विद्वानों द्वारा पावन गंगा के संबंध् में व्यक्त किए गए उदगारों के उद्ध्रण के अलावा कवियों द्वारा गंगा की पावन महिमा का सजीवचित्राणभी प्रकाशित किए गए हैं। जिन लेखकों के शोध्परक लेख इस पुस्तक में समिमलित किए गए हैं उनमें प्रमुख हैं- सर्वश्री गोबर्धन थपलियाल, व्योमेश जुगरान, ज्ञानेंद्र पांडेय, पार्थ सारथि थपलियाल, कमल, शरद जोशी शलभ, कपिलदेव दुबे, डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मदन थपलियाल, कुलदीप कुमार, रामचंद्र डुकलान, मित्रानंद कुकरेती, मिठाई लाल, डाॅ. सुदीप कुमार नंदा, अरविंद सारस्वत, गंगारत्न कमला पांडेय, डाॅ. नवलता, डाॅ. दीपमाला, डाॅ. कामाक्षी, डाॅ. ऐश्वर्य रश्मि, प्रो. सविता मोहन, डाॅ. सारिका मिश्रा, तृप्ति यादव, आचार्य कमला पांडे, मधु के श्रीवास्तव, आदि।

विषय चयन की सुगमता हेतु प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों जिनमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व गुजरात के राज्यपाल, शिक्षा मंत्राी भारत सरकार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्राी आदि हैं से प्राप्त शुभकामना व आशीर्वाद संदेशों को विषय अंतरण के मध्य में जोड़ा गया है।दिग्विजय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह बहुरंगी पुस्तक पठनीय तो है ही साथ ही संग्रहणीय भी है। पुस्तक जहां आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सनातन संस्कृति से परिचित करवाएगी वहां उनका मार्ग भी प्रशस्त करेगी। दिग्विजय पत्रिका की सम्पादक सुश्री मधु के. श्रीवास्तव ने पुस्तक का संपादन किया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् के पूर्व निदेशक जन सम्पर्क, लेखक व पत्राकार श्री मदन थपलियाल ने पुस्तक के प्रकाशन में सलाहकार की भूमिका निभाई है। प्रसि( पफोटोग्रापफर श्री रवि बत्रा एवं सुनील गौतम द्वारा कुम्भ के दौरन खींचे गए पफोटोस् को सम्मिलित किया गया है।

हरिद्वार में 11 वर्षों के अंतराल के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान हो रहे महाकुंभ-2021 अपने आप में एक विलक्षण आयोजन है। ध्र्म नगरी हरिद्वार कुम्भ में आने वाले श्रधालुओं काभव्य स्वागत कर रही है। इन दिनों राज्य प्रशासन मेले को सपफल बनाने के लिए रात-दिन मुस्तैदी से काम कर रहा है। अभी तक जितने भी पूर्ण कुंभ मेले हुए हैं वे बारह वर्ष बाद हुए हैं और चार महीने से अध्कि चले हैं परंतु इस बार महामारी के प्रकोप को देखते हुए इसकी अवधि घटाकर 28 दिनों की कर दी गई है। कुंभ में आने वाले श्रधालुओं के लिए कोविड-19 की रिपोर्ट, जिसमें उनके संक्रमित न होने की पुष्टि हो या टीकाकरण रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला प्रशासनों, राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न संगठनों तथा अन्य हितधरकों को मास्क पहनने, बार-बार हाथ धेने तथा सामाजिक दूरी बनाए रखने जैसे विभिन्न उपायों के सख्त अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।

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