दुविधापूर्ण जनता के लिये भी, शासन प्रशासन के लिये भी

 

शब्दवाणी समाचार, रविवार 11 अप्रैल  2021(परवेज़ अख्तर) लखनऊ। पिछले साल अपने देश में कॉरोना की दहशत थी पर हकीकत में कॉरोना इतना खतरनाक नहीं था कॅरोना से बहुत कम लोगों की मौत हुयी थी। पिछली बार कॉरोना के हव्वे ने और लाकडाऊन ने जो बेचैनी के हालात पैदा किये थे उससे लाखों लोग डिस्टर्ब हुये थे । पर इस महामारी ने अपने देश में इतनी ज़्यादा जाने नहीं ली थीं। जिसकी वजह से लोगों ने कॉरोना को हल्के में लेते हुये मज़ाक बना दिया था और मज़ाक बना दिया है। इस बात के लिये सरकार और सरकारी मशीनरी भी जिम्मेदार है क्योंकि एक तरफ़ तो मीडिया के ज़रिये और विज्ञापन के ज़रिये फोन कालरटोन के ज़रिये लोगों के मन में कॉरोना की दहशत भरी गयी। मुख्यमन्त्रियों की बैठक अधिकारियों की बैठक वीडियो कान्फ़्रेसिन्ग के ज़रिये की गयी यहाँ तक कयी जगाहों के उद्घाटन भी वीडियो कान्फ़्रेन्स के मार्फ़त से हुये। सिंगल बाइक सवार व बाज़ार में लोगों के मास्क न लगाने के कारण चालान किये गए बाइक पर दो आदमियों के बैठने पर बाइक सीज़ कर दी गयीं जनरल स्टोर मेडिकल स्टोर पर भीड़ होने पर जुर्माना ठोका गया ट्रेने कैंसिल की गयीं पिक्चर हाल, पार्क तक बंद किये गए।  ठीक इसके उलट शराब की दुकाने खोली गयीं वहां पर लगी भीड़ को नज़र अंदाज़ किया गया इसके बाद चुनावी माहौल में बेइन्तेहा लापरवाही करके रैलियों में ज़बरदस्त भीड़ इकट्ठी करके शादियों में छूट देके मेले ठेले में पूरी आज़ादी देके कॉरोना वायरस को दोबारा दावत दे दिया गया।



पिछली बार के लाकडाउन ने नौकरी पेशा लोगों पर तो ज़्यादा असर नहीं डाला क्योंकि उनकी तनख्वाह उन्हें मिल रही थी। पर हर कारोबारी की कमर को ज़रूर तोड़ कर रख दिया था, क्योंकि  कारोबारियों ने कारोबार बंद होने के बावजूद स्वयं भी व तमाम सन्गठन के साथ मिल कर प्रवासी मजदूरों की, गरीबों की, व अपने अडोस पड़ोस में ज़रूरत मंदो, की खूब खूब मदद की । बदले में इन कारोबारियों को बिज़नेस मैनो को सरकारी मदद के नाम पर बिज़ली के बिल में, हाउस टैक्स में, बैंक के ब्याज़ में, यहाँ तक की स्कूल की फ़ीस तक में, कोई छूट नहीं हुयी। और इसके विपरीत पेट्रोल गैस व डीज़ल की कीमत बढ़ने से हजारों आईटम की कीमत आसमान छूने लगीं। (हाँ खबरों में ज़रूर ये बात छाई रही कि कॉरोना आपदा में सरकार की तरफ़ से 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज़ देशवासियों के लिये दिया गया है)  इसी वजह से इस वक्त मौजूदा हालात में सम्पूर्ण लाक डाउन लगाने का मतलब है ज़बरदस्त आर्थिक तबाही का आना और ये विडम्बना ही है और दुविधापूर्ण हालात भी हैं कि कारोबार करने के लिये छूट देना जिसमें भीड़ से पूरी तरह गाईड लाईन का पालन कराना पासिबल नहीं है और रात का कर्फ़्यु लगाने का कोई फ़ायदा नहीं है क्योंकि उस वक्त 80 % आबादी अपने घरों में होती है। बाहर वैसे ही सन्नाटा होता है। और फिर रात का कर्फ़्यू इतना ही ज़रूरी है तो समय 10 बजे रात्रि से सुबह 6 बजे तक किया जाए क्योंकि मौसम के हिसाब से शाम की ही दुकानदारी होती है और 9 बजे से कर्फ़्यू का पालन करने के लिये 8 बजे दुकानों को बंद करना पड़ रहा है।जिससे कारोबारी दोनों तरफ से पिस रहा है। एनी वे ..... हम अपने लेख के माध्यम से ये कहना चाहेंगे कि इस बार हकीकत में कॉरोना खतरनाक है जिससे मरने वालों की तादाद बढ़ रही है। कॉरोना वायरस अपने खतरनाक मोड में आ चुका है हालात बहुत विस्फ़ोटक होते जा रहे हैं कब्रस्तान में शम्शान घाट में मरने वालों को भी आसानी से कब्र या चिता नहीं मिल पा रही है।

ज़िन्दगी में लाईन लगाना अपनी बारी के लिये टोकेन लेने तक तो ठीक था पर अब मरने के बाद भी ,चिता, के लिये टोकेन लेना पड़ रहा है और ,कब्र, के लिये इन्तेज़ार करना पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक इस आपदा में कोई देवीय चमत्कार ना हुआ तो करोड़ों लोग इसकी चपेट में आयेंगे। देवीय चमत्कार इसलिये क्योंकि जिस वैक्सीन के लिये हम सब इतने इन्तेज़ार में थे जिस वैक्सीन को हर देश से पहले बना कर हमने इतिहास रच लिया था  वो वैक्सीन की दोनों डोज़ ले लेने बाद भी लगवाने वाले संक्रमित होते जा रहे हैं। इस वक्त किसी पर आरोप प्रत्यारोप लगाने या दिलेरी दिखाने का समय नहीं है ज़रुरत है तो बहुत ज़्यादा एहतियात बरतने की। ज़रूरी ना हो तो ना ज़्यादा भीड़ लगायें, ना किसी भीड़ का हिस्सा बने, मास्क व सेनीटाइज़र का इस्तेमाल करें, तथा फ़िज़िकल डिस्टेन्स का पूरा पालन करें योगा घरेलू इलाज़ व काढ़ा प्रति दिन इस्तेमाल करें। हम इंसानो द्वारा कुदरत से बहुत ज़्यादा छेड़छाड़ करने के नतीजे में ये आपदा कुदरती है।जिसका इलाज़ अभी नहीं है। अपने अल्लाह से अपने भगवान से माफ़ी तलब करते हुए नेक काम करते हुए इस आपदा से लड़ें। यकीनन हम सब फिर कामयाब होंगे।

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