किसान संगठनों ने मनाया काला दिवस

◆ मोदी सरकार के सात साल, जनता हुई बेहाल मजदूर

गौतम बुध नगर। संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर मजदूर संगठन सीटू के कार्यकर्ताओं ने आज 26 मई को किसान आंदोलन को 6 महीने पूरे होने, सीटू की राष्ट्रीय हड़ताल के 6 महीने पूरे होने तथा  26 मई को मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, जन विरोधी, देश विरोधी भाजपा आरएसएस राज्य के 7 साल पूरे होने के अवसर को भारतीय जनतंत्र का काला दिवस के रूप में मनाया अनेकों संस्थानों में मजदूरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया तथा जनपद में अनेकों स्थानों पर सीटू कार्यकर्ताओं ने काला दिवस की मांगों के प्ले कार्ड के साथ विरोध प्रदर्शन किए गांव बरौला सेक्टर- 49 नोएडा शिव मंदिर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए। 

सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है देश के मजदूर- किसान, गरीब आम जनता के हालात बद से बदतर हो गए हैं सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ती महंगाई बेरोजगारी ने आज विकराल रूप ले लिया है यह सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है कोविड-19 रोकथाम की आड़ में जनवादी अधिकारों को कुचला जा रहा है आपदा में अवसर के नाम पर लाखों लोगों के रोजगार छीन गए हैं, वेतन कटौती की जा रही है, पेट्रोल डीजल व अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ाकर आम जनमानस का जीना दूभर कर दिया गया है प्रवासी मजदूरों को तो भूखे मरने के लिए मजबूर कर दिया गया है। और इसी महामारी के दरमियान किसान विरोधी कृषि कानून व मजदूर विरोधी लेबर कोड बनाए गए हैं। 

जिसके खिलाफ 6 माह से आंदोलन चल रहा है। सीटू जिला कार्यालय सेक्टर- 8, नोएडा पर विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिला महासचिव राम सागर ने बताया कि आज के हमारे विरोध प्रदर्शन की मुख्य मांग है कि दिहाड़ीदारो, रेहड़ी पटरी दुकानदार पथ विक्रेताओं, निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगार महिलाओं, रिक्शा, ऑटो चालको, असंगठित क्षेत्र के कामगार आदि लॉक डाउन से प्रभावित गरीब परिवारों को ₹7500 प्रति माह आर्थिक सहायता राशि व मुफ्त राशन दिया जाए* किसान विरोधी तीनों कृषि कानून व मजदूर विरोधी चारों श्रम कोड़ों को रद्द किए जाएं* एमएसपी की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए* निजीकरण कारपोरेटीकरण की नीति पर रोक लगाई जाए।  

कोई भी फैक्ट्री मालिक कोविड-19 की आड़ में औद्योगिक मजदूरों की वेतन कटौती, छंटनी ना करें इस बाबत तुरंत सरकारी आदेश जारी किए जाएं* राशन में चावल, आटा, दाल, तेल, नमक, चीनी, मसाले, चना, मास्क, सैनिटाइजर आदि जरूरी वस्तुओं को शामिल किया जाए तथा राशन व्यवस्था के दायरे में सभी को शामिल किया जाए* सभी कोरोना पीड़ितों को निशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए तथा सभी को जल्द से जल्द निशुल्क टीके लगवाने की व्यवस्था की जाए* कोराना की वजह से जिन परिवारों में मौत हुई है उन्हें तुरंत आर्थिक-सामाजिक मदद दी जाए हमारी दर्जनों मांगे हैं। 

अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानेगी तो मजदूर किसान संगठन एकजुट होकर और बड़े आंदोलन की ओर जाएंगे, पथ विक्रेता कर्मकार यूनियन की नेता पूनम देवी ने कहा कि महामारी की वजह से सबसे ज्यादा रेहड़ी-पटरी दुकानदार प्रभावित हुए हैं जिन्हें सरकार से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। जगह-जगह हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामसागर, मुकेश कुमार राघव, रामस्वारथ, विनोद कुमार, पूनम देवी, भरत डेंजर, हुकम सिंह, सुनील पंडित, राजकरण सिंह, विजय गुप्ता, पारस गुप्ता, हरकिशन सिंह, कंचन देवी, रिंकू कुमारी, रुखसार, रेखा, दीपांकर, नरेंद्र पांडे, मिथिलेश किसान नेता डॉक्टर रुपेश वर्माआदि ने किया।

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