खेल लिंग से नहीं स्टेमिना से तय होता है : धोनी

◆ बूस्ट के नए टीवीसी में महेंद्र सिंह धोनी के साथ युवा महिला एथलीट युवा लड़कियों को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा 

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 2 सितम्बर  2021, नई दिल्ली। भारत के सबसे भरोसेमंद हैल्थ फूड ड्रिंक ब्रांड्स में से एक, बूस्ट ने आज नया अभियान प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य लड़कियों एवं क्रिकेट के प्रति स्थापित रूढ़ियों को तोड़ना है। नए बूस्ट अभियान का उद्देश्य उन मानसिकताओं पर रोशनी डालना है, जो खेल, खासकर क्रिकेट खेलने के मामले में लड़कियों का दृष्टिकोण बनाती हैं। यह उन्हें अपनी पसंद का खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करता है। स्पोर्टिंग की ईवेंट्स में विजेता प्रदर्शन करने के बाद भी खेल के क्षेत्र में लड़कियों को पक्षपात का सामना करना पड़ता है और उनकी प्रतिभा व स्टेमिना को नजरंदाज कर दिया जाता है। भारत के लोकप्रिय खेल, क्रिकेट में भी लड़कियों को अनेक सामाजिक बाधाओं एवं पक्षपात का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण वो यह खेल नहीं खेल पाती हैं। बूस्ट का उद्देश्य अगली पीढ़ी के युवाओं को दृढ़ निश्चित बनाना और अपनी पसंद का खेल खेलने व उसमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। दृढ़ निश्चय, धैर्य एवं स्टेमिना के साथ हम अगली पीढ़ी के एथलीट्स को प्रोत्साहित कर सकेंगे। इस ब्रांड के पास विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों को प्रेरणा देने, उन्हें सही प्रोत्साहन व स्टेमिना प्रदान करने की समृद्ध विरासत है ताकि वो अपने सामने आने वाली चुनौतियों पर जीत हासिल कर सकें।

इस 360 डिग्री अभियान में एमएस धोनी के साथ युवा एथलीट एक खिलाड़ी में प्रतिभा एवं स्टेमिना के प्रभाव पर रोशनी डालेंगे। धोनी टेनिस कोर्ट में क्रिकेट खेलते हुए मुख्य किरदार को देखते हैं, जिसे देखकर वो आश्चर्यचकित रह जाते हैं। धोनी के साथ आए लड़के मजाक बनाते हुए कहते हैं कि क्रिकेट लड़कियों का खेल नहीं। इसके बाद वह युवा लड़की एक्शन में आ जाती है और बॉल हाथ में लेकर धोनी का विकेट गिरा देती है। इससे साबित होता है कि खेल लिंग से नहीं, बल्कि दृढ़ता, धैर्य एवं स्टेमिना से तय होता है। टेनिस कोर्ट में कड़ा संघर्ष देखने को मिलता है और वह फिल्म में अगले आयाम का अवसर हासिल करती है। एडवरटाईज़मेंट के अंत में धोनी और यह युवा लड़की बूस्ट पीते हुए दिखते हैं और ब्रांड की प्रतिष्ठित टैगलाईन ‘बूस्ट इज़ द सीक्रेट ऑफ अवर एनर्जी’ आती है।

इस अभियान से जुड़ने के बारे में ब्रांड एम्बेसडर, एमएस धोनी ने कहा, ‘‘मैं बूस्ट परिवार का हिस्सा बनकर बहुत उत्साहित हूँ। मैं इस ब्रांड से कई सालों से जुड़ा हुआ हूँ। युवा लड़कियां भी क्रिकेट खेलने का सपना देखती हैं। इसलिए उन्हें यह खेल खेलने से मना नहीं किया जाना चाहिए। बूस्ट लड़कियों को अपने सपनों के पीछे जाने और अपनी पसंद का यह खेल खेलने के लिए प्रेरित कर रहा है। मैं ब्रांड के इस विश्वास में यकीन रखता हूँ कि हमें हर बाधा का सामना दृढ़ता के साथ करना चाहिए और बूस्ट के साथ अपने सफर में मैं युवा खिलाड़ियों, खासकर लड़कियों को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आशान्वित हूँ।

कृष्णन सुंदरम, वाईस प्रेसिडेंट, न्यूट्रिशन श्रेणी, एचयूएल ने कहा, ‘‘बूस्ट ने बच्चों को अपनी स्टेमिना द्वारा कड़ी मेहनत करने, धैर्य रखने और बड़ी चुनौतियों पर विजय हासिल करने की प्रेरणा देने की अपनी विरासत को संजोकर रखा है। इस अभियान द्वारा हम प्रतिभा को लैंगिक धारणाओं से मुक्त करने के लिए बहस छेड़ना चाहते हैं। बूस्ट लड़कियों को अपनी प्रतिभा एवं स्टेमिना द्वारा पक्षपात को पीछे छोड़ अपनी पसंद का खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। यह अभियान बूस्ट के लिए क्रिकेट के खेल में लड़कियों का सहयोग करने के सफर की शुरुआत होगा।

जॉय चौहान, मैनेजिंग पार्टनर एवं सीनियर वीपी, वंडरमैन थॉम्पसन, दिल्ली ने कहा, ‘‘बूस्ट ने युवाओं की कई पीढ़ियों को पसीना बहाने और अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी है। जब आपमें लड़ने की स्टेमिना होती है, तब आपको बाधाएं बड़े उद्देश्य को पाने की सीढ़ियों के रूप में दिखाई देती हैं। यह अभियान न केवल युवाओं को प्रेरित करता है, बल्कि इसमें हममें से प्रत्येक को यह समझने की प्रेरणा देने की सामर्थ्य है कि प्रदर्शन पर लिंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस अभियान में बूस्ट एक लड़की को आवाज दे रहा है, जो एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और उसमें जोश व स्टेमिना कूट कूट कर भरी है। बूस्ट उसकी एनर्जी का भी सीक्रेट है।

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