अत्यंरत गंभीर रूप से बीमार हृदय रोगियों के लिए उम्मीदद की किरण

◆ फोर्टिस अस्पयताल, नोएडा में चमत्कामरी सर्जरी संपन्नय, कृत्रिम हृदय (LVAD)की मदद से एक मरीज़ ने अपने ही हृदय का किया उपचार

◆ भारत में अपनी तरह की पहली सर्जरी, दुनियाभर में इस तरह के गिने-चुने ऑपरेशन ही हुए हैं

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 6 अक्टूबर 2021, (ऐ के लाल) गौतम बुध नगर। फोर्टिस हार्ट एंड वास्युजरी लर इंस्टी्ट्यूट, नोएडा में चेयरमैन डॉ अजय कौल और चिकित्साट विशेषज्ञों की उनकी टीम ने यहां एक बेहद दुर्लभ किस्मप की सर्जरी को अंजाम दिया है। यहां इराक से इलाज के लिए आए 56 वर्षीय एक पुरुष मरीज़ के कृत्रिम हृदय(LVAD) को एक जटिल प्रक्रिया के बाद उस वक्तक निकाला गया जबकि उनका अपना हृदय पूरी तरह से दुरुस्तय हो चुका था (यह सर्जरी 2018 में की गई थी)। अब तक दुनियाभर में ऐसे मुट्ठभर मामले ही सामने आए हैं। फोर्टिस अस्पाताल नोडा ने भारत में अपनी तरह के इस पहले ऑपरेशन के जरिए मरीज़ को नया जीवनदान दिया है। 

यह मरीज़ जब इलाज के लिए अस्‍पताल आए थे तब उन्हें  टर्मिनल हार्ट फेलियर की शिकायत थी। उन्हेंब सांस लेने में काफी कठिनाई थी और वे स्वोयं नहाने जैसी साधारण गतिविधियों को भी दूसरों की मदद के बगैर नहीं कर पाते थे। चूंकि उनके मामले में कोई सर्जरी संभव नहीं थी, इसलिए उन्हें  हृदय प्रत्याेरोपण की सूची में रखा गया। इस बीच, डोनर के इंतज़ार में उनकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई और इतनी ज्याहदा गंभीर हो गई कि उन्हें  जिंदा रखने के लिए जीवनरक्षक मशीनों पर रखा गया। तब डॉक्टृरों ने उन्हेंग एलवीएडी यानी कृत्रिम हृदय लगाने का फैसला किया। 

डॉ अजय कौल, चेयरमैन, फोर्टिस हार्ट एंड वास्युयानीलर इंस्टीरट्यूट, नोएडा ने कहा, ''मरीज़ के शरीर में एलवीएडी को सही प्रकार से लगाने में डॉक्टनरों को सफलता मिली और मरीज़ ने पूरी तरह से स्वावस्य्ी  लाभ भी कर लिया। 2 सप्ताीह बाद उन्हेंल अस्प‍ताल से छुट्टी दे गई और जब वे फौलो अप के लिए आए तो यह पाया गया कि उनका हार्ट सपोर्ट सिस्टंम बिल्कु ल ठीक तरीके से काम कर रहा था। तब वह अपने देश लौट गए और उन्हेंो हर छह माह बाद जांच के लिए आने को कहा गया। मरीज़ का स्वादस्य् उ  कुल-मिलाकर ठीक-ठाक रहा लेकिन डेढ़ साल बाद उन्हेंु ड्राइवलाइन इंफेक्शीन हो गया। हमने उनका इलाज करने की कोशिश की और रूटीन चेकअप के दौरान यह पाया गया कि उनका हृदय पूरी तरह से दुरुस्ती हो चुका था।

उन्होंलने बताया, ''यह काफी असामान्य‍ है कि उनका हृदय पूरी तरह से ठीक हो चुका था। चूंकि अब यह स्वानस्य्ा   लाभ कर चुका था, हमने पंप की स्पीयड को काफी घटा दिया। उनका हृदय अभी तक भी ठी तरह से काम कर रहा था, लेकिन हमने पंप को सुरक्षित तरीके से चलते रहने दिया। हमने उन्हेंा फौलो-अप के लिए 6 माह बाद आने को कहा। हमने अगले एक साल तक उन पर पूरी नज़र रखी और हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनका हृदय बिना किसी सपोर्ट के भी ठीक तरह से चलता रहे। मरीज़ के साथ परामर्श के बाद मरीज़ का कृतित्र हृदय हटाने (explantation procedure) का फैसला लिया गया। इस प्रक्रिया को फोर्टिस अस्पउताल नोएडा में पूरा किया गया। यह अपनी तरह की अनूठी प्रक्रिया है जिसे भारत में पहली बार सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया और मरीज़ को 5 दिन बाद अस्तारत  ल से छुट्टी दे दी गई, वह अब ठीक हैं।

श्री मोहित सिंह, ज़ोनल डायरेक्टोर, फोर्टिस अस्पपताल नोएडा, ने कहा, ''कृत्रिम हृदय को मरीज़ के शरीर से निकालना की प्रक्रिया बेहद उल्लेोखनीय है। यह फोर्टिस अस्प्ताल नोएडा में पहली बार किया गया और अस्पीताल के हृदय रोग विशेषज्ञों ने डॉ अजय कौल के अनुभवी नेतृत्वए में 56 वर्षीय इराकी मरीज़ का सफल इलाज किया। मैं अस्पनताल के डॉक्टवरों की टीम की क्लीकनिकल उत्कृजष्टजता के लिए उनकी प्रतिबद्धता तथा मरीज़ों की देखभाल सुनिश्चित करते हुए फोर्टिस नोएडा को कार्डियाक साइंसेज़ में उत्कृतष्टक केंद्र का दर्जा दिलाने में उनके योगदान की सराहना करता हूं।

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