अहिंसा परमो धर्म पर गोष्ठी सम्पन्न

◆ शराब बाड़े नहीं अपितु शराब बन्दी लागू करो : राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

◆ मन वचन कर्म से कष्ट न देना ही धर्म है : अनिता रेलन

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 29 दिसंबर  2021, गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "अहिंसा परमो धर्म" पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल में 333 वाँ वेबिनार था। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने बढ़ती शराब की दुकानों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दूध,घी के देश में बढ़ते शराब बाड़े सभ्य समाज पर कलंक है।हम नयी पीढ़ी को विरासत में क्या देकर जा रहे है,नशा नाश करके रख देगा इससे अपराध और अधिक बढेंगे।जबकि शिक्षा मंदिर खुलने चाहिए युवाओं का चरित्र निर्माण,नैतिक शिक्षा व पुरातन गौरव शाली भारतीय संस्कृति की जानकारी दी जानी चाहिए थी पर उन्हें नशे के समुद्र में बर्बादी के लिए धकेला जा रहा है।केन्द्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि देश हित में हस्तक्षेप कर समय रहते शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाये अन्यथा जब देश की युवा शक्ति ही खोखला हो गई तो देश का भविष्य अंधकार मय हो जायेगा।दिल्ली सरकार की शराब की नीतियां धन के लिए युवकों को बर्बाद करने वाली है जिसके दूरगामी परिणाम घातक होंगे, जैसा बोयेंगे तो वैसा ही तो काटेंगे फिर बाद में पछताने से कुछ हाथ नहीं लगेगा।

मुख्य वक्ता अनिता रेलन ने अहिंसा परमो धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन वचन कर्म से किसी को कष्ट देना हिंसा है।इस सृष्टि का सनातन सत्य यही है कि अहिंसा ही सबसे श्रेष्ठ धर्म है,सामान्य अर्थों में किसी से हिंसा ना करना तथा व्यापक अर्थ में कुछ इस तरीके से कहेंगे किसी भी प्राणी से मन वचन कर्म से नुकसान ना पहुंचाना अहिंसा है अहिंसा समस्त हिंसकवृत्तियों काम,क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार का त्याग है जिससे रोग,शोक,वैरभाव वृत्तियों का निरोध होता है जिससे शरीर निरोगी बनता है मन में शांति और आनंद का वास होता है।वेदों में उपनिषदों में धार्मिक ग्रंथों में रामायण हो या महाभारत गीता हो या भागवत सभी में अहिंसा को सर्वश्रेष्ठ धर्म बताया है। 

युगपुरुष शांति के अग्रदूत महानता के परिचायक सत्य अहिंसा के पुजारी गांधी जी ने तो अहिंसा के बल पर अंग्रेज सरकार को झुका दिया था।अहिंसा में संहार नहीं निर्माण की शक्ति है।  देवत्व का फल है।अपनत्व की भावना जिससे बलवती होती है। किंतु आत्मरक्षा राष्ट्र रक्षा धर्म रक्षा का सवाल जब उठता है तो उस वक्त उस बचाव में की गई हिंसा अहिंसा की श्रेणी में आती है। 

अहिंसा वेदव्यास जी के शब्दों में परम यज्ञ है वह,परम तप है,परम सत्य है तो वही महर्षि पतंजलि अहिंसा के बिना योग संभव नहीं बताते हैं यम पांच है और अहिंसा उस में प्रथम सीढ़ी है जहां हिंसा नकारात्मकता का  प्रतीक है वही अहिंसा सकारात्मकता का प्रतीक है हालांकि आज के परिवेश  को देखते हुए  यह समझना होगा कि हिंसा से कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री विनिता खन्ना व अध्यक्ष प्रेम लता सरीन ने भी अहिंसा को मानव धर्म बताया‌। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने भी नई शराब नीति की आलोचना करते हुए युवकों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्ण शराब बंदी की मांग की। गायिका दीप्ति सपरा,सावित्री गुप्ता,रजनी गर्ग,ईश्वर देवी, रचना वर्मा,आशा शर्मा,सुशांता अरोड़ा, रविन्द्र गुप्ता, अशोक गुगलानी आदि के मधुर भजन हुए।

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