वित्त वर्ष खत्म होने के पहले स्मार्ट निवेश करने और कर बचाने के तरीके : ज्योति रॉय

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 7 अप्रैल 2022, नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 समाप्त होने के करीब है और वित्त से संबंधित कई चीजों का पुनर्मूल्यांकन करने का यह उचित समय होता है। आपको कटौतियों का दावा करने, टैक्स बचाने और शुद्ध लाभों को  बढ़ाने के तरीकों पर गौर करना होगा। चूँकि कुछ ही दिनों के बाद इन सारे कार्यों के लिए समय सीमा समाप्त होने वाली है, इसलिए आपको अपने वित्त को यथासंभव कुशलता से प्रबंधित करने के अपने प्रयासों को दोगुना करना होगा। आयकर कटौती का दावा करने के लिए आपको 31 मार्च तक अपना कर-बचत संबंधी निवेश करना होगा। आदर्श रूप से साल की शुरुआत में टैक्स प्लानिंग करना सबसे अच्छा होता है ताकि अंत में जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने को मजबूर नहीं होना पड़े। अगर आप वित्त वर्ष की शुरुआत में ही कर-बचत संबंधी निवेश की योजना बना लेते हैं तो अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त निवेश और बचत उत्पादों का चयन करने में आपको आसानी होगी। इस प्रकार निवेश से सम्बंधित सारे खर्चे एक ही महीने में नहीं करके पड़ते और आपको साल के अंतिम एक महीने में अपने वित्त पर दबाव से बचने में मदद मिलती है। हालाँकि, अगर आपने पूरे साल निवेश नहीं किया है, तो कुछ तरकीबें और निवेश आपकी मदद कर सकते हैं। सबसे पहले, आपको वर्ष के लिए अपनी आय का आंकलन करना होगा। यह आपको कर बचत से जुड़े विपत्रों में निवेश करने के लिए आवश्यक राशि का पता लगाने में मदद करेगा। अगला कदम आपकी बड़ी खरीदारी के सभी दस्तावेजों को एकत्र करना है, जिन्हें वर्ष के दौरान निवेश के रूप में गिना जा सकता है। इसके बाद गणना करें कि आपको और कितने निवेश की जरूरत है। एक बार आपके पास आँकड़े जमा हो जाएँ तो आप यहाँ दी गई निम्‍नलिखित निवेश और कर बचाने तरकीबें इस्तेमाल कर सकते हैं :

एनपीएस और पीपीएफ में करें योगदान

बचत करते समय कर लाभ का दावा करने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) और लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) में अंशदान करना सबसे आम और सरल तरीका है। पीपीएफ कर मुक्त ब्याज और 1.5 लाख रुपये की वार्षिक कटौती का दोहरा लाभ प्रदान करता है। एनपीएस एक पेंशन योजना है जहाँ आप धारा 80सीसीडी(1), 80सीसीडी(2), और 80सीसीडी(1बी) के माध्यम से लगभग 2 लाख रुपये के कर लाभ का दावा कर सकते हैं।

1 लाख रुपये के स्टॉक निवेश पर टैक्स की बचत, एक लंबी अवधि के निवेशक के रूप में, आप मुनाफा निकाले जाने के पक्ष में नहीं हो सकते हैं।

हालाँकि, आपको यह भी पता होना चाहिए कि आपके दीर्घकालिक पूँजीगत लाभ पर कर लगाया जाएगा यदि वह 1 लाख रुपये से अधिक हैं। कहने का मतलब यह है कि यदि आप एलटीसीजी में 1 लाख रुपये की सीमा पर हैं तो अभी मुनाफा निकाल लें। एक लाख रुपये की सीमा से नीचे मुनाफा बुक करना एक बुद्धिमान कदम है और आप इससे कर बचत कर सकते हैं। आप अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत में शेयरों को वापस खरीद सकते हैं।

स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम

टैक्स बचाने के सबसे आसान साधनों में से एक है स्वास्थ्य और जीवन बीमा। आपकी चिकित्सा देखभाल को कवर करने वाली पॉलिसियों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान की राशि कर-कटौती योग्य है। यह आपकी कर योग्य आय में कमी लाता है, जिससे कर देयता कम होती है। यदि आप माता-पिता की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और पति या पत्नी और बच्चों के लिए भुगतान करने वाले परिवार में एकमात्र कमाने वाले हैं, तो आप आयकर अधिनियम की धारा 80 डी के तहत कटौती के योग्य हैं। आपको स्वयं, जीवनसाथी और आश्रित बच्चों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 25,000 रुपये तक की कर कटौती का दावा करने की अनुमति है। यदि आप आश्रित माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का भुगतान करते हैं, और वे वरिष्ठ नागरिक नहीं हैं तो आप 25,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती के लिए योग्य हैं। यदि आपके माता-पिता में से कोई एक या दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं, तो यह सीमा 50,000 रुपये तक बढ़ जाती है। प्रभावी रूप से, कोई व्यक्ति स्वयं और माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने पर कर कटौती में 75,000 रुपये तक की छूट का दावा कर सकता है। इसी तरह, जीवन बीमा लेने से आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के तहत कर लाभ मिलता है। एक व्यक्ति जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के बदले प्रति वर्ष 1,50,000 रुपये तक का दावा कर सकता है। स्वयं, जीवनसाथी या बच्चों के लिए प्लान के प्रीमियम पर टैक्स बचाया जा सकता है।

गृह ऋण 

मान लीजिए आपने गृह ऋण (होम लोन) लिया है और अब लोन की राशि को ब्याज सहित चुका रहे हैं। उस स्थिति में, आपको पता होना चाहिए कि आप धारा 80सी के तहत मूलधन पुनर्भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक और धारा 24B के तहत ब्याज पुनर्भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की कर कटौती के पात्र हैं। हालाँकि, टैक्स बचाने के लिए ये कुछ तरीके हैं लेकिन अगर आपका कोई टैक्स रिटर्न लंबित है तो उसकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। लंबित रिटर्न को दायक करना ज़रूरी है क्योंकि अंतिम तारीख में चूक का मतलब केवल अरितिक्त जुर्माना भरना ही होता है।जिसे दाखिल करने की आवश्यकता है क्योंकि समय सीमा के पार जाना कभी भी अच्छा विचार नहीं हो सकता है और इसका मतलब केवल एक अतिरिक्त जुर्माना है। चेकलिस्ट का पालन करें और जितना भी हो सके उतना बचत अवश्य करें। अगले साल के लिए, आगे की योजना बनाएं।

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