जल दोहन उत्तरप्रदेश 2019 एक्ट में सजा का हैँ प्रावधान

 

शब्दवाणी समाचार, सोमवार 12 जून 2022(लेख हरीओम, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग) लखनऊ। भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम 2019 के लागू होने के उपरांत पूरे उत्तर प्रदेश में जितने भी नलकूप, बोरवेल (बोरिंग) एवं सब्मर्सिबल पम्प है। चाहे वह कृषि से संबंधित हो या घरेलू हो या फिर उद्योगों से संबंधित हो उन सभी का पंजीकरण कराना अनिवार्य हो गया है। और उद्योगों से संबंधित बोरवेल कि पहले एन.ओ.सी. लेनी होगी, उसके बाद ही पंजीकरण होगा। पंजीकरण एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र (एन.ओ.सी) का प्रक्रम भूगर्भ जल विभाग के वेब पोर्टल (http://www.upgwdonline.in) द्वारा पूर्ण होगा जितने भी कृषि या घरेलू उपयोग से संबंधित बोरवेल हैं।

उनका पंजीकरण भूगर्भ जल विभाग के वेब पोर्टल (http://www.upgwdonline.in) पर ऑनलाइन आवेदन के द्वारा होगा एवं जितने बोरवेल उद्योग से संबंधित हैं। उनके लिए एन.ओ.सी. एवं पंजीकरण हेतु आवेदन निवेश मित्र (https://niveshmitra.up.nic.in) की वेबसाइट से होगा। सभी बोरवेल या नलकूप का पंजीकरण कराना होगा, और पानी के कमर्शियल यूजर को एन.ओ.सी. लेनी होगी, अन्यथा उनका बोरवेल अति शीघ्र बंद हो जाएगा, और उनके खिलाफ कार्यवाही भी होगी। जो भी छोटे या बड़े आर.ओ. प्लांट हैं, जो पानी को घरों-घरों या दुकानों-दुकानों में बोतलों में बेचते हैं। उन सभी विक्रेताओं से भी आग्रह है, कि जल्दी से जल्दी अपने यहां के बोरवेल का पंजीकरण कराएं एवं एन.ओ.सी. ले। अन्यथा उत्तरप्रदेश 2019 एक्ट में सजा का भी प्रावधान है। ओर बिना पंजीकरण ओर एन.ओ.सी. के अबैध मान्य होगा। जैसे- पशु कट्टी घर, कारकस डिस्पोजल प्लांट, आर.ओ. प्लांट, वाहन धोने वाले दुकानदार, कमर्शियल फैक्ट्री और उपभोक्ता को जल दोहन का दोषी माना जायेगा।

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