विटिलिगो पर होमियोपैथी की सहायता से इलाज संभव

◆ 20 से 25 वर्षीय आयु वर्ग के लोगों में सबसे ज्यादा मामले

◆ विटिलिगो, सोरायसिस, डायबिटीज़ और थायरॉइड के बीच मजबूत संबंध

शब्दवाणी समाचार, रविवार 26 जून 2022, नई दिल्ली। मुंबई। विटिलिगो यानी सफेद दाग एक ग़ैर-संक्रामक त्वचा की बीमारी है जिसमें पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर सफेद रंग के धब्बे या चकत्ते उभर जाते हैं। आमतौर पर यह दाग चेहरे, पैर, बांह का आगे का हिस्सा (कोहनी तक) और हाथों में दिखाई देते हैं। भारत की करीब 2-5% आबादी सफेद दाग की बीमारी से पीड़ित है। डॉ. बत्राज़ समूह के साथ काम कर रहे डॉक्टरों ने यह देखा है कि 20 से 25 वर्षीय आयु वर्ग के लोगों में सफेद दाग के मामले अधिक पाए जाते हैं।

चिकित्सकीय संसाधनों की कमी और महंगे इलाज के कारण बड़ी संख्या में मरीज़ों को बिना उपचार के रहना पड़ता है। इतना ही नहीं, सफेद दाग जैसी त्वचा की बीमारी के साथ जुड़े सामाजिक कलंक से मरीज़ के शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़ता है। लोगों की ऐसी धारणा है कि इस बीमारी से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि होमियोपैथी की सहायता से इसके इलाज की उम्मीद है और इसे ठीक किया जा सकता है। सफेद दाग का उपचार करने के लिए होमियोपैथी एक सुरक्षित, सौम्य और प्रभावी तरीका है।

पद्मश्री से सम्मानित एवं डॉ. बत्राज़ ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के संस्थापक, प्रख्यात होमियोपैथी चिकित्सक डॉ. मुकेश बत्रा का कहना है कि थायरॉइड, सोरायसिस और डायबिटीज़ जैसी ऑटो इम्यून (स्व-प्रतिरक्षा) बीमारियों एवं सफेद दाग की बीमारी के बीच मज़बूत संबंध है। उन्होंने आगे बताया कि डॉ. बत्राज़ हेल्थकेयर में उपचार किए गए सफेद दाग मरीज़ों की संख्या 24,047 है। इनमें से 3,143 मरीज़ थायरॉइड रोग, सोरायसिस और डायबिटीज़ जैसी ऑटो इम्यून (स्व-प्रतिरक्षा) बीमारियों से पीड़ित थे। इसके साथ ही डॉ. बत्राज़ समूह के साथ काम कर रहे डॉक्टरों ने यह देखा है कि 20 से 25 वर्षीय आयु वर्ग के लोगों में सफेद दाग के मामले अधिक पाए जाते हैं। प्राकृतिक होमियोपैथी उपचार की सहायता से डॉ. बत्राज़ हेल्थकेयर ने सफेद दाग से पीड़ित 24,050 मरीज़ों को एक नई उम्मीद की किरण दी है। होमियोपैथी दवाइयों से उपचार किए गए सफेद दाग के मरीज़ अब एक सामान्य जीवन जी रहे हैं, जहां उन्हें लोगों का प्यार और जीवन में नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

डॉ. मुकेश बत्रा ने आगे कहा कि, “मेरे 50 वर्षों के होमियोपैथी के करियर में मैंने यह देखा है कि सामान्य तौर पर विटिलिगो यानी सफेद दाग के बारे में सबसे ज़्यादा गलतफहमियां हैं। सबसे आम गलतफहमी यह है कि सफेद दाग संक्रामक है, जबकि यह सही नहीं है। सफेद दाग इतना अप्रत्याशित हो सकता है एक मरीज़ को अचानक अगले दिन नए सफेद धब्बे दिखाई दे सकते हैं या त्वचा पर पिछले सफेद धब्बों के आकार बड़े हो सकते हैं।

गलतफहमियों के बारे में बात करते हुए डॉ. बत्रा ने यह भी कहा कि, “सफेद दाग के कई कारण हो सकते हैं जैसे पारिवारिक इतिहास, स्व-प्रतिरक्षा रोग (ऑटो इम्यून रोग), अत्यधिक तनाव और जेनेटिक म्यूटेशन। तनाव और चिंता मरीज़ को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं और सफेद दाग को और अधिक बढ़ा सकते हैं। हालांकि सफेद दाग के लिए होमियोपैथी उपचार लक्षणों और मरीज़ के रोज़मर्रा के जीवन में इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर काम करते हैं। सफेद दाग पर होमियोपैथी का उपचार इसे दबाने का काम नहीं करता बल्कि एक बेहद प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी तरीके से त्वचा का प्राकृतिक रंग दोबारा लौटाने की शुरूआत करता है।

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