पीआईडी क्या होता है और यह कैसे महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित करता : डॉ चंचल शर्मा



शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 7 जून 2022महिलाओं में होने वाली एक ऐसी बीमारी है। जिसका अगर समय पर डायग्नोसिस नही कराया और फिर समय से उपचार भी नही कराया तो यह आपकी प्रेगनेंसी को प्रभावित करती है। पीआईडी का पूरा नाम पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज है। क्या होती है पीआइडी ? यह बीमारी महिला के प्रजनन अंगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। क्योंकि इसके उत्पन्न होने की वजह बैक्टीरिया होता है। यह बैक्टीरिया संबंध बनाने के दौरान पुरुषों के द्वारा महिलाओं में प्रवेश कर जाता है। इस बीमारी को गर्भाशय संक्रमण के नाम से भी जानते हैं। यदि इसकी सही समय पर पहचान न हो सकी तो यह महिलाओं के जीवन के लिए खतरा भी बन सकता है। पीआइडी से संक्रमित महिला में किस प्रकार के लक्षण होते है। जो इस बात कि पुष्टि करते है। कि महिला पीआईडी संक्रमण से प्रभावित है

पीआइडी के कुछ खास लक्षण है। जिसके आधार पर पीआईडी की पहचान की जा सकती है। जैसे महिला की योनि में जलन होना, योनि में संक्रमण यह एक सामान्य संकेत है। जो पीआईडी वाली महिलाओं में डॉक्टरों को अक्सर देखने को मिलते है। लगातार वजाइनल डिस्चार्ज के कारण भी महिलाओं की योनि में खुजली की समस्या हो जाती है। वह भी पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज का लक्षण है। महिलाओं के पेट के निचले भाग में तेजी के साथ दर्द होता है। यह दर्द कुछ देर के लिए भी हो सकता है। और कभी-कभी लगातार भी बना रह सकता है। यह ऐसा इसलिए होता है कि हर महिला के शरीर की प्रकति भिन्न-भिन्न होती है। पेल्विक एरिया में सूजन व ज्यादा ब्लीडिंग भी पीआईडी का लक्षण है। अनियमित पीरियड्स भी पीआईडी के लक्षण हो सकते हैं। हल्का बुखार भी कई बार पीआईडी का लक्षण बन सकता है। सेक्सुअल इंटर कोर्स के बाद ब्लीडिंग भी पीआईडी का कारण बनता है। यदि किसी महिला के साथ इस तरह की समस्या है। तो आपको जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

क्या आयुर्वेद से पीआईडी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता

जी हाँ, बिल्कुल आयुर्वेद से आप पीआईडी जैसे गंभीर यौन संक्रमण जैसी समस्या से छुटकारा पा सकती है। और खुद की इस बीमारी से दूर कर सकती हैं। आयुर्वेद योनि संक्रमण के लिए बहुत ही विशेष चिकित्सा का प्रावधान है। जिसे यौनि धूपम कहते है। यह इस विशिष्ठ चिकित्सा पद्धति है। जिसका प्रयोग केवल पेल्विक अंगों के संक्रमण को दूर करने के लिए किया जाता है। यह चिकित्सा पद्धति महिलाओं की योनि में पनप रहें बैक्टीरियां को आयुर्वेदिक औषधियों की धुनी के माध्यम से जड़ से खत्म कर दिया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का लाभ तत्काल प्रभाव से लागू होता है। और प्रभावित महिला का इसका बहुत ही अच्छा लाभ प्राप्त होता है। परंतु इस चिकित्सा पद्धति का प्रयोग बिना डॉक्टरी सलाह के नही करना चाहिए और किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करवाना चाहिए। महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी यह खास जानकारी आशा आयुर्वेदा की इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ चंचल शर्मा से प्रेसवार्ता के दौरान  प्राप्त हुई है।

Comments

Popular posts from this blog

सरकारी योजनाओं से संबंधित डाटा ढूंढना होगा अब आसान

शब्दवाणी समाचार पाठक संघ के सदस्यों का भव्य स्वागत हुआ और अब सबको मिलेगी एक समान शिक्षा का लांच

उप श्रम आयुक्त द्वारा लिखित में मांगों पर सहमति दिए जाने के बाद ट्रेड यूनियनों ने समाप्त किया धरन : गंगेश्वर दत्त शर्मा