आजादी का 75वाँ अमृत महोत्सव पर स्त्री शक्ति का सम्मान

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 11 अगस्त 2022, नई दिल्ली। स्त्री शक्ति का सम्मान ये ऐसे शब्द हैं, जो महावाक्य जैसे लगते है और सभी भारतीयों को गौरवान्वित करते है। और इन महावाक्यों को साकार रूद्र दिया, ‘‘3 अगस्त को कंस्टीट्यूशन क्लब आॅफ इण्डिया में’’ ‘‘स्त्री शक्ति ने’’ जहां अपने नारी स्वतन्त्रता को जाना जहां एक दो नहीं बहुमूलय नारी विभूतियाँ का समागत हुआ जो अपने आने क्षेत्र में बहुमुखी प्रतिमा सम्पन्न हैं। आजादी के अमृत महोत्सव पर सभ्ज्ञी सम्मानित विभूतियों ने अपने विचारों का उदगार किया। स्त्री शक्ति और आजादी दोने के बारे में विचार ही नहीं वरन बहुत सशक्त और सटीक तरीके से अपने व्यक्त्वि को प्रस्तुत किया। एमपी श्रीमती सुनीता दुगल जी ने कहा कि अगली पीढ़ी तक आते-आते स्त्री शक्ति को सशक्त नहीं वरन सर्वत्र सशक्त स्त्री शक्ति को देखना चाहती हूं।

मुख्य अतिथि - सुनीता दुग्गल (संसद सदस्य (लोकसभा), हरियाणा), राखी गुप्ता भंडारी (आईएएस- प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर, पंजाब सरकार, पंजाब भवन नई दिल्ली। सम्मानित अतिथि - योगिता सिंह - अध्यक्ष (महिला मोर्चा दिल्ली बीजेपी), गुरु डॉ शोवना नारायण- (पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता), निशि सिंह- संस्थापक: (एनएएडी फाउंडेशन), अरुणा ओसवाल-अध्यक्ष: (अभय ओसवाल समूह और अरुणा अभय ओसवाल ट्रस्ट), रेखा गुप्ता (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: भाजपा महिला मोर्चा), डॉ तनु जैन (आईएएस-सहायक निदेशक: डीआरडीआ), डॉ. शिवांगी मलेथिया (मोटिवेशनल स्पीकर), वर्षा गोयल (चेयरपर्सन आस फाउंडेशन जनरल सेक्रेटरी: संचालिका)। 

वहीं शिवांगी मलीढिया जी ने स्त्रीयों को क्वीन कहा कि स्त्री देखने में कैसी भी क्यों न हो पर अन्दर से सभी स्त्रीयाँ क्वीन हैं। रेखा गुप्ता जी ने बहुत अच्छे वाक्य स्त्री शान में कहे। रेनु हुसैन जी ने नारी स्वतंत्रता के लिये कविता पाठ किया। परिधि शर्मा जी ने खादी को हमारी देख की जड़ों से जोड़कर बताया। वहीं महान विभूति शोभना नारायण जी ने स्त्रीयों की स्वतंत्रता के बारे में बहुत अच्छी कविता कही। नीशी सिंह जी ने नारी स्वतंत्रता के लिय कहा कि नारी को सन्तुलन की जरूरत है। और बता भी सही है नारी को पुरानी अच्छी मान्यताओं और नयी आजादी के बीच में संतुलन रख कर आगे बढ़ना चाहिये। स्त्री जो वर्षों से झील में कमल पुष्प समान अनेकों थपेड़ों को सहकर भी कीचड़ से अपने को झील का कीचड़, यानी की दुनिा का कीचड़ बचाकर भी आंचल उडोल खड़ी रखती है। वहीं स्त्री पूरा परिवार, समाज देश बनाती है पर अपनी शक्तियों को नहीं पहचानती। उनकी शक्तियों की पहचान कराना ही हमारी संस्था ‘‘स्त्री शक्ति’’ का उदेश्य है। हम केवल भारती ही नहीं वरन पूरी दुनिया की स्त्रीयों के साथ है। उनका विकास करने और आगे बढ़ाने में हमेशा तत्पर है।

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