मृत्यु शाश्वत वह सत्य है : अनिल आर्य

शब्दवाणी समाचार, सोमवार 29 अगस्त 2022गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "मृत्यु मीमांसा" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कोरोना काल का 435 वां वेबिनार था। वैदिक विदुषी विमलेश बंसल दर्शनाचार्य ने कहा - मृत्यु क्या?क्यों?कैसे?,किस तरह जीव की गति होती है,क्या मृत्यु निश्चित है?,क्या सब जीवों की समान एक समय पर मृत्यु होती है?, क्या पुनर्जन्म होता है?,क्या व्यक्ति १२ दिन के बाद जन्म लेता है?,क्या मरकर जीव भूत प्रेत बन जाता है?,जीव के कौन से वे कर्म जो मनुष्य पशु पक्षी इत्यादि का जन्म दिलाते हैं?,अनुशयी जीव कब तक परमात्मा की व्यवस्था में रहता है?,इत्यादि प्रश्नों का समाधान प्रमाणों तर्को व युक्ति के आधार पर रखा तथा मृत्यु के पार कैसे जाया जाए?विषय को आगे बढ़ाते हुए अत्यंत सरलता से वेदमंत्रों द्वारा उपाय भी बताए।

उन्होंने आगे कहा कि तीन सत्ताएं अनादि हैं ईश्वर,जीव और प्रकृति, ईश्वर प्रकृति से जीवात्मा के लिए संसार की रचना करता है।प्रकृति सत्य है,जीवात्मा सत्य के साथ चेतन भी है,परमात्मा सत्य,चेतन और आनंद का अथाह भंडार है।अनादि सत्ताओं का विनाश नहीं होता।आत्मा और शरीर का संयोग जन्म और वियोग मृत्यु है,जीव कर्म करने में स्वतंत्र है, फल परमात्मा के अधीन है,अच्छे कर्म का अच्छा और बुरे कर्म का फल बुरा मिलना तय है,अतः हमें शुभ कर्म परोपकार,यज्ञ,दान आदि ही करने चाहिएं।जिससे हमें मनुष्य जन्म के चरमोत्कर्ष लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति भी कालांतर में हो सके।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने संचालन करते हुए कहा कि मृत्यु शाश्वत वह सत्य है पर हमें खुशी व प्रसन्नता से जीना चाहिए। जीवन जियो तो ऐसा की मृत्यु भी त्यौहार बन जाये। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री शकुंतला नागिया व अध्यक्ष चन्द्र कांता आर्या ने भी अपने विचार रखे। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि हम योग द्वारा मृत्यु को सुगम बना सकते हैं। गायिका रजनी गर्ग,रजनी चुघ, ईश्वर देवी,सुनीता अरोड़ा, कौशल्या अरोड़ा,कमला हंस, जनक अरोड़ा,संध्या पाण्डेय, कमलेश चांदना, शोभा बत्रा, सुदर्शन चौधरी,प्रवीना ठक्कर आदि के मधुर भजन हुए।


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