आवश्यक न हो तो घर से न निकलें : डा. सुनील रहेजा

 

शब्दवाणी समाचार, रविवार 23 अक्टूबर 2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में दीपावली विशेष "वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य" पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह करोना काल में 459 वां वेबिनार था। मुख्य वक्ता डा.सुनील रहेजा(एम एस जी बी पंत अस्पताल) ने वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए बताया कि दीपावली उत्साह और खुशियों का पर्व है जिसकी सभी लोगों को पूरे वर्ष प्रतीक्षा रहती है।भारत में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वह बोले वायु प्रदूषण 50 से 100 तक संतोष जनक है,लेकिन सुबह और शाम को 100 से ऊपर रहता है जो कि हानिकारक है। इन सबके बीच हम सभी को हमेशा अपनी सेहत को लेकर ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है।मिठाइयों के अधिक सेवन से डायबिटीज और मोटापे की समस्या होने का जोखिम रहता है,वहीं दीपावली में पटाखों के जलाने से होने वाला प्रदूषण भी सेहत के लिए भी कई प्रकार की चुनौतियां खड़ी कर सकता है।पटाखों को जलाने से होने वाला प्रदूषण कई प्रकार से हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।इससे सिर्फ फेफड़े ही नहीं हृदय,आंखों और कई अन्य अंगों की समस्याओं के बढ़ने का भी खतरा हो सकता है। जिन लोगों को पहले से ही सांस की समस्या है,उनके लिए मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं।इस बात को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने की पहल करनी चाहिए।

प्रदूषण का कारण सांस की समस्याएंपटाखों को जलाने के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। राजधानी दिल्ली में हर वर्ष इसका प्रभाव देखने को मिलता रहा है।यह वायु गुणवत्ता को बिगाड़ देती है जिससे इस प्रकार की हवा में सांस लेने से कई प्रकार की सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी का भी खतरा हो सकता है।इस प्रकार का वातावरण पहले से ही अस्थमा के शिकार लोगों की समस्याओं को टारगेट कर सकता है।दीर्घकालिक तौर पर प्रदूषण के कारण फेफड़ों की क्षति का भी जोखिम रहता है।आंखों की समस्याएं वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण आंखों में जलन, खुजली,लालिमा जैसी समस्याएं होने लगती हैं।यह समस्या स्मॉग में जहरीले नाइट्रोजन ऑक्साइड की उच्च सांद्रता का परिणाम होता है।अध्ययनों में पाया गया है कि प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में समय के साथ कंजंक्टिवाइटिस, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद और एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (एएमडी) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।प्रदूषण की यह समस्या आंखों की रोशनी जाने का भी कारण बन सकती है,इससे विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। दीपावली के बाद नाक और गले की संवेदनशील परत में जलन भी बढ़ सकती है।ऐसे में आवश्यक है कि दीपावली आने से पहले आप अपने इम्युनिटी और फेफड़ों के स्वास्थ्य को बूस्ट करने के लिए जरूरी उपायों को ककरलें।गुनगुना पानी पिएं,गरारे करें।पर्याप्त पानी पीना फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। शरीर में पानी की कमी अंदरूनी अंगों को कमजोर करने का काम करती है।ऐसे में पूरे दिन तरल पदार्थों का सेवन करें।ऐसा करने से आपको फेफड़ों में म्यूकोसल लाइनिंग को बनाए रखने में मदद मिलती है और इससे फेफड़े बेहतर ढंग से काम करते हैं।हेल्दी और संतुलित आहार आपके पूरे स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। ऐसे में फेफड़ों और शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने के लिए ऐसे भोजन का चयन करें जो विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर हो।यह प्रदूषण उच्च स्तर के दौरान आपको स्वस्थ्य रखने का काम कर सकता है।जरूरी ना हो तो घर से बाहर ना निकलें,निकलना भी पढ़े तो मास्क लगाकर निकलें।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि हम छोटी छोटी सावधानियों को रखने से दीपावली आनन्द पूर्वक मना सकते है। मुख्य अतिथि आर्य नेता राजेश मेंहदीरत्ता व अध्यक्षा डॉ.अनुराधा आनन्द ने भी वेद मंत्रों के साथ वायु शुद्धि करण की महत्ता पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय मंत्री योगी प्रवीण आर्य ने कहा कि दीपावली के प्रदूषण से तीन चार दिन सुबह और शाम सैर पर ना जाएं,प्राणायाम ना करें प्रातः सायं के स्थान पर दिन में 10 बजे से 4 बजे तक उक्त क्रिया को कर सकते हैं,क्योंकि दिन में वायु पॉल्यूशन कम होता है। गायिका प्रवीणा ठक्कर, पिंकी आर्या, कौशल्या अरोड़ा, सुनीता अरोड़ा, कमलेश चांदना,जनक अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया, कमला हंस,विजय खुल्लर, ईश्वर देवी, कुसुम भण्डारी, अनिता रेलन,बिंदु मदान, रविन्द्र गुप्ता,संतोष प्रयागराज,शोभा बत्रा, सुदर्शन चौधरी आदि के मधुर भजन हुए।

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