बच्चों को सुविधाएं नहीं अपितु संस्कार दीजिए : योगाचार्या श्रुति सेतिया

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 8 नवम्बर  2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "बच्चों के जीवन में संस्कारों का महत्व " विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह करोना काल में 464 वां वेबिनार था। मुख्य वक्ता योगाचार्या श्रुति सेतिया ने कहा कि बच्चों को सुविधाए नहीं अपितु संस्कार दीजिए तभी आपके परिवार व राष्ट्र का भविष्य उज्जवल होगा।उन्होंने कहा कि वेदों में मां का स्थान प्रथम शिक्षक के रूप में बताया गया है।आचार्य देवो भव से पहले मातृ देवो भव की घोषणा की गई है।आचार्य कुल जाने से पूर्व मां ही आचार्य और शिक्षक का कार्य करती है।बच्चों को संस्कारित करना मां का ही प्रथम कर्तव्य है।बच्चों को सुविधाएं देना आवश्यक है, लेकिन केवल सुविधाएं देना हानिकारक सिद्ध हो रहा है। आजकल अधिकांश परिवारों में एक भयंकर चूक हो रही है,कि माता -पिता अपने बच्चों को अधिक से अधिक सुविधाएं तो दे रहे हैं,परन्तु संस्कारों के नाम पर कुछ खास नहीं दे पा रहे हैं।यही कारण है कि बच्चे एवं युवक नहीं समझ  पा रहे है  कि अपने माता-पिता,परिवार,समाज और राष्ट्र के प्रति क्या कर्तव्य है?  बच्चे माता -पिता,समाज और देश से केवल सुविधाएं चाहते हैं। 

 इन सब के प्रति बच्चों का क्या कर्तव्य है? यह नई  पीढ़ी  के सोच के दायरे से बाहर है।अगर हम अपने अंदर झांक कर देखें तो क्या हमने अपने बच्चों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम,योगीराज श्रीकृष्ण,स्वामी दयानंद,  महाराणा प्रताप,वीर शिवाजी,  झांसी की रानी के विषय में बताया है,कि इन सभी महापुरुषों एवं वीरों ने अपने जीवन में किस प्रकार समाज और राष्ट्र की सेवा की या फिर कभी भारतीय संस्कृति और लोक व्यवहार के महत्व को बताया?यदि मां चाहे तो अपने देश को शिवाजी, दयानंद एवं श्रद्धानंद जैसे समाज सेवी दे सकती है।आज युवाओं में गुंडागर्दी,बलात्कार,चोरी डकैती, नशे की आदत,पाश्चात्य सभ्यता का बढ़ता स्वरूप यही शब्द उपज हैं संस्कार ना देने के कारण ही। इसलिए समय रहते इस दृष्टिकोण को समझने और बच्चों को धार्मिकता और राष्ट्रीयता घुट्टी के रूप में देने हेतु आर्य समाज में भेजें।आप यदि यह समझते हैं कि आपके पैसा खर्च करने से आपके बच्चों में शिक्षा का समावेश या लच्छेदार भाषणों से नैतिकता का विकास हो जाएगा तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं।हम अपने बच्चों को बहुत बड़ा आदमी बनाने की बजाय केवल अच्छा आदमी बनाने का प्रयास करें तो बहुत सारी समस्याओं का हल निकल सकता है।लेकिन यह तभी संभव है जब हम स्वयं अपने अच्छे आचरण के द्वारा उन्हें अच्छे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें।  इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि बच्चों को उच्च व्यवसायिक या अन्य प्रकार की शिक्षा से अथवा जीवन उपयोगी कुशलता प्रदान करने से वंचित रखें,अपितु इन सब के साथ-साथ उनमें अपने अच्छे आचरण द्वारा नैतिकता  के गुणों का विकास,संस्कारों का विकास कर उनका संतुलित व सर्वांगीण विकास करने में सहायक बनें।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आर्य युवक परिषद युवाओ के संस्कार देने के लिये अनेकों चरित्र निर्माण शिविरों का आयोजन करती है। मुख्य अतिथि शिक्षाविद डॉ. संतोष अरोड़ा (कानपुर) अध्यक्ष युवा नेत्री दीप्ति सपड़ा ने भी बच्चों को संस्कार देने की महत्ता पर बल दिया। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि आज नयी पीढ़ी को संस्कार देने की बहुत आवश्कता है। गायिका प्रवीना ठक्कर,कमला हंस,रवीन्द्र गुप्ता,आशा आर्या, चन्द्रकांता गेरा,रजनी गर्ग,रजनी चुघ,जनक अरोड़ा,कौशल्या अरोड़ा,सुनीता अरोड़ा,नरेश प्रसाद आर्य,कमलेश चांदना, कुसुम भंडारी आदि ने मधुर भजन सुनाये।

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