हरियाणा सरकार द्वारा डॉक्टरों को बंधुआ मज़दूर बनाने की चिकित्सा शिक्षा नीति किया लागू : एबीवीपी

 

एम.बी.बी.एस. खात्रों के लिए हरियाणा सरकार द्वारा बनाई गई नई नीति के खिलाफ बिंदु व सवाल :

1. यह नीति डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं, बल्कि वास्तव में यह MBBS के लिए चयन करने वाले मेधावी छात्रों के लिए विध्वंसकारी है।

क्या यह नीट में 720/720 स्कोर करने लायक होशियार होने की सजा है ?

2. इस नीति की क्या आवश्यकता है जब कि हरियाणा नागरिक चिकित्सा सेवा (HCMS) कैडर लगभग भरा हुआ है और आवेदकों की संख्या हमेशा

विज्ञापित सीटों से अधिक होते हैं।

3. यदि कोई छात्र ऋण द्वारा बॉन्ड के भुगतान का विकल्प चुनता है, तो एक 17 वर्षीय 12 वीं पास छात्र पर लगभग 37 लाख का लोन होगा और केवल सरकारी नौकरी करने के लिए पॉलिसी से बाध्य होगा और यह सब 7 वर्ष के लिए होगा।

क्या यह बन्धुआ मजदूरों के समान नहीं है ?

4. 7 वर्ष के ब्याज और कार्यकाल को जोड़ने के बाद ऋण राशि के लिए EMI लगभग 60 हजार प्रति माह होगी।

क्या एक नया MBBS भुगतान कर सकता है ?

5. सरकारी मेडिकल कॉलेजों से हर साल लगभग 700 एमबीबीएस छात्र पास करते है। सरकार के लिए इस नीति (बिंदु 9) के अनुसार नौकरी प्रदान करना अनिवार्य नहीं है। और पिछले कुछ समय में सरकार ने 3-4 साल के बाद ही नई नौकरी प्रकाशित की है।

क्या यह 40 लाख शुल्क के रूप में चार्ज करना नहीं है ?

6. इस नीति ने केवल हरियाणा सरकार की नौकरी करने के लिए एक MBBS स्नातक को बाध्य किया। उच्च अध्ययन (पोस्ट-ग्रेजुएशन PG), सेना, केंद्रीय चिकित्सा सेवाओं या सिविल सर्विसेज का चयन करने वाले MBBS उम्मीदवार के बारे में क्या ?

7. MBBS और PG पाठ्यक्रमों के लिए भी बॉन्ड राशि के अलावा भी चार्ज की जा रही राशि यानी क्रमश: 3,71,280 और 4,50,000 शुल्क संरचना पूरे देश में सबसे अधिक है।

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 10 नवम्बर  2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, फरीदाबाद। अभाविप जिला मीडिया संयोजक रवि पाण्डेय ने बताया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद फरीदाबाद द्वारा आज बोंड पॉलिसी को निरास्त करने के लिऐ CTM फ़रीदाबाद को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है और सदैव से ही विद्यार्थी हित में कार्य कर रहा है। सस्ती और सुलभ शिक्षा विद्यार्थी परिषद का प्रारम्भ से ही मत रहा है। हरियाणा सरकार द्वारा एमबीबीएस करने जा रहे विद्यार्थियों के लिए बनाई गई चिकित्सा शिक्षा नीति ने प्रारम्भ से ही अनेक सवाल खड़े किए है। इस प्रकार एक झटके में छात्र विरोधी बॉन्ड पॉलिसी को लागू करने से छात्र मेडिकल की शिक्षा से वंचित रह जाएगा। इस पॉलिसी को लेकर पूरे हरियाणा के डाक्टरों में शुरू से ही रोष है। विद्यार्थी परिषद शुरू से इस पॉलिसी का विरोध करता आया है।

एबीवीपी प्रदेश मंत्री माधव रावत ने बताया कि जिस प्रकार ये नीति स्टेक होल्डर्स से बात करे बिना पास की गई है उससे अनेक सवाल बड़े हो गए है। यह नीति कहीं से भी विद्यार्थी हित में नजर नहीं आ रही है। उनके अनुसार सबसे बड़ा सवाल है यह है कि अनेक प्रदेशों में जो बॉन्ड है वह इस प्रकार है कि यदि सरकार तय वक़्त में नौकरी नहीं दे पाती हैं तो कैंडिडेट खुद ही बॉन्ड मुक्त हो जाता है. परंतु जैसा कि इस नोटिफिकेशन के बिंदु क्र. 9 में लिखा है कि सरकार नौकरी देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस बॉन्ड के लोन को एजुकेशन लोन की श्रेणी में रखा गया है तो यदि सरकार नौकरी नहीं दे पाई तो उस स्थति में लोन देने के लिए कैंडिडेट बाध्य हो जाएगा। ये बिल्कुल गलत है। बॉन्ड की वैधता तब होती है जब सरकार सरकारी नौकरी दे, परंतु कैंडिडेट तब भी नौकरी ना करे। पॉलिसी को लेकर छात्र समुदाय में शुरू से ही रोष है। इसलिए सरकार को यह पॉलिसी तुरंत वापिस लेना चाहिए।

मेडिकल छात्रों के बीच काम करने वाले एबीवीपी आयाम मेडिविजन के प्रांत संयोजक डॉ ललित ने बताया कि हरियाणा में डॉक्टरों की कोई कमी नही है। हर एक विज्ञप्ति पर 5 गुना से ज्यादा डॉक्टर एप्लाई करते है। अभी निकाली गई लगभग 1200 भर्ती पर 6 हजार के लगभग फॉर्म आए थे। डॉक्टर सरकारी नौकरी ज्वाइन करे सरकार इसके लिए प्रोत्साहन दे, ना की ऐसी बॉन्ड पॉलिसी के माध्यम से किसी को बाध्य करे। इस पॉलिसी के कारण पिछले 3 वर्षो में नीट टॉपर्स छात्रों ने पीजीआई जैसे टॉप संस्थान में दाखिला लेने से भी परहेज किया है। एमसीसी द्वारा कराई काउंसलिंग का डाटा इस और  साफ इशारा करता है। इसको देखते हुए सरकार को जल्दी ही पॉलिसी को पूर्णतः वापिसी करना चाहिए।

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