परमात्मा की कृपा से ही हमारा उद्धार सम्भव : डा जयेन्द्र आचार्य

 

शब्दवाणी समाचार, शुक्रवार 9 दिसम्बर  2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, ग़ाज़ियाबाद। आर्य समाज,आर्ष गुरुकुल एवं वानप्रस्थाश्रम नोएडा के भव्य वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन सामवेद पारायण यज्ञ का आयोजन किया गया।आज के मुख्य यज्ञमान सर्वश्री मनोवीर आर्य सपरिवार,श्रीमती एवं श्री काठपालिया जी,श्रीमती कविता आर्या एवं जितेन्द्र आर्य,मास्टर अयान भसीन रहे।यज्ञाहुति श्रीमती ओमवती गुप्ता,शबनम गुलाटी,स्नेह सेठ,शशि आनंद, संतोष लाल,आदर्श बिश्नोई एवं कमलेश भाटिया द्वारा दी गई। महायज्ञ के ब्रह्मा डॉ जयेंद्र आचार्य आर्ष गुरुकुल नोएडा रहे व वेदपाठ आर्ष गुरुकुल नोएडा के ब्रह्मचारियों द्वारा किया गया। ऋत्विक श्रीमती गायत्री मीना एवं ओमकार शास्त्री रहे।

डॉ जयेंद्र आचार्य ने सामवेद के पवित्र मंत्र की व्याख्या करते हुए बताया कि परमात्मा संसार का सबसे बड़ा राजा है जिसका यश कभी समाप्त नहीं होता उसके समान यशश्वी कोई नहीं उसकी कोई बराबरी नहीं।देश के राजा को सत्य पसंद नहीं बल्कि चापलूसी और झूठ पसंद आता है ये बस नाम के ही राजा हैं इन राजाओं का राजा तुम ही हो तुम्हें न तो झूठ पसंद है और न ही चापलूसी।संसार में झूठों और चापलूसी करने वालों की कोई कमी नहीं।आचार्य जी ने बीरबल अकबर और बैंगन का दृष्टांत सुनाया जिसके अनुसार बीरबल द्वारा पहले बैंगन की तारीफ की फिर जब अकबर को बैंगन खाने से दिक्कत आयी तो बीरबल ने बैंगन की बुराई की इसे चापलूसी ही कहते हैं।भगवान को झूठी चापलूसी पसंद नहीं साधारण राजा तो सभी का खून चूसते हैं छोटा उपहार देकर। परमात्मा सबकुछ देकर भी कुछ नहीं लेते परमात्मा तुम्हारा दिया शरीर व अंग लेकर मैं तुम्हारा ठीक से धन्यवाद भी नही कर सकता।वाणी तेरी दी हुई है पर क्षमता नहीं,मेरे गुण नहीं,तेरी स्तुति कैसे करूं?परमात्मा मैं चाहता हूं मेरे हृदय के मंदिर को पावन कर दो तुम पावन हो,गुणों की खान हो।तुम्हारी मदद पाने से,तुम्हारी दया से मेरा उद्धार हो जाएगा,ऐसा सुंदर शरीर तुमने मुझे दिया है।आचार्य जी ने बताया कि जीवन में अच्छे कर्म करते रहो और उसके समर्पित करते रहो।

सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक पं. दिनेश पथिक एवं ब्रह्मचारी दीपक ने ईश्वर भक्ति के सुंदर भजनों से सभी का मन मोह लिया ऋषि को समर्पित भजन द्वारा टंकारा वाले को नमन किया गया " टनक टनक टंकार है टंकारा की, जय बोलो टंकारा की।जग में जय जयकार है टंकारा की,जय बोलो टंकारा की।" सुनाते जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री रविन्द्र सेठ,अशोकानंद, नरेंद्र सूद,वीरेंद्र बिश्नोई,रविशंकर, राज सरदाना,मधु भसीन,वृंदा सग्गी,अन्नपूर्णा धवन व अन्यों के साथ आर्ष गुरुकुल नोएडा के ब्रह्मचारी उपस्थित रहे।

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