राष्ट्र रक्षा करने का दायित्व भी उनका है जो इसे माता मानते हैं : डा.आरके आर्य

शब्दवाणी समाचार, सोमवार 19 दिसम्बर  2022, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, गाजियाबाद। आर्य समाज नया आर्य नगर मेरठ रोड के 33 वें वार्षिकोत्सव पर ऋग्वेदीय यज्ञ सहारनपुर से पधारे वैदिक विद्वान डा.वेदपाल शास्त्री के ब्रह्मत्व में धूमधाम से संपन्न हुआ,वेद पाठ आचार्य रामा शंकर,उदयवीर शास्त्री एवं कु.प्रियंका आर्या ने किया। बिजनौर से पधारे सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक (जोकि भजनोपदेशकों के निर्माता हैं) पं. नरेश दत्त शास्त्री एवं साथी कलाकारों ने ईश्वर भक्ति,दयानंद गुणगान एवं राष्ट्रभक्ति गीतों से समाबांध दिया जिसे सुनकर श्रोता झूम उठे। राष्ट्र रक्षा सम्मेलन श्री श्रद्धानंद शर्मा की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ वेद वक्ता श्री माया प्रकाश त्यागी (पूर्व कोषाध्यक्ष सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली) ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र रक्षा सम्मेलन तो आर्य समाज शुरू से करता आ रहा है।राष्ट्र के पुरोहित हम बनें और राष्ट्र रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहें प्रत्येक नागरिक राष्ट्र रक्षा के काम में लगे तब कहीं राष्ट्र की रक्षा होगी चारों वर्ण ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र ।चारों को अपने शरीर में घटाया और बताया कि मुख् मंडल ब्राह्मण, बाजू क्षत्रिय,उदर वैश्य और पैर शूद्र यदि पैर ना हों तो तीनों नहीं ठहर सकते हैं शूद्र अछूत नहीं है ऋषि दयानंद इन्हें ऊंचा उठाया और आर्य समाज को आदेश दिया कि इन्हें हेयदृष्टि से मत देखना वेद ने मनुष्य को चार भागों में बांटा है।ब्राह्मण सही दिशा ना देगा तो लोग भटक जाएंगे क्षत्रिय रक्षा ना करें तो लोग लड़ लड़ के मर जाएंगे राष्ट्र की रक्षा चारों मिलकर करें।जनता को राष्ट्र कहते हैं सभी को साथ लेकर चलना है हम अपने लिए ना जिएं अपितु सब के कल्याण के लिए जिएं।

महायज्ञ के ब्रह्मा एवं मुख्य वक्ता वैदिक विद्वान डॉ. वेदपाल शास्त्री ने राष्ट्र रक्षा सम्मेलन में अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र रक्षा के लिए सभी नागरिक भेदभाव, जाति प्रथा,क्षेत्रवाद को छोड़कर सत्य निष्ठा से अपना अपना कार्य करेंगे तो राष्ट्र उन्नति करेगा। स्वदेशी आयुर्वेद के निदेशक डा आर के आर्य ने कहा कि आर्य समाज अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति से राष्ट्र रक्षा सम्मेलन कर रहा है जब स्वतंत्रता नहीं थी तो भी यही कहते थे कि राष्ट्र रक्षा करो उन्होंने बताया कि ऋषि दयानंद ने 1874 में साढ़े तीन महीने में सत्यार्थ प्रकाश लिखा था।स्वतंत्रता के आंदोलन के मूल में ऋषि दयानंद की विचारधारा थी उन्होंने कहा था कि विदेशी राजा से स्वदेशी राजा अच्छा होता है लोकमान्य तिलक ने कहा था स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है मनुष्य का दूध पीना जन्मसिद्ध अधिकार है लेकिन मांस खाना नहीं मनुष्य जन्म से स्वतंत्र रहना चाहता है गुलामी में नहीं भारत में मांडलिक राजा भी स्वतंत्र थे परंतु चक्रवर्ती राजा से केवल परतंत्र थे प्राचीन इतिहास में भी कोई गुलाम नहीं थे देश स्वतंत्र तो हुआ परंतु बलिदानियों की भावना अनुकूल नहीं बन पाया दो टुकड़ों में भारत माता बंट गई भारत की सीमाएं तो सुरक्षित है। परन्तु भीतरघात से खतरा है।वेद कहता है धरती मेरी माता है और मैं इसका पुत्र इस नाते भारत हमारी माता है।दूसरा वर्ग डायन कहता है और भारत माता की जय नहीं बुलाएंगे कहता है।राष्ट्र रक्षा करने का दायित्व भी उनका है जो इसे माता मानते हैं।

समारोह के मुख्य अतिथि माननीय नरेन्द्र कश्यप जी राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ने आयोजकों का सुंदर आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि जब भी देश में कोई समस्या आती है तो आर्य समाज मिलकर उसका समाधान खोजता है। ऋषि दयानंद कृत सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने से देश के प्रति समर्पण की भावना जागती है।उन्होंने रामायण की चौपाई पढ़कर कहा सत्संग के बिना विवेक नहीं होता,प्रभु नाम स्मरण एवं सत्संग से व्यक्ति के जीवन में ज्ञान बढ़ेगा,आचरण शुद्ध होगा, राष्ट्र मजबूत होगा।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री श्रद्धानंद शर्मा ने कहा कि देश की सत्ता सात आठ वर्षो से ऐसे लोगों के हाथ में है जो देश की सीमाओं को सुरक्षित करने में लगे हैं आधुनिक टेक्निक से सीमाओं पर काम हो रहा है ड्रैगन हो या कोई और इधर हिम्मत नहीं पड़ेगी आंख उठाकर देखने की समृद्धि शक्ति भी विश्व में हमारी सर्वोपरि है पश्चिमी सीमा हमारी और आंख उठा कर देख नहीं सकती अब वह चालाकी से आतंकवादियों को भेजती है वह बात एक अलग है सरकार सजग है सैन्य शक्ति जागरूक है। अंदर से जो आक्रमण हो रहा है उस पर विचार करने की आवश्यकता है अन्यथा आज नहीं तो 50 साल बाद देश हाथ से निकल जाएगा बाहर से पैसा मताअंतरण के लिए खर्च हो रहा है जो कि हमारे लिए घातक है।आज हमें अपने गौरवशाली इतिहास को अपनी नई जनरेशन को पढ़ाने की आवश्यकता है, बच्चों को संस्कारित करने की आवश्यकता है,तभी राष्ट्र सुरक्षित रह पाएगा। आर्य केंद्रीय सभा महानगर गाजियाबाद के अध्यक्ष श्री सत्यवीर चौधरी ने बताया कि श्रद्धानंद बलिदान दिवस के अवसर पर महानगर की सभी आर्य समाजों की ओर से रविवार,25 दिसंबर 2022 को प्रातः दस बजे निकलने वाली विशाल शोभायात्रा जोकि शंभू दयाल वैदिक संयास आश्रम दयानंद नगर से प्रातः 10 बजे शहर के मुख्य मार्गो से निकलेगी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। मंच का कुशल संचालन आर्य केंद्रीय सभा के महामंत्री श्री नरेंद्र पंचाल ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री सत्यवीर चौधरी,संतलाल मिश्रा,केके यादव,संजीव, मल्होत्रा, इंद्रसेन सोलंकी,प्रवीण आर्य,डॉ प्रतिभा सिंघल,फूलारानी मल्होत्रा,बालमुकुंद विश्वकर्मा, रोहताश सोलंकी, तेजपाल आर्य, वीके धामा,गौरव सिंह आर्य, बृज पाल गुप्ता,कुलदीप कुमार जॉली,त्रिलोक शास्त्री,वेद पाल तोमर,सुरेश आर्य,नरेश चन्द्र आर्य,प्रमोद आर्य, ओम पाल शास्त्री आदि उपस्थित रहे।

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