उत्‍तर प्रदेश में पहली बार मिट्राक्लिप प्रक्रिया नोएडा के फोटीस हॉस्‍पीटल में 66 वर्षीय मरीज़ पर किया गया

शब्दवाणी समाचार, वीरवार 6 जुलाई 2023, गौतमबुद्ध नगर। उत्‍तर प्रदेश में पहली बार, फोर्टिस हॉस्‍पीटल नोएडा के डॉक्‍टरों ने एक 66 वर्षीय मरीज़ की सफल मिट्राक्लिप प्रक्रिया को संपन्‍न किया है। मरीज़ को हार्ट फेल के साथ-साथ गंभीर मिट्रल रीगर्गिटेशन (ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसमें मिट्रल वाल्‍व के लीफलैट्स सही ढंग से बंद नहीं हो पाते, जिसके कारण पीछे की ओर रक्‍त का प्रवाह फेफड़ों तक पहुंच जाता है) की भी शिकायत थी। मिट्राक्लिप एक छोटे आकार का डिवाइस है जिसे हृदय के मिट्रल वाल्‍व पर लगाया जाता है ताकि वहां से होने वाला रिसाव कम हो सके। फोर्टिस अस्‍पताल नोएडा में डॉ अजय कौल, चेयरमैन, कार्डियाक साइंसेज़, फोर्टिस हॉस्‍पीटल, नोएडा के नेतृत्‍व में डॉक्‍टरों की एक टीम ने 3 घंटे चली प्रक्रिया के दौरान मरीज़ का उपचार किया और उन्‍हें 15 दिनों के बाद अस्‍पताल से छुट्टी दी गई। 

मरीज़ ने 12 साल पहले भी डॉ अजय कौल से परामर्श लिया था और तब वे कोरोनरी आर्टरी रोग से पीड़‍ित थे, तथा उन्‍हें छाती में दर्द और सांस फूलने की भी शिकायत थी। उनका हार्ट उस समय सिर्फ 20-25% काम कर रहा था। मरीज़ का कोरोनरी रीवास्‍क्‍युलराइज़ेशन (कोरोनरी आर्टरी में ब्‍लॉकेज का इलाज) किया गया जिससे उनकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ। अगले लगभग बारह वर्षों तक वह दवाओं के सेवन के साथ ठीक-ठाक चल रहे थे। लेकिन अभी कुछ महीनों से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी और उन्‍हें क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ की भी शिकायत हुई, साथ ही, फेफड़ों में भी जटिलताएं हो गईं और लो ब्‍लड प्रेशर रहने लगा। उन्‍हें उपचार के लिए बार-बार दिल्‍ली के कई अस्‍पतालों में ले जाया गया लेकिन उनके स्‍वास्‍थ्‍य में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बीच, उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उनकी पेशाब की मात्रा काफी कम हो गई तथा शरीर में क्रिटनाइन स्‍तर बढ़ गया।

मरीज़ को जब अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, तब उनकी गंभीर हालत के चलते उन्‍हें इंजेक्‍शन से दवाएं दी जा रही थीं। उनकी विस्‍तृत मेडिकल जांच की गई जिसमें इकोकार्डियोग्राफी, एंजियोग्राफी तथा एमआरआई शामिल थी, और उससे पता चला कि मरीज़ ग्रेड 4 मिट्रल रीगर्गिटेशन से पीड़‍ित थे। फोर्टिस नोएडा के डॉक्‍टरों का कहना था कि मरीज़ के नाजुक स्‍वास्‍थ्‍य के मद्देनज़र उनकी कोई बड़ी सर्जरी नहीं की जा सकती, केवल हल्‍की-फुल्‍की सर्जिकल प्रक्रिया ही उनके लिए उपयुक्‍त थी। इसे देखते हुए तत्‍काल मिट्राक्लिप की सलाह दी गई जो मिनीमॅली इन्‍वेसिव प्रक्रिया है। यह सर्जरी सफल साबित हुई और मरीज़ के स्‍वास्‍थ्‍य में अब काफी सुधार है।

मामले की जानकारी देते हुए डॉ अजय कौल, चेयरमैन, कार्डियाक साइंसेज़, फोर्टिस हॉस्‍पीटल, नोएडा ने कहा, ''जब मरीज़ को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया तो उन्‍हें काफी दवाएं दी जा रही थीं, और उनकी हालत गंभीर थी । इस तरह के मरीज़ हार्ट फेल होने के बाद अंतिम अवस्‍था में होते हैं और ऐसे में इलाज न मिलने पर उनके बचने की उम्‍मीद कुछ ही महीनों की होती है। इसलिए हमने मिट्राक्लिप प्रक्रिया का सहारा लिया क्‍योंकि इसके परिणाम सकारात्‍मक रहते हैं और कोई दीर्घकालिक जटिलता भी नहीं होती। इस क्लिप को रिसाव रोकने के लिए मिट्रल वाल्‍व में लगाया जाता है। अधिक उम्र के ऐसे मरीज़ों में हार्ट वाल्‍व को रिपेयर करने की सर्जरी खतरे से खाली नहीं होती जो और भी कई रोगों से जूझ रहे होते हैं। ऐसे मामलों में मिट्राक्लिप ही एकमात्र ऐसी प्रक्रिया है जो सफल रहती है। यह काफी जटिल प्रक्रिया है जिसके लिए काफी सटीकता और धैर्य की आवश्‍यकता होती है।

मोहित सिंह, ज़ोनल डायरेक्‍टर, फोर्टिस अस्‍पताल नोएडा ने कहा, ''हम उत्‍तर प्रदेश में पहली मिट्राक्लिप प्रक्रिया को अंजाम देकर खुश हैं। यह मामला मरीज़ की उम्र और हालत के चलते काफी जटिल था। लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद मरीज़ को सही समय पर अस्‍पताल में भर्ती कराने, उचित मूल्‍यांकन तथा सही समय पर इलाज मिलने से मरीज़ का जीवन बचाया जा सका। क्‍लीनिकल उत्‍कृष्‍टता और अपनी श्रेणी में श्रेष्‍ठ इमरजेंसी केयर फोर्टिस अस्‍पताल नोएडा की बुनियादी खूबियां हैं, और हम मरीज़ों की जान बचाने तथा बेहतर नतीजों के लिए सर्वोत्‍तम देखभाल सुनिश्चित करने का लगातार प्रयास करते हैं।

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