आखिर क्यों कमजोर हो रही है महिलाओं की फर्टिलिटी : डॉ. चंचल शर्मा

 

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 5 जुलाई 2023, नई दिल्ली। शादी के बाद बच्चे की चाहत हर महिला के दिल में होती है लेकिन कई बार बहुत प्रयास करने के बाद भी प्रेगनेंट होने में दिक्कत आती है तो ऐसे में महिला को यह जानने की जरुरत है की आखिर महिलाओं की फर्टिलिटी क्यों प्रभावित हो रही है? महिलाओं की फर्टिलिटी कमजोर हो रही है यह एक चिंता का विषय है जो आजकल विश्वभर में बहुत चर्चा का विषय बन गया है। महिलाओं के जीवन में फर्टिलिटी, यानी गर्भाधान क्षमता जो एक महत्वपूर्ण अंग है। हालांकि, कई शोध दर्शाते है कि एक महिला की बच्चों को जन्म देने की औसत संख्या 2.2 से घटकर सीधा 2.0 पर आ गई है। 2.1 टोटल फर्टिलिटी रेट को प्रतिस्थापन दर के तौर पर देख सकते हैं। 

आशा आयुर्वेदा क्लिनिक की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के मुताबिक महिलाओं के शरीर में हर पड़ाव पर हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। हर अवस्था में हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है। किसी स्थितियों में हार्मोन्स का स्तर बढ़ता है, तो कुछ स्थितियों में हार्मोन्स का स्तर कम भी होता है। 

इसके अलावा डॉ. चंचल बताती है कि आजकल की भागदौड़ ने महिला और पुरुष दोनों की फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खान-पान समेत कई आदतें लोगों की फर्टिलिटी को बर्बाद कर रही हैं। अधिकतर लोगों को पता भी नहीं होता कि वे जिन आदतों को डेली रूटीन में अपना रहे हैं, उनसे फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ रिप्रोडक्टिव हेल्थ भी बुरी तरह बिगड़ रही है। फर्टिलिटी को लेकर लोगों को अलर्ट होने की जरूरत है, वरना उनका माता-पिता बनने के सपने में मुश्किल आ सकती है।

डॉ. चंचल ने फर्टिलिटी कमजोर होने की 5 प्रमुख वजह बताई है।

पहला की हमारी लाइफस्टाइल का रिप्रोडक्टिव हेल्थ और फर्टिलिटी पर गहरा असर होता है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल लोगों की फर्टिलिटी तेजी से कमजोर कर रही है। 

दूसरी की हमारे खान-पान की गलत आदतें जैसे जंक फूड और पोषक तत्वों की कमी वाले पदार्थ जो फर्टिलिटी के दुश्मन हैं। 

तीसरा तनाव यानी अत्यधिक तनाव लेने से आपकी रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बहुत बुरा असर पड़ता है। 

चोथा बिना फिजिकल एक्टिविटी वाला रूटीन फर्टिलिटी के लिए खतरनाक हो सकता है। आखिर में स्मोकिंग करने और शराब का सेवन करनी रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए घातक हो सकती हैं।

डॉ चंचल शर्मा के अनुसार, पंचकर्म अर्थात पांच ऐसे चिकित्सा पद्धितयों का समुह (वमन कर्म, विरेचन कर्म, बस्ती कर्म, नस्यम कर्म और रक्तमोक्षण कर्म) जो निसंतानता जैसी समस्या को जड़ से ठीक करने में सक्षम है। पंचकर्म चिकित्सा में निसंतान जोड़ों के शरीर की प्रकृति के अनुसार ही उनका पंचकर्म उपचार किया जाता है। पंचकर्म निःसंतानता का सबसे प्रभावी उपचार होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कपल के दोषों को संतुलित करते है। जिससे वह माता-पिता बनने के लिए पूर्ण रुप से योग्य बन जाते है। यह उन निःसंतान जोड़ों के लिए सबसे सफल होता है जिन्हें इनफर्टिलिटी की समस्या के चलते माता-पिता बनने का सुख प्राप्त नहीं होता है। पंचकर्म की सफलता दर अन्य किसी उपचार की अपेक्षा अधिक होती है। दूसरे इलाज के मुकाबले इसकी सफलता दर ज्यादा है और इस इलाज के दौरान आपको किसी तरह का कोई दर्द नहीं होता न ही किसी प्रकार का साइड इफैक्ट का सामना करना पड़ता है।

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