ब्लैकबेरीज़ ने Hangzhou 2022 एशियाई पैरा गेम्स के भारतीय विजेताओं को किया सम्मानित

◆  ब्लैकबेरीज़ ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित अपने स्टोर में विजेताओं की सफलता का जश्न मनाया, जिन्होंने कुल 111 पदक जीते, जिसमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य पदक शामिल थे। ब्रांड को पीसीआई के साथ साझेदारी में चीन में भारतीय दल को ‘ऑफिशियल सेरेमोनियल पार्टनर’ के रूप में उनकी ड्रेस तैयार करने का सम्मान मिला था।

शब्दवाणी समाचार, बुधवार 24 जनवरी 2024, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली। ब्लैकबेरीज़ ने नई दिल्ली में अपने स्टोर में Hangzhou 2022 एशियाई पैरा गेम्स के भारतीय विजेताओं को किया सम्मानित वैश्विक भारतीयों की फैशन जरूरतों को पूरा करने वाले महत्वाकांक्षी भारतीय मेन्सवियर ब्रांड ब्लैकबेरीज़, ने हाल ही में आयोजित हुए चौथे एशियाई पैरा गेम्स 2022 में भारत की 111 पदकों की अभूतपूर्व जीत का जश्न मनाया, जिसे 22-28 अक्टूबर 2023 के दौरान Hangzhou में आयोजित किया गया था। बढ़ते रहो के प्रेरणादायक लोकाचार को अपनाते हुए, ब्लैकबेरीज़ को चौथे एशियाई पैरा खेलों के लिए ‘ऑफिशियल सेरेमोनियल पार्टनर’ के रूप में भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के साथ अपनी साझेदारी पर बहुत गर्व है।

श्री गुरशरण सिंह, भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के सम्मानित महासचिव, ब्लैकबेरीज़ द्वारा आयोजित पैरालंपिक विजेताओं के सम्मान समारोह में अपनी सम्मानजनक उपस्थिति दर्ज कराएंगे। श्री सिंह देश में पैरा-स्पोर्ट्स के विकास के पीछे एक प्रेरक शक्ति हैं।ब्लैकबेरीज़ ने ऑफिशियल सेरेमोनियल पार्टनर बनने के लिए भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) के साथ पार्टनरशिप की और मेगा इवेंट में भाग लेने वाले भारतीय दल की ड्रेस को तैयार किया। जैसा कि ब्लैकबेरी की सार्थकता पैरा-एथलीटों की अटूट आत्मविश्वास को दर्शाता है, जो लगातार मुश्किलों का सामना करते हैं और बाधाओं को पार करते हैं। भारतीय दल के लिए समारोह में पहनने के लिए सूट तैयार करना गहन आकांक्षा का क्षण था। इस सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, ब्रांड ने उन सभी विजेताओं को सम्मानित किया जिन्होंने सामूहिक रूप से देश के लिए 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य सहित कुल 111 पदक जीते।

हमें इन विजेताओं पर बहुत गर्व है जिन्होंने सभी कठिनाइयों को पार करते हुए जीत हासिल की और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के गौरव को बढ़ाया। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सभी कठिनाइयों के खिलाफ सफलता प्राप्त करने के लिए लोगों का सम्मान और आदर प्राप्त किया है।  हम दयालुता के इन छोटे कार्यों से उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हैं। हम इन एथलीटों की असाधारण यात्रा का जश्न मनाने के लिए उत्साह के साथ प्रतिबद्ध हैं, जो संघर्ष और सहनशीलता पर विजय का प्रतीक हैं। ब्लैकबेरीज़ के लिए इस यात्रा में उनके साथ जुड़ना, अत्यंत सम्मान की बात है,'' ब्लैकबेरीज़ के सह-संस्थापक और निदेशक श्री नितिन मोहन ने कहा। यह भारतीय कपड़ों का प्रतिष्ठित ब्रांड, पुरुषों के कपड़ों के नवीन, स्टाइलिश और जबरदस्त फिटिंग रेंज की अद्वितीय गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।

रूबीना फ्रांसिस के विषय में:

रूबीना फ्रांसिस, पैरालिंपियन शूटर और एशियाई खेलों की पदक विजेता, ने दोनों पैरों में क्लबफुट के साथ जन्म लिया था, जिससे उसके परिवार को भावनात्मक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बाहरी धारणाओं के बावजूद, उन्होंने सहजता और अटूट भावना का प्रदर्शन किया। 2015 में 16 साल की उम्र में, रूबीना ने अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की और पिछले नौ वर्षों में 20 अंतरराष्ट्रीय पदकों का प्रभावशाली संग्रह बनाया। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, उन्होंने पोडियम पर खड़े होने और 2022 में Hangzhou एशियाई पैरागेम्स में अपने देश का झंडा फहराने के अपने सपने को पूरा किया। इन उपलब्धियों ने रूबीना को आगे बढ़ने और अपने ऊर्ध्व पथ की और बढ़ने के दृढ़ संकल्प को और बढ़ावा दिया है। 

प्रणव सूरमा के बारे में:

प्रणव सूरमा, जिनको 2011 में 16 साल की उम्र में एक गंभीर दुर्घटना के परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी, उनकी कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, जिससे उनके जीवन में एक रूकाव आ गया। एशियाई पैरागेम्स के बारे में जानकारी हासिल करके, उन्होंने अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और एक सार्थक जीवन को पुनः खोजने का निर्णय लिया। प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र और जिम वर्कआउट उनके दृढ़ संकल्प और जीवन शक्ति का प्रमाण बन गया। 2019 में, प्रणव ने बीजिंग ग्रांड प्रिक्स वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, इसके बाद 2022 में Hangzhou एशियाई पैरागेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। तब से, वह अपनी यात्रा में दृढ़ बने हुए है और कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अंकुर धामा के विषय में:

अंकुर धामा, सोनीपत के एक उल्लेखनीय एथलीट, ने अंधेपन के चुनौतियों को पार करके पैरा-एथलेटिक्स के विश्व में एक उज्ज्वल सितारा बनने का सामर्थ्य प्रदर्शित किया। एक किसान परिवार में जन्मे, अंकुर ने छह वर्ष की अवस्था में अपनी दृष्टि खो दी थी। वह दिल्ली चले गए और लोधी रोड पर स्थित एक दृष्टिबाधित स्कूल में दाखिला लिया। डॉक्टरों के पूर्वानुमान के बावजूद, उन्होंने मुश्किलों को पार किया और एक शानदार पैरा-एथलीट के रूप में उभरे। 2014 के एशियाई पैरा खेलों में, धामा ने अपनी जन्मजात प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक रजत और दो कांस्य पदक हासिल किए। हालांकि 2016 पैरालिंपिक में चोट का सामना करने के बावजूद, अंकुर धामा विजयी वापस लौटे। 2022 एशियाई पैरा गेम्स में अंकुर ने दो स्वर्ण पदक जीते। उनकी शानदार उपलब्धियां 2023 पैरालंपिक खेलों में भी जारी रहीं, जहां उन्होंने 1500 मीटर और 5000 मीटर स्पर्धाओं में दबदबा बनाते हुए 2 स्वर्ण पदक हासिल किए। अंकुर धामा की यात्रा एक साहस, संकल्प और उत्कृष्टता की कहानी है।

धर्मेंद्र के विषय में:

धर्मेंद्र गुर्जर, जो झझारपुरा, जमूरा, करौली (राजस्थान) से हैं, पैरा-एथलेटिक्स में एक उल्लेखनीय हस्ती हैं। उन्होंने 2021 में, क्रॉस कंट्री में एक कांस्य पदक हासिल किया और 2022 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 1500 मीटर और 3000 मीटर स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीते। वर्तमान में, वह निपुण पैरा-एथलीट अंकुर धामा के लिए मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। धर्मेंद्र के मार्गदर्शन में, अंकुर ने पैरालिंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। पैरालंपिक के मंच पर अंकुर धामा की जीत में धर्मेंद्र गुर्जर की विशेषज्ञता और समर्थन का एक महत्वपूर्ण योगदान है।

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