फिल्म समीक्षा : आखिर पलायन कब तक …? (हिन्दू मुसल्मान के बीच की दूरियां पर आधारित)

शब्दवाणी समाचार, शुक्रवार 16 फरवरी 2024, (फिल्म समीक्षक : रेहाना परवीन)  सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली। फिल्म आखिर पलायन कब तक …? 16 फरवरी 2024 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्म है। फिल्म आखिर पलायन कब तक …? का वीरवार को PVR प्लाज़ा, नई दिल्ली में प्रेस शो हुआ जिसमें इस फिल्म को फिल्म के निर्माता, निर्देशक एवं कलाकारों के साथ देखने का मुझे अवसर मिला। फिल्म आखिर पलायन कब तक …? बॉलीवुड सोशल ड्रामा फिल्म है। फिल्म का निर्देशन मुकुल द्वारा किया गया है। फिल्म के मुख्य कलाकार राजेश शर्मा, भूषण पटेल, गौरव शर्मा, चितरंजन गिरी और धीरेन्द्र द्विवेदी इत्यादि हैं। तथा सोहनी कुमारी और अलका चौधरी इस फिल्म के निर्माता हैं। फिल्म आखिर पलायन कब तक …? को लेखक ने वक्फ बोर्ड जो भारत पाकिस्तान के बटवारे के समय जो हिन्दू पाकिस्तान से भारत और जो मुसलमान भारत से पाकिस्तान चले गए उनकी जमीन सरकारी हो जाएगी इस समझौते के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने भारत के मुस्लमानो की जमीन को अधिग्रण करने के लिए वक्फ बोर्ड बनाया था। परन्तु उसके बाद समय समय पर राजनितिक लाभ के लिए तत्कालीन भारत सरकारों ने वक्फ बोर्ड को कुछ और अधिकार दिया उस पर सवाल के साथ साथ आज़ादी के बाद से देश में हिन्दू मुस्लमानों के बीच जो दूरियां बनी कि यहां तक हिन्दू मुसल्मान के साथ रहना और मुसल्मान हिन्दू के बीच रहना अपने आप को असुरक्षित मानने लगे इसीलिये दोनों अपने अपने समुदाय में रहने का प्रयास करने लगे इस कारण हिन्दू के बीच के मुसल्मान और मुसल्मान के बीच से हिन्दू अपने घरवार को छोड़कर जाने लगे जो आज तक परम्परा है जिस कारण हिन्दू मुस्लमानो का अलग अलग मोहल्ला बन गया इन मोहल्लो को आज देखकर ऐसा प्रतीत होता है यह एक देश नहीं कोई दो देश है इसलिए कमोवेश दोनों को एक दूसरे के मोहल्ले में जाने में असुरक्षित महसूस करता है। इसी मुद्दों को फिल्म में उठाया है, फिल्म में एक डायलॉग है एक धर्म का आदमी जब दूसरे धर्म के आदमी को मारता है तो मरता है इंसान ही ना। लेखक और निर्माता ने मुद्दा अच्छा उठाने का प्रयास किया। पर प्रेस शो के समय फिल्म की मार्केटिंग राजनीति के चश्में से किया जा रहा ऐसा प्रतीत हुआ, जो फिल्म के लिए दुर्भाग्य होगा। फिल्म की कहानी एक मर्डर से शुरू होती है जिसकी पुलिस जांच करती है जांच के अंत में राजनितिक लाभ के लिए मर्डर किया जाता है। जो कि मर्डर या किसी भी दूसरे की हानि हमेशा राजनितिक या आर्थिक लाभ के लिए ही किया जाता है उस समय करने वाला यह नहीं देखता यह मेरे तरफ का है या दूसरे तरफ का बस वो देखता है म्रेरा क्या लाभ हुआ। फिल्म को बगैर राजनितिक के चश्में से पूरे परिवार के साथ देखा जा सकता है। इसलिए इस फिल्म को मैँ पांच में से बगैर राजनितिक के चश्में से देखने वालों के लिए चार नंबर देती हूँ बाकि लोग समझदार हैं फिल्म को देखने के बाद वो कोई भी नंबर दे सकते हैं। 


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