ऑर्किड्स स्‍कूल, गुरुग्राम ने नमो एनजीओ के सहयोग से ई-वेस्‍ट मैनेजमेंट पर किया वर्कशॉप

शब्दवाणी समाचार, शनिवार 2 मार्च 2024, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, गुरुग्राम। ऑर्किड्स द इंटरनेशनल स्‍कूल ने नमो एनजीओ के साथ मिलकर ई-वेस्‍ट मैनेजमेंट  पर आयोजित एक वर्कशॉप में भाग लिया। नमो एक प्रमुख एनजीओ है, जो पर्यावरण की स्थिरता के लिये समर्पित है। इस वर्कशॉप का लक्ष्‍य इलेक्‍ट्रॉनिक कचरे की ज्‍वलंत समस्‍या और पर्यावरण को उससे होने वाले नुकसान पर जागरूकता बढ़ाना था। इस वर्कशॉप की मदद से ऑर्चिड द इंटरनेशनल स्‍कूल के विद्यार्थियों को सीखने का एक बेजोड़ अनुभव मिला है। नमो एनजीओ के प्रतिनिधियों ने ऑर्किड्स द इंटरनेशनल स्‍कूल के विद्यार्थियों को ई-वेस्‍ट से होने वाले खतरों पर जानकारी दी। सत्र में विद्यार्थियों को कचरे के दूसरे प्रकारों से ई-वेस्‍ट को अलग करने की जरूरत भी बताई गई और उसके अलग निपटान का महत्‍व समझाया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों को गीले और सूखे कचरे के डिब्‍बों के साथ-साथ ई-वेस्‍ट के लिये कूड़ेदान रखने का निर्देश दिया गया। एनजीओ ने एक विस्‍तृत प्रस्‍तुति भी दी, जिसमें ई-वेस्‍ट को रिसाइकल करने की प्रक्रिया पर रोशनी डाली गई। 

ई-वेस्‍ट के पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को कम करने के लिये अपनाने के योग्‍य संवहनीय पद्धतियों के बारे में भी बताया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों को ई-वेस्‍ट इकट्ठा करने और उसके सही निपटान के लिये कॉमन सर्विस सेंटरों के इस्‍तेमाल का तरीके के बारे में जानकारी दी गई। इसमें विभिन्‍न प्रकारों के ई-वेस्‍ट को छांटना और उन्‍हें मैनेज करना आसान बनाने में नमो जैसे एनजीओ की भूमिका पर जोर दिया गया। इस अवसर पर ऑर्किड्स द इंटरनेशनल स्‍कूल की प्रिंसिपल  विभा गुप्‍ता ने कहा, ई-वेस्‍ट के सही मैनेजमेंट पर जागरूकता बढ़ाकर हम अगली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जिम्‍मेदार बनाने के लिये सशक्‍त कर रहे हैं। इस तरह के इवेंट्स न सिर्फ विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं, बल्कि आज के डिजिटल जमाने में उन्‍हें पर्यावरण संरक्षण के लिये सक्रिय उपाय करने की प्रेरणा भी देते हैं।ऑर्किड्स द इंटरनेशनल स्‍कूल और नमो के बीच गठबंधन पर्यावरण की स्थिरता के लिये उनकी साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह पर्यावरण को लेकर सचेत नागरिकों की एक पीढ़ी को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देता है। इस तरह की पहलों के माध्‍यम से दोनों संस्‍थाओं ने सकारात्‍मक बदलाव को प्रेरित करने का प्रयास किया है। उन्‍होंने भविष्‍य की पीढि़यों के लिये ज्‍यादा स्‍वस्‍थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में योगदान दिया है।

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