67 फीसदी भारतीयों के लिए मखाने और सूखे मेवे बने पहली पसंद : फार्मले की हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट

▪ 10 में से 9 लोगों ने स्नैकिंग के सेहतमंद विकल्पों को चुनने की इच्छा जताई

▪ 58 फीसदी ने बताया कि ज़्यादा लागत, हेल्दी स्नैकिंग को अपनाने में आने वाली बड़ी रूकावट

▪ 39 फीसदी लोग सप्ताह के आम दिनों के बजाए सप्ताहान्त पर दोगुना अधिक इस्नैक्स का सेवन 

शब्दवाणी समाचार, मंगलवार 9 जुलाई 2024, सम्पादकीय व्हाट्सप्प 8803818844, नई दिल्ली।भारत में स्नैकिंग के बदलते रूझानों पर रोशनी डालने के प्रयास में जाने-माने स्नैकिंग स्पेशलिस्ट फार्मले ने आज राजधानी में आयोजित पहले इंडियन स्नैकिंग समिट के दौरान अपनी तरह की पहली हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2024 का अनावरण किया। भारत में सेहतमंद स्नैकिंग को बढ़ावा देने वाले कारकों और रूझानों पर रोशनी डालते हुए इस रिपोर्ट ने बताया कि ज़्यादातर भारतीय, स्नैक्स के पौष्टिक विकल्पों को अपनाना चाहते हैं, रिपोर्ट के अनुसार आज के उपभोक्ता सोच-समझ पर अपने आहार का चुनाव करते हैं। हालांकि सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 58 फीसदी लोगों ने बताया कि रीटेल की उंची लागत इस बदलाव को अपनाने में आने वाली मुख्य बाधा है। हेल्दी स्नैकिंग की बात करें तो मखाने और सूखे मेवे की मांग लगातार बढ़ रही है, 67 फीसदी उत्तरदाता अपने आहार में इन पोषक तत्वों को शामिल करना चाहते हैं। भारत में मखाने की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए 59 फीसदी मिलेनियल्स इसे भरोसमंद स्नैक मानते हैं, वहीं जनरेशन ज़ी (49 फीसदी) और जनरेशन एक्स (47 फीसदी) के लिए भी मखाने स्नैकिंग का पसंदीदा विकल्प हैं, इससे स्पष्ट है कि हर उम्र के लोगों में मखाने की लोकप्रियता बढ़ रही है। इसके अलावा 70 फीसदी उत्तरदाताओं ने बताया कि स्नैक्स के सेवन के लिए उनका पसंदीदा समय शाम का समय है, वे शाम की चाय/ कॉफी के साथ स्नैक्स का सेवन करना चाहते हैं। देश भर में 6000 से अधिक लोगों के साथ किए गए विस्तृत सर्वेक्षण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई, इनमें हर उम्र के प्रतिनिधी-बूमर्स, जनरेशन एक्स, मिलेनियल्स और जनरेशन ज़ी शामिल हैं। 

रिपोर्ट के परिणामों पर बात करते हुए आकाश शर्मा, सह-संस्थापक, फार्मले ने बताया हेल्दी स्नैकिं रिपोर्ट के माध्यम से हम हर उम्र, क्षेत्र और पेशे की बदलती पसंद एवं प्राथमिकताओं को समझना चाहते हैं। भारत में स्नैकिंग का भविष्य तालमेल बनाने पर टिका है। आज के उपभोक्ता स्नैक्स का चुनाव करते समय स्वाद के साथ-साथ सेहत और पर्यावरण को भी ध्यान में रखते हैं। भारत में स्नैकिंग में आ रहा बदलाव स्वाद, स्वास्थ्य एवं सशक्त राष्ट्र की अववधारणाओं से प्रेरित है। हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2024 के अनुसार सर्वे में हिस्सा लेने वाले 73 फीसदी उपभोक्ता किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले इस पर दिए गए इन्ग्रीएन्ट्स की सूची और उनके पोषक मूल्य को पढ़ते हैं। इनमें से 93 फीसदी लोगों ने स्वस्थ विकल्प अपनाने की इच्छा जताई, जो लेबल पढ़ने और सजग चुनाव के संबंध को दर्शाता है। खाद्य पदार्थों जैसे मसालों, कन्फेक्शनरी और फास्ट-मुविंग गुड्स में मिलावट के बढ़ते मामलों के बीच इस रिपोर्ट को जारी किया गया है। जिसके चलते खरीददारों में जागरुकता की एक लहर शुरू हुई है, जो खाद्य पदार्थ के पैकेट खरीदने से पहले इसका लैबल पढ़कर इसमें मौजूद संभावी हानिकारक पदार्थ के बारे में जान लेना चाहते हैं। हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2024 के लिए किए गए सर्वे ने बताया। 

रिपोर्ट एक और पहलु पर रोशनी डालती है कि आज बड़ी संख्या में लोग सोच-समझ कर अपने आहार का चुनाव करते हैं, तकरीबन 60 फीसदी लोग प्राकृतिक, मिलावट रहित खाद्य पदार्थों जैसे मेवे, बीज, साबुत अनाज को अपनाना चाहते हैंं। इससे स्पष्ट है कि आज के दौर में लोगों का झुकाव सेहतमंद स्नैकिंग की ओर बढ़ रहा है। फ्लेवर्स की बात करें तो इस दृष्टि से भी बड़ा बदलाव आया है। जहां एक ओर मिलेनियल्स और जनरेशन ज़ी बोल्ड फ्लेवर्स जैसे पेरी पेरी को पसंद करते हैं, वहीं बड़ी उम्र के लोग नमक और काली मिर्च जैसे क्लासिक फ्लेवर्स को पसंद करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 39 फीसदी लोगों का कहना है कि वे सप्ताह के आम दिनों के बजाए सप्ताहान्त पर तकरीबन दो गुना अधिक स्नैक्स का सेवन करते हैं। 10 में से 9 उत्तरदाताओं ने बताया कि पारम्परिक स्नैक्स के सेहतमंद विकल्पों की बात करें तो भारत का स्नैकिंग उद्योग स्वास्थ्य क्रान्ति के दौर से गुज़र रहा है। जहां एक ओर स्वाद को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य के प्रति सजगता भी बढ़ रही है। अधिक से अधिक उपभोक्ता सोच-समझ कर पौष्टिक और सेहतमंद स्नैक्स ही खाना चाहते हैं। 

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